धारा 115ञख का संशोधन
धारा 115ञख का संशोधन।
35. आय-कर अधिनियम की धारा 115ञख में,—
(क) स्पष्टीकरण 1 में,—
(i) खंड (चख) के उपखंड (आ) के, "प्रभार्य ब्याज, स्वामिस्व" शब्दों के स्थान पर, "प्रभार्य ब्याज, लाभांश, स्वामिस्व" शब्द रखे जाएंगे;
(ii) दीर्घ पंक्ति में खंड (iiघ) के उपखंड (आ) के, "प्रभार्य ब्याज, स्वामिस्व" शब्दों के स्थान पर, "प्रभार्य ब्याज, लाभाशं, स्वामिस्व" शब्द रखे जाएंगे।
(ख) उपधारा (2ग) के पश्चात् निम्नलिखित धारा अंत:स्थापित की जाएगी, अर्थात्:—
"(2घ) किसी ऐसे निर्धारिती की दशा में, जो कोई कंपनी है और जहां निर्धारिती द्वारा धारा 92गग के अधीन किए गए किसी अग्रिम कीमत निर्धारण करार के मद्दे या धारा 92गड़ के अधीन किए जाने के लिए अपेक्षित द्वितीय समायोजन के मद्दे बही लाभ में किसी पूर्व वर्ष या बही लाभ में सम्मिलित वर्षों की आय के कारण पूर्व वर्ष में कोई वृद्धि हुई है, वहां निर्धारण अधिकारी उसे निर्धारिती द्वारा इस निमित्त् किए गए आवेदन पर पूर्व वर्ष या वर्षों के बही लाभ और निर्धारिती द्वारा उपधारा (1) के अधीन पूर्व वर्ष के दौरान संदेय कर, यदि कोई हो, की पुन: संगणना ऐसी रीति में करेगा, जिसे विहित किया जाए और धारा 154 के उपबंध यथा शक्य रूप से लागू होंगे तथा उस धारा की उपधारा (7) में विनिर्दिष्ट चार वर्ष की अवधि को उस वित्तीय वर्ष के अंत से गणना में लिया जाएगा, जिसमें निर्धारण अधिकारी को उक्त आवेदन प्राप्त होता है:
पंरतु इस उपधारा के उपबंध तभी लागू होंगे, यदि निर्धारिती ने धारा 115ञकक के अधीन किसी पश्चातवर्ती निर्धारण वर्ष में इस धारा के अधीन संदत्त कर के प्रत्यय का उपयोग नहीं किया है:
परंतु यह और कि इस उपधारा के उपबंध 1 अप्रैल, 2020 या उसके पूर्व आरंभ होने वाले उस निर्धारण वर्ष को भी लागू होंगे और इस अधिनियम के किन्हीं अन्य उपबंधों में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, इस उपधारा के उपबंधों के मद्दे उद्भूत प्रतिदाय पर ऐसी निर्धारिती को कोई ब्याज संदेय नहीं होगा।"।

