स्थल पुन:स्थापन निधि
स्थल पुन:स्थापन निधि
33कखक.(1) जहां निर्धारिती भारत में पैट्रोलियम या प्राकृतिक गैस या दोनों की संभावना का पता लगाने, या निकालने या उत्पादन करने का कारबार चला रहा है और जिसके संबंध में केन्द्रीय सरकार ने ऐसे कारबार के लिए ऐसे निर्धारिती के साथ करार किया है, पूर्ववर्ष के अंत से पहले—
(क) भारतीय स्टेट बैंक के पास रसायन और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में भारत सरकार द्वारा इस निमित्त अनुमोदित स्कीम में (जिसे इस धारा में स्कीम कहा गया है) विनिर्दिष्ट प्रयोजनों के लिए और उसके अनुसार उस बैंक के यहां निर्धारिती द्वारा रखे गए खाते में (जिसे इस धारा में विशेष खाता कहा गया है) कोर्इ रकम या रकमें जमा कर दी है/हैं; या
(ख) खंड (क)में उल्लिखित मंत्रालय द्वारा बनार्इ गर्इ स्कीम (जिसे इसमें आगे निक्षेप स्कीम कहा गया है) के अनुसार और उसमें विनिर्दिष्ट प्रयोजनों के लिए निर्धारिती द्वारा खोले गए खाते में (जिसे इस धारा में स्थल पुन: स्थापन खाता कहा गया है) कोर्इ रकम जमा कर दी है,
वहां निर्धारिती को इस धारा के उपबंधों के अधीन रहते हुए निम्नलिखित कटौती अनुज्ञात की जाएगी (ऐसी कटौती पूर्ववर्ती वर्षों से अग्रनीत की गर्इ हानि के, यदि कोर्इ हो, धारा 72 के अधीन मुजरा किए जाने से पूर्व अनुज्ञात की गर्इ हो)–
(i) इस प्रकार जमा की गर्इ रकम या रकमों के योग के बराबर राशि; या
(ii) ऐसे कारबार के लाभ के (इस धारा के अधीन कोर्इ कटौती से पूर्व ''कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ'' शीर्ष के अधीन संगणित) बीस प्रतिशत के बराबर राशि,
इनमें से जो भी कम हो :
परन्तु जहां निर्धारिती कोर्इ फर्म है या कोर्इ व्यक्ति संगम है या कोर्इ व्यष्टि निकाय है, वहां इस धारा के अधीन कटौती, यथास्थिति, किसी भागीदार या ऐसी फर्म, व्यक्ति संगम या व्यष्टि निकाय के किसी सदस्य की आय की संगणना करते समय अनुज्ञात नहीं की जाएगी:
परन्तु यह और कि जहां विशेष खाते में या स्थल पुन:स्थापन खाते में जमा किसी रकम की बाबत कोर्इ कटौती किसी पूर्ववर्ष में इस उपधारा के अधीन अनुज्ञात की जा चुकी है, वहां किसी अन्य पूर्ववर्ष में ऐसी रकम के संबंध में कोर्इ कटौती नहीं की जाएगी :
परन्तु यह भी कि ब्याज के रूप में विशेष खाते में या स्थल पुन: स्थापन खाते जमा की गर्इ कोर्इ रकम निक्षेप समझी जाएगी।
(2) उपधारा (1) में कटौती तब तक स्वीकार्य नहीं होगी जब तक कि उस निर्धारण वर्ष से सुसंगत, जिसके लिए कटौती का दावा किया जाए, पूर्ववर्ष के लिए निर्धारिती के ऐसे कारबार के लेखाओं की धारा 288 की उपधारा (2) के नीचे स्पष्टीकरण में परिभाषित लेखापाल द्वारा संपरीक्षा न कर दी गर्इ हो और 33ड़ग[लेखाओं की धारा 44कख में निर्दिष्ट विनिर्दिष्ट तारीख से पूर्व, और निर्धारिती, अपनी आय की विवरणी के साथ, उस तारीख तक, ऐसे लेखाकार द्वारा सम्यकत:] हस्ताक्षरित और सत्यापित विहित प्ररूप में ऐसी संपरीक्षा की रिपोर्ट न दी हो :
परन्तु यह कि ऐसे मामले में, जिसमें निर्धारिती से किसी अन्य विधि द्वारा या उसके अधीन अपना लेखा संपरीक्षित कराया जाना अपेक्षित है, यदि निर्धारिती अपने कारबार के लेखाओं की ऐसी विधि के अनुसार संपरीक्षा करवा लेता है और ऐसी अन्य विधि के अधीन अपेक्षित संपरीक्षा रिपोर्ट और इस उपधारा के अधीन विहित प्ररूप में और रिपोर्ट भी दे देता है तो यह इस उपधारा के उपबंधों का पर्याप्त पालन होगा।
(3) विशेष खाते में या स्थल पुन: स्थापन खाते में निर्धारिती की जमा राशि, यथास्थिति, स्कीम में या निक्षेप स्कीम में विनिर्दिष्ट प्रयोजनों से भिन्न प्रयोजनों के लिए निकालने नहीं दी जाएगी।
(4) उपधारा (3) में किसी बात के होते हुए उपधारा (1) के अधीन निम्नलिखित का क्रय करने के लिए प्रयुक्त किसी रकम की बाबत कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी—
(क) किसी कार्यालय परिसर या निवास स्थान में जिसके अंतर्गत गैस्ट हाउस के रूप में कोर्इ वास-सुविधा है, लगार्इ जाने वाली कोर्इ मशीनरी या संयंत्र;
(ख) कोर्इ कार्यालय साधित्र (जो कम्प्यूटर न हों);
(ग) कोर्इ मशीनरी या संयंत्र, जिसकी पूरी वास्तविक लागत किसी एक पूर्ववर्ष के 'कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ' शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय की संगणना करते समय कटौती के रूप में (अवक्षयण के रूप में या अन्यथा) अनुज्ञात की जाती है;
(घ) ग्यारहवीं अनुसूची की सूची में विनिर्दिष्ट किसी वस्तु या चीज़ के सन्निर्माण, विनिर्माण या उत्पादन के कारबार के प्रयोजनों के लिए किसी औद्योगिक उपक्रम में लगार्इ जाने वाली कोर्इ मशीनरी या संयंत्र।
(5) जहां विशेष खाते या स्थल पुन: स्थापन खाते में निर्धारिती की जमा राशि निर्धारिती द्वारा किसी पूर्ववर्ष में खाते के बंद होने पर निकाल ली जाती है, वहां धारा 42 में उल्लिखित करार में उपबंधित लाभ या उत्पादन अंश के रूप में केन्द्रीय सरकार को संदेय रकम, यदि कोर्इ है, घटाकर, खाते में से इस प्रकार निकाली गर्इ रकम उस पूर्ववर्ष में कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ समझी जाएगी और तदनुसार उस पूर्ववर्ष की आय के रूप में उस पर कर लगेगा।
स्पष्टीकरण.–जहां कोर्इ रकम पूर्ववर्ष में जिसमें निर्धारिती द्वारा चलाया गया कारबार अस्तित्व में नहीं रहा है, खाते के बंद होने पर निकाल ली जाए वहां इस उपधारा के उपबंध उसी प्रकार लागू होंगे मानो कारबार उस पूर्ववर्ष में अस्तित्व में हो।
(6)जहां विशेष खाते में या स्थल पुन: स्थापन खाते में निर्धारिती की जमा राशि निर्धारिती द्वारा स्कीम या निक्षेप स्कीम के अनुसार ऐसे कारबार के संबंध में किसी व्यय के लिए प्रयुक्त कर ली जाए, वहां ऐसा व्यय ''कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ'' शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय की संगणना में अनुज्ञात नहीं होगा।
(7) जहां विशेष खाते या स्थल पुन: स्थापन खाते में निर्धारिती की जमा राशि, जो भारतीय स्टेट बैंक द्वारा पूर्ववर्ष के दौरान निर्मुक्त कर दी जाए या जो निर्धारिती द्वारा स्थल पुन: स्थापन खाते में से स्कीम या निक्षेप स्कीम के अनुसार ऐसे कारबार के प्रयोजनों के लिए निर्धारिती द्वारा प्रयुक्त किए जाने के लिए निकाली जाए उस प्रकार उस पूर्ववर्ष के भीतर पूर्णत: या भागत: प्रयुक्त न की जाए वहां वह पूर्ण राशि या उसका भाग जो इस प्रकार प्रयुक्त न हो, कारबार का लाभ और अभिलाभ समझा जाएगा और तदनुसार उस पूर्ववर्ष की आय के रूप में उस पर आय कर लगेगा।
(8) जहां स्कीम या निक्षेप स्कीम के अनुसार अर्जित कोर्इ आस्ति निर्धारिती द्वारा किसी व्यक्ति को उस पूर्ववर्ष के अंत से, जिसमें वह अर्जित की गर्इ थी, आठ वर्ष बीतने से पूर्व किसी समय, किसी पूर्ववर्ष में बेची जाए या अन्यथा अन्तरित की जाए, वहां ऐसी आस्ति की लागत का ऐसा भाग, जिसका संबंध उपधारा (1) के अधीन अनुज्ञात कटौती से है, उस पूर्ववर्ष में, जिसमें आस्ति बेची जाए या अन्यथा अंतरित की जाए, कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ समझा जाएगा और तदनुसार उस पर उस पूर्ववर्ष की आय के रूप में आय-कर प्रभार्य होगा:
परन्तु इस उपधारा की कोर्इ भी बात उस दशा में लागू नहीं होगी—
(i) जहां आस्ति निर्धारिती द्वारा सरकार, स्थानीय प्राधिकरण, केन्द्रीय, राज्य या प्रांतीय अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित निगम या सरकारी कंपनी को, जिसकी परिभाषा कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 617 में दी गर्इ है, बेची जाती है या अन्यथा अंतरित की जाती है; या
(ii) जहां आस्ति का विक्रय या अंतरण फर्म द्वारा चलाए गए कारबार या वृत्ति में कंपनी द्वारा फर्म के उत्तरवर्तन के संबंध में किया जाता है जिसके परिणामस्वरूप फर्म कम्पनी को कोर्इ आस्ति बेचती है या अन्यथा अंतरित करती है और स्कीम या निक्षेप स्कीम कम्पनी को फर्म को लागू रीति से लागू रहती है।
स्पष्टीकरण.–परन्तुक के खंड (ii)के उपबंध वहीं लागू होंगे जहां—
(i) उत्तरवर्तन से ठीक पूर्व कारबार या वृत्ति से संबंधित फर्म की सभी सम्पत्तियां कम्पनी की संपत्तियां बन जाती हैं;
(ii) उत्तरवर्तन से ठीक पूर्व कारबार या वृत्ति से संबंधित फर्म के सभी दायित्व कम्पनी के दायित्व बन जाते हैं; और
(iii) कम्पनी के सभी शेयरधारक उत्तरवर्तन से ठीक पूर्व फर्म के भागीदार थे।
(9) यदि केन्द्रीय सरकार ऐसा करना आवश्यक या समीचीन समझे तो वह राजपत्र में अधिसूचना द्वारा निदेश दे सकेगी कि इस धारा के अधीन अनुज्ञेय कटौती उस तारीख के बाद जो उसमें बतार्इ जाए अनुज्ञात नहीं की जाएगी।
स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए,–
(क) 'भारतीय स्टेट बैंक' से भारतीय स्टेट बैंक अधिनियम, 1955 (1955 का 23) के अधीन गठित भारतीय स्टेट बैंक अभिप्रेत है;
(ख) ''विशेष खाते में या स्थल पुन: स्थापन खाते में निर्धारिती की जमा राशि'' पद के अन्तर्गत ऐसे खातों में मिलने वाला ब्याज भी है।
33ड़ग. वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा 1.4.2020 से "निर्धारिती, अपनी आय की विवरणी के साथ, ऐसे लेखाकार द्वारा सम्यकत:" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2024 द्वारा संशोधित रूप में]

