कुछ देशी कंपनियों की दशा में सीमित अवधि के लिए शेष अवक्षयण और शेष विनिधान मोक पर निर्बन्धन (पाबंदियां)
कुछ देशी कंपनियों की दशा में सीमित अवधि के लिए शेष अवक्षयण और शेष विनिधान मोक पर निर्बन्धन (पाबंदियां)
34क. (1) 1 अप्रैल, 1992 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के संबंध में किसी देशी कंपनी के कारबार के लाभ और अभिलाभ की संगणना करने में, जहां 1 अप्रैल, 1991 को या उसके पूर्व प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत किसी पूर्ववर्ष के संबंध में शेष अवक्षयण मोक या शेष विनिधान मोक या दोनों को प्रभावी किया जाना है, वहां कटौती ऐसे मोक या मोकों के दो-तिहार्इ तक सीमित होगी और अतिशेष,—
(क) जहां वह अवक्षयण मोक से संबंधित है, वहां 1 अप्रैल, 1993 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए अवक्षयण मोक के साथ जोड़ा जाएगा और उस मोक का भाग समझा जाएगा अथवा यदि उस पूर्ववर्ष के लिए ऐसा कोर्इ मोक नहीं है, तो उस पूर्ववर्ष के लिए मोक समझा जाएगा और उत्तरवर्ती पूर्ववर्षों के लिए इसी प्रकार आगे भी समझा जाता रहेगा;
(ख) जहां वह विनिधान मोक से संबंधित है, वहां 1 अप्रैल, 1993 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष को अग्रनीत किया जाएगा और विनिधान मोक का अतिशेष, यदि कोर्इ हो, जो उस समय बाकी है, अगले निर्धारण वर्ष के लिए अग्रनीत किया जाएगा और जहां ऐसे अतिशेष के भाग का समायोजन किए जाने के पूर्व आठ वर्ष की अवधि समाप्त हो जाती है वहां उक्त अवधि को आठ वर्ष से आगे उतने समय तक के लिए बढ़ा दिया जाएगा जब तक कि उक्त अतिशेष का भाग देशी कंपनी के कारबार के लाभ और अभिलाभ में आमेलित नहीं कर लिया जाता है।
(2) 1 अप्रैल, 1992 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष के लिए, धारा 32 की उपधारा (2) और धारा 32क की उपधारा (3) के उपबंध उस विस्तार तक लागू होंगे जिस तक ऐसे उपबंध इस धारा की उपधारा (1) के उपबंधों से असंगत नहीं हैं।
(3) उपधारा(1) की कोर्इ बात वहां लागू नहीं होगी जहां शेष अवक्षयण मोक या शेष विनिधान मोक की रकम, या देशी कंपनी की दशा में ऐसे मोकों की कुल रकम, जो भी हो, एक लाख रुपए से कम है।
(4) धारा 234ख और धारा 234ग में की कोर्इ बात, निर्धारित कर पर या विवरणी में दी गर्इ आय पर, जो भी हो, देय है किसी कर के संदाय में किसी कमी को वहां लागू नहीं होगी जहां ऐसी कमी इस धारा के अधीन अवक्षयण मोक या विनिधान मोक की रकम को निर्बन्धित करने के कारण है और धारा 139 की उपधारा (1)के अधीन आय की विवरणी देने के पूर्व निर्धारिती ने कमी की रकम का संदाय कर दिया है।
[वित्त अधिनियम, 2019 द्वारा संशोधित रूप में]

