आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 35घ

कुछ प्रारंभिक खर्च का परिशोधन

धारा

धारा संख्या

35घ

अध्याय शीर्षक

अध्याय IV - कुल आय की गणना

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2007

कुछ प्रारंभिक खर्च का परिशोधन

कुछ प्रारंभिक खर्च का परिशोधन

14[कतिपय प्रारम्भिक व्ययों पर अपाकरण (अमोरटाइजेशन)

1535घ. (1) जहां कोर्इ निर्धारिती जो भारतीय कंपनी है या (कंपनी से भिन्न) कोर्इ ऐसा व्यक्ति है जो भारत में निवास करता है, उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट कोर्इ व्यय 31 मार्च, 1970 के पश्चात्,—

(i) अपने कारबार के प्रारम्भ के पूर्व, अथवा

(ii) अपने कारबार के प्रारम्भ के पश्चात्, अपने औद्योगिक उपक्रम के विस्तार के संबंध में या अपने नर्इ औद्योगिक एकक की स्थापना के संबंध में,

उपगत करता है, वहां उस निर्धारिती को, इस धारा के उपबंधों के अनुसार और उनके अधीन रहते हुए, उतनी राशि की कटौती अनुज्ञात की जाएगी जो, यथास्थिति, उस पूर्ववर्ष से, जिसमें उसका कारबार प्रारम्भ होता है या उस पूर्ववर्ष से जिसमें औद्योगिक उपक्रम का विस्तार पूरा हो जाता है या नया औद्योगिक एकक उत्पादन या कार्य करना प्रारंभ करता है, प्रारम्भ होने वाले दस उत्तरवर्ती पूर्ववर्षों मे से प्रत्येक के लिए उस व्यय के 1/10 के बराबर है :

16[परन्तु जहां निर्धारिती 31 मार्च, 1998 के पश्चात् उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट कोर्इ व्यय करता है, वहां इस उपधारा के उपबंध उस प्रकार प्रभावी होंगे मानो, "दस उत्तरवर्ती पूर्ववर्षों में से प्रत्येक के लिए ऐसे व्यय के 1/10 के बराबर राशि" शब्दों के स्थान पर "पांच उत्तरवर्ती पूर्ववर्षों में से प्रत्येक के लिए ऐसे व्यय के 1/5 के बराबर राशि" शब्द रखे गए हों।]

(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट व्यय निम्नलिखित खंडों में से एक या अधिक में विनिर्दिष्ट व्यय होगा, अर्थात् :–

() निम्नलिखित के संबंध में व्यय–

(i) साध्यता रिपोर्ट तैयार करना;

(ii) परियोजना रिपोर्ट तैयार करना;

(iii) निर्धारिती के कारबार के लिए आवश्यक बाजार सर्वेक्षण या कोर्इ अन्य सर्वेक्षण करना;

(iv) निर्धारिती के कारबार के संबंध में इंजीनियरी सेवाएं :

परन्तु यह तब जब कि इस खंड में निर्दिष्ट साध्यता रिपोर्ट या परियोजना रिपोर्ट तैयार करने या बाजार का सर्वेक्षण या कोर्इ अन्य सर्वेक्षण या इंजीनियरिंग सेवाओं से संबंधित कार्य स्वयं निर्धारिती द्वारा किया गया है या किसी ऐसे समुत्थान द्वारा किया गया है जो बोर्ड द्वारा इस निमित्त तत्समय अनुमोदित17 है;

() निर्धारिती के कारबार की स्थापना या उसके संचालन से संबंधित किन्हीं प्रयोजनों के लिए निर्धारिती और किसी अन्य व्यक्ति के बीच किसी करार का प्रारूप बनाने के लिए विधिक खर्च;

() जहां निर्धारिती कोर्इ कंपनी है, वहां निम्नलिखित व्यय भी—

(i) कम्पनी के संगम ज्ञापन और संगम अनुच्छेदों के प्रारूप बनाने के लिए विधिक खर्च;

(ii) संगम ज्ञापन और संगम अनुच्छेद मुद्रण पर व्यय;

(iii) कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) के उपबंधों के अधीन कंपनी को रजिस्टर कराने के लिए फीस;

(iv) कंपनी के शेयरों या डिबेंचरों को लोक अभिदाय के लिए जारी करने के संबंध में व्यय जो निम्नांकन (हामीदारी) कमीशन, दलाली और प्रोस्पैक्टस का प्रारूप बनाने, उसे टाइप कराने या मुद्रित कराने और उसके विज्ञापन का खर्च;

() व्यय की अन्य ऐसी मदें (जो ऐसे व्यय नहीं हैं जो इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध के अधीन किसी मोक या कटौती के पात्र हैं) जिन्हें विहित किया जाए।

(3) जहां उपधारा (2) में निर्दिष्ट व्यय की कुल रकम,—

() परियोजना की लागत पर, या

() उस दशा में जहां निर्धारिती भारतीय कंपनी है, उस कंपनी के विकल्प पर कम्पनी के कारबार में नियोजित पूंजी पर,

ढार्इ प्रतिशत की दर से परिकलित रकम से अधिक है, वहां आधिक्य को उपधारा (1) के अधीन अनुज्ञेय कटौती की संगणना करने के प्रयोजनार्थ हिसाब में नहीं लिया जाएगा :

18[परन्तु जहां उपधारा (2) में निर्दिष्ट व्यय की कुल राशि 31 मार्च, 1998 के पश्चात् उपगत की जाती है, वहां इस उपधारा के उपबंधों का वही प्रभाव होगा मानो "ढार्इ प्रतिशत" शब्दों के स्थान पर "पांच प्रतिशत" शब्द रखे गए हों।]

स्पष्टीकरण.–इस उपधारा में,—

() "परियोजना की लागत" से अभिप्रेत है,—

(i) उपधारा (1) के खंड (i) में निर्दिष्ट दशा में, ऐसी स्थिर आस्तियों की, जो भूमि, भवन, पट्टाधृति, संयंत्र, मशीनरी, फर्नीचर, फिटिंग और रेल साइडिंग है, वह वास्तविक लागत (जिसके अंतर्गत भूमि और भवनों के विकास पर व्यय भी है), जो उस पूर्ववर्ष के अंतिम दिन को जिसमें निर्धारिती का कारबार प्रारंभ हुआ है, निर्धारिती की बहियों में दिखार्इ गर्इ है;

(ii) उपधारा (1) के खंड (ii) में निर्दिष्ट दशा में, ऐसी स्थिर आस्तियों की, जो भूमि, भवन, पट्टाधृति, संयंत्र, मशीनरी, फर्नीचर, फिटिंग और रेल साइडिंग है, वह वास्तविक लागत (जिसके अंतर्गत भूमि और भवनों के विकास पर व्यय भी है), जो उस पूर्ववर्ष के अंतिम दिन को जिसमें यथास्थिति औद्योगिक उपक्रम का विस्तार पूरा हो गया है या नए औद्योगिक एकक ने उत्पादन करना या कार्य करना प्रारम्भ कर दिया है, निर्धारिती की बहियों में दिखार्इ गर्इ है, वहां तक जहां तक निर्धारिती के औद्योगिक उपक्रम के विस्तार या नए औद्योगिक एकक की स्थापना के संबंध में स्थिर आस्तियां अर्जित या विकसित की गर्इ हैं;

() "कम्पनी के कारबार में नियोजित पूंजी" से अभिप्रेत है,—

(i) उपधारा (1) के खण्ड (i) में निर्दिष्ट दशा में, निर्गमित शेयर पूंजी, डिबेंचरों और दीर्घकालिक उधारों का वह कुल योग जो उस पूर्ववर्ष के अंतिम दिन है जिसमें कंपनी का कारबार प्रारंभ किया गया है;

(ii) उपधारा (1) के खण्ड (ii) में निर्दिष्ट दशा में, निर्गमित शेयर पूंजी, डिबेंचरों और दीर्घकालिक उधारों का वह कुल योग जो उस पूर्ववर्ष के अंतिम दिन है जिसमें यथास्थिति, औद्योगिक उपक्रम का विस्तार पूरा हो गया है या नए औद्योगिक एकक ने उत्पादन करना या कार्य प्रारंभ कर दिया है, वहां तक जहां तक कि शेयर पूंजी, डिबेंचरों और दीर्घकालिक उधार कंपनी के औद्योगिक उपक्रम के विस्तार या नए औद्योगिक एकक की स्थापना के संबंध में निर्गमित किए गए हैं;

() "दीर्घकालिक उधार" से अभिप्रेत है—

(i) कंपनी द्वारा सरकार से या भारतीय औद्योगिक वित्त निगम से या भारतीय औद्योगिक प्रत्यय और विनिधान निगम से या किसी अन्य ऐसी वित्तीय संस्था से 19[जो धारा 36 की उपधारा (1) के खंड (viii) के अधीन कटौती की पात्र है] या किसी बैंककारी संस्था से (जो ऊपर निर्दिष्ट वित्तीय संस्था न हो) उधार लिया गया धन; या

(ii) भारत से बाहर पूंजी संयंत्र और मशीनरी के क्रय की बाबत किसी अन्य देश में उसके द्वारा उधार लिया गया धन या उपगत ऋण, उस दशा में जहां वे निबंधन जिन पर ऐसा धन उधार लिया गया है या ऋण उपगत किया गया है, सात वर्ष से अन्यून अवधि के दौरान उसके प्रतिसंदाय का उपबंध करते हैं।

(4) जहां निर्धारिती, कंपनी या सहकारी सोसाइटी से भिन्न व्यक्ति है, वहां उपधारा (1) के अधीन कोर्इ कटौती अनुज्ञेय न होगी जब तक कि निर्धारिती के उस वर्ष या उन वर्षों के, जिसमें या जिनमें उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट व्यय किया गया है, लेखाओं की धारा 288 की उपधारा (2) के नीचे स्पष्टीकरण में परिभाषित लेखापाल द्वारा संपरीक्षा नहीं कर दी गर्इ है और निर्धारिती उस प्रथम वर्ष की, जिसमें इस धारा के अधीन कटौती का दावा किया गया है, आय की विवरणी के साथ ऐसी संपरीक्षा की विहित फार्म20 में रिपोर्ट जो ऐसे लेखापाल द्वारा सम्यक् रूप से हस्ताक्षरित और सत्यापित है और जिसमें ऐसी विशिष्टियां, जो विहित की जाएं, वर्णित हैं प्रस्तुत नहीं करता है।

(5) जहां किसी ऐसी भारतीय कंपनी का, जो उपधारा (1) के अधीन कटौती की हकदार है, उपक्रम उपधारा (1) में बतार्इ गर्इ दस वर्ष की अवधि बीतने के पूर्व किसी अन्य भारतीय कंपनी को किसी समामेलन की स्कीम के अधीन अंतरित किया जाता है, वहां—

(i) समामेलक कंपनी की दशा में, उस पूर्ववर्ष के लिए जिसमें समामेलन होता है, उपधारा (1) के अधीन कोर्इ कटौती अनुज्ञेय नहीं होगी; और

(ii) इस धारा के उपबंध समामेलित कंपनी को, यथाशक्य, ऐसे लागू होंगे जैसे वे समामेलक कंपनी को तब लागू होते यदि समामेलन न हुआ होता।

21[(5क) जहां किसी भारतीय कंपनी का उपक्रम, जो उपधारा (1) के अधीन कटौती का हकदार है, उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट दस वर्ष की अवधि बीतने से पूर्व अविलयन (डीमर्जर) की स्कीम में एक अन्य कंपनी को अंतरित कर दिया जाता है :

(i) वहां पूर्ववर्ष में जिसमें अविलयन होता है, अविलयित (डीमर्जड) कंपनी की दशा में उपधारा (1) के अधीन कोर्इ कटौती अनुज्ञेय नहीं होगी; और

(ii) इस धारा के उपबंध, यथाशक्य, परिणामी कंपनी को वैसे ही लागू होंगे जैसे वे अविलयित कंपनी को लागू होते यदि अविलयन न हुआ होता।]

(6) जहां उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट किसी व्यय की बाबत निर्धारण वर्ष के लिए किसी कटौती का इस धारा के अधीन कोर्इ दावा किया गया है और वह अनुज्ञात की गर्इ है, वहां उस व्यय के आधार पर जिसकी बाबत कटौती अनुज्ञात की गर्इ है उसी या किसी अन्य निर्धारण वर्ष के लिए, इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध के अधीन कटौती नहीं की जाएगी।]

 

14. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1971 से अन्त:स्थापित।

15. सुसंगत केस लॉज़ के लिए देखिये टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

16. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.4.1999 से अंत:स्थापित।

17. अनुमोदित समुत्थानों की सूची के लिए, देखिये टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

18. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.4.1999 से अंत:स्थापित।

19. वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा 1.4.2000 से "जो धारा 36 की उपधारा (1) के खंड (viii) के प्रयोजनों के लिए केंद्रीय सरकार द्वारा तत्समय अनुमोदित है" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

20. धारा 35घ(4) के अधीन कम्पनी या सहकारी सोसाइटी से भिन्न निर्धारिती द्वारा दाखिल की जाने वाली संपरीक्षा रिपोर्ट के लिए, देखिये नियम 6कख और फार्म संख्या 3ख.

21. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.4.2000 से अंत:स्थापित।

 

 

[वित्त अधिनियम, 2007 तथा कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 2006 द्वारा संशोधित रूप में]

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