आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 33क

विकास छूट

धारा

धारा संख्या

33क

अध्याय शीर्षक

अध्याय IV - कुल आय की गणना

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2006

विकास छूट

विकास छूट

34[विकास मोक

3533क. (1) किसी ऐसे निर्धारिती के, जो भारत में चाय उगाने और विनिर्मित करने का कारबार करता है, स्वामित्व के अधीन भारत में स्थित किसी भूमि पर चाय के झाड़ों का रोपण करने की बाबत विकास मोक के तौर पर ऐसी राशि जो निम्नलिखित के बराबर हो—

(i) जहां चाय के झाड़ों का किसी ऐसी भूमि पर, जिस पर चाय के झाड़ों का किसी समय रोपण नहीं किया गया था, या किसी ऐसी भूमि पर, जिसका पहले परित्याग कर दिया गया था, रोपण किया गया है, वहां रोपण के वास्तविक खर्च का 36[पचास] प्रतिशत; और,

(ii) जहां चाय के झाड़ों का किसी ऐसी भूमि पर, जिस पर पहले ही रोपण किया जा चुका है, चाय के उन झाड़ों के स्थान पर जो समाप्त हो चुके हैं या स्थायी रूप से बेकार हो गए हैं, रोपण किया जाता है, वहां रोपण के वास्तविक खर्च का 37[तीस] प्रतिशत,

इस धारा के उपबंधों के अधीन रहते हुए 38[इसके अधीन विनिर्दिष्ट रीति से कटौती के रूप में अनुज्ञात की जाएगी, अर्थात् :—

() प्रथमत: विकास मोक की रकम की संगणना रोपण के वास्तविक खर्च के उस भाग के प्रति निर्देश से की जाएगी जो उस पूर्ववर्ष के दौरान, जिसमें भूमि यथास्थिति, रोपण या पुन: रोपण के लिए तैयार की जाती है और ठीक आगामी पूर्ववर्ष में, उपगत किया जाता है और इस प्रकार संगणित रकम ऐसे ठीक आगामी पूर्ववर्ष की बाबत कटौती के रूप में अनुज्ञात की जाएगी; और

() तत्पश्चात् विकास मोक की रोपण के वास्तविक खर्च के प्रति निर्देश से पुन: संगणना की जाएगी और यदि इस प्रकार संगणित राशि खण्ड () के अधीन कटौती के रूप में, अनुज्ञात रकम से अधिक है तो वह अधिक राशि, उस पूर्ववर्ष के, जिसमें भूमि, यथास्थिति रोपण या पुन: रोपण के लिए तैयार की गर्इ है, ठीक अगले तीसरे पूर्ववर्ष की बाबत कटौती के रूप में अनुज्ञात की जाएगी :]

39[परन्तु खंड (i) के अधीन कोर्इ कटौती तब तक अनुज्ञात नहीं की जाएगी जब तक कि रोपण 31 मार्च, 1965 के पश्चात् प्रारंभ न हुआ हो और 1 अप्रैल, 1990 के पूर्व पूरा न कर दिया गया हो :

परन्तु यह और कि खंड (ii) के अधीन कोर्इ कटौती तब तक अनुज्ञात नहीं की जाएगी जब तक कि रोपण 31 मार्च, 1965 के पश्चात् प्रारंभ न हुआ हो और 1 अप्रैल, 1970 के पूर्व पूरा न कर दिया गया हो।]

(2) जहां 40[उस पूर्ववर्ष से, जिसकी बाबत कटौती, उपधारा (1) के अधीन अनुज्ञात की जानी अपेक्षित है,] सुसंगत निर्धारण वर्ष के लिए निर्धारणीय निर्धारिती की कुल आय 41[(इस प्रयोजन के लिए कुल आय की संगणना धारा 33 की उपधारा (1) या उपधारा (1क) या उपधारा (2) के खण्ड (ii) के अधीन मोक की कटौती के पश्चात् किन्तु इस धारा की उपधारा (1) के अधीन कोर्इ कटौती या अध्याय 6क 42[* * *] के अधीन कोर्इ कटौती किए बिना की गर्इ हो)] शून्य है या विकास मोक की कुल रकम से जिसका परिकलन उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट दरों पर 43[और रीति से] किया गया हो, कम है, वहां—

(i) उपधारा (1) के अधीन उस निर्धारण वर्ष के लिए विकास मोक के रूप में अनुज्ञात की जाने वाली राशि केवल उतनी रकम होगी जितना कि उक्त कुल आय को घटाकर शून्य कर देने के लिए पर्याप्त हो; और

(ii) विकास मोक की रकम उस परिमाण तक जिस तक वह पूर्वोक्त रूप में अनुज्ञात नहीं की गर्इ है, आगामी निर्धारण वर्ष को अग्रनीत की जाएगी और आगामी निर्धारण वर्ष के लिए अनुज्ञात किया जाने वाला विकास मोक उतनी रकम होगी जितनी उस निर्धारण वर्ष के लिए निर्धारणीय निर्धारिती की कुल आय को, जो पूर्वोक्त रीति में संगणित की गर्इ हो घटाकर शून्य कर देने के लिए पर्याप्त हो और विकास मोक का वह अतिशेष, यदि कोर्इ हो, जो उस समय बाकी हो, आगामी निर्धारण वर्ष को अग्रनीत किया जाएगा और इसी प्रकार आगे किया जाता रहेगा, किन्तु ऐसे विकास मोक का कोर्इ भी भाग उस निर्धारण वर्ष के जिसमें कटौती प्रथम बार अनुज्ञेय थी ठीक उत्तरवर्ती आठ से अधिक निर्धारण वर्षों को अग्रनीत नहीं किया जाएगा।

स्पष्टीकरण.–जहां एक से अधिक पूर्ववर्षों की बाबत उपधारा (2) के उपबंधों के अनुसार विकास मोक किसी निर्धारण वर्ष के लिए अनुज्ञात किया जाना है और उस निर्धारण वर्ष के लिए निर्धारणीय निर्धारिती की कुल आय 44[(इस प्रयोजन के लिए कुल आय की संगणना धारा 33 की उपधारा (1) या उपधारा (1क) या उपधारा (2) के खण्ड (ii) के अधीन मोक की कटौती के पश्चात् किन्तु इस धारा की उपधारा (1) के अधीन कोर्इ कटौती या अध्याय 6क 45[* * *] के अधीन कोर्इ कटौती किए बिना की गर्इ हो)] शून्य है या उस निर्धारण वर्ष की बाबत दिए जाने वाले विकास मोक की रकम से कम है, वहां निम्नलिखित प्रक्रिया का अनुसरण किया जाएगा, अर्थात् :—

(i) इस धारा की उपधारा (2) के खण्ड (ii) के अधीन मोक उस उपधारा के खण्ड (i) के अधीन किसी मोक के दिए जाने के पूर्व दिया जाएगा; और

(ii) जहां उन रकमों की बाबत जो एक से अधिक निर्धारण वर्षों से अग्रनीत की गर्इ हों, इस धारा की उपधारा (2) के खण्ड (ii) के अधीन कोर्इ मोक दिया जाना है, वहां ऐसी रकम जो किसी पूर्वतर निर्धारण वर्ष से अग्रनीत की गर्इ है उस रकम से पहले अनुज्ञात की जाएगी जो किसी बाद के निर्धारण वर्ष से अग्रनीत की गर्इ हो।

(3) उपधारा (1) के अधीन कटौती केवल तब अनुज्ञात की जाएगी जब निम्नलिखित शर्तें पूरी हो जाती हैं, अर्थात्:–

(i) इस निमित्त विहित46 विशिष्टियां निर्धारिती द्वारा दे दी गर्इ हैं;

(ii) वस्तुत: अनुज्ञात किए जाने वाले विकास मोक के पचहत्तर प्रतिशत के बराबर रकम सुसंगत पूर्ववर्ष के लाभ और हानि लेखों में से डेबिट की जाती है और एक रिजर्व खाते में जमा की जाती है जिसका उस कारबार के ठीक आगे से आठ वर्ष की अवधि के दौरान निर्धारिती द्वारा उपयोग–

() लाभांशों या लाभों के तौर पर वितरण करने; या

() लाभों के रूप में भारत के बाहर प्रेषण के लिए या भारत के बाहर किसी आस्ति के सृजन करने,

के प्रयोजनों से भिé प्रयोजनों के लिए उस उपक्रम के कारबार के लिए किया जाना है; और

(iii) ऐसी अन्य शर्तें जैसी विहित की जाएं।

(4) यदि ऐसी कोर्इ भूमि, उस पूर्ववर्ष की समाप्ति से, जिसमें उपधारा (1) के अधीन कटौती अनुज्ञात की गर्इ थी, आठ वर्ष की समाप्ति से पूर्व किसी समय निर्धारिती द्वारा किसी व्यक्ति को बेची जाती है या अन्यथा अन्तरित की जाती है, तो इस धारा के अधीन किसी मोक के बारे में यह समझा जाएगा कि वह इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए गलत तौर से किया गया है और धारा 155 की उपधारा (5क) के उपबंध तदनुसार लागू होंगे :

परन्तु यह उपधारा वहां लागू नहीं होगी—

(i) जहां वह भूमि निर्धारिती द्वारा सरकार को, किसी स्थानीय प्राधिकारी को, किसी केन्द्रीय, राज्य या प्रान्तीय अधिनियम द्वारा स्थापित किसी निगम को या कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 617 में यथापरिभाषित किसी सरकारी कम्पनी47 को बेची जाती है या अन्यथा अन्तरित की जाती है, या

(ii) जहां उस भूमि का विक्रय या अन्तरण उपधारा (5) या उपधारा (6) में निर्दिष्ट समामेलन या उत्तरवर्तन के संबंध में किया जाता है।

48[(5) जहां समामेलन की किसी स्कीम में, समामेलक कम्पनी कोर्इ ऐसी भूमि, जिसकी बाबत उपधारा (1) के अधीन समामेलक कम्पनी को विकास मोक अनुज्ञात किया गया है, समामेलित कम्पनी को बेचती है या अन्यथा अन्तरित करती है वहां,—

() समामेलित कम्पनी समामेलक कम्पनी द्वारा सृष्ट रिजर्व की बाबत और उस कालावधि की बाबत जिसके अन्दर ऐसी भूमि बेची नहीं जाएगी या अन्यथा अन्तरित नहीं की जाएगी, उपधारा (3) में वर्णित शर्तें पूरी करती रहेगी और इन शर्तों में से किसी का व्यतिक्रम होने पर धारा 155 की उपधारा (5क) के उपबन्ध समामेलित कम्पनी को वैसे ही लागू होंगे जैसे वे समामेलक कम्पनी को लागू होते यदि उसने व्यतिक्रम किया होता; और

() ऐसी भूमि की बाबत समामेलक कम्पनी को उस समय भी बाकी विकास मोक का अतिशेष यदि कोर्इ हो उपधारा (2) के उपबंधों के अनुसार समामेलित कम्पनी को अनुज्ञात किया जाएगा, किन्तु इस प्रकार की ऐसी कुल अवधि जिसके लिए विकास मोक का अतिशेष समामेलक कम्पनी और समामेलित कम्पनी के निर्धारणों में अग्रनीत किया जाएगा, उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट आठ वर्ष की अवधि से अधिक नहीं होगी और समामेलित कम्पनी को इस धारा के प्रयोजनों के लिए ऐसी भूमि की बाबत निर्धारिती माना जाएगा।]

(6) जहां किसी फर्म द्वारा चलाए जाने वाले कारबार में कोर्इ कम्पनी उसकी उत्तरवर्ती हो जाती है जिसके परिणामस्वरूप वह फर्म उस कम्पनी को ऐसी कोर्इ भूमि बेचती है या अन्यथा अन्तरित करती है जिस पर विकास मोक अनुज्ञात किया गया है, वहां उपधारा (5) के खण्ड () और () के उपबंध, उस फर्म और कम्पनी को यथासंभव लागू होंगे।

स्पष्टीकरण.–इस उपधारा के उपबंध तब लागू होंगे जब धारा 33 की उपधारा (4) के स्पष्टीकरण में दी गर्इ शर्तें पूरी हो जाती हैं।

(7) इस धारा के प्रयोजनों के लिए ''रोपण की वास्तविक लागत'' से निम्नलिखित का योग अभिप्रेत हैं—

(i) भूमि को तैयार करने की लागत;

(ii) बीज, कलम और नर्सरियों की लागत;

(iii) रोपण और पुन:रोपण की लागत; तथा

(iv) उस पूर्ववर्ष के लिए जिसमें भूमि तैयार की गर्इ है और ऐसे पूर्ववर्ष के ठीक आगे के तीन उतरवर्ती पूर्ववर्षों के लिए उनके रखरखाव की लागत, जैसा कि वह लागत के उस प्रभाग को, यदि कोर्इ हो,

घटाकर आए तो प्रत्यक्षत: या अप्रत्यक्षत: किसी अन्य व्यक्ति या प्राधिकारी द्वारा किया गया हो :

49[परन्तु जहां ऐसी लागत—

(i) दार्जिलिंग जिले में समाविष्ट किसी पहाड़ी क्षेत्र में स्थित भूमि की बाबत चालीस हजार रुपये प्रति हैक्टर से अधिक है; या

(ii) दार्जिलिंग जिले से भिन्न किसी क्षेत्र में समाविष्ट किसी पहाड़ी क्षेत्र में स्थित भूमि की बाबत पैंतीस हजार रुपए प्रति हैक्टर से अधिक; या

(iii) किसी अन्य क्षेत्र में तीस हजार रुपए प्रति हैक्टर से अधिक है,

वहां आधिक्य को हिसाब में नहीं लिया जाएगा।

स्पष्टीकरण.–इस परन्तुक के प्रयोजनों के लिए ''दार्जिलिंग जिला'' से अभिप्रेत है 28 फरवरी, 1981 को, जो लोक सभा में वित्त विधेयक, 1981 के पुर:स्थापन की तारीख है, विद्यमान दार्जिलिंग जिला।]

(8) ऊंचार्इ तथा स्थलाकृति को ध्यान में रखते हुए बोर्ड, साधारण या विशेष आदेश द्वारा इस धारा के प्रयोजनों के लिए, किसी भी क्षेत्र को पहाड़ी क्षेत्र50 घोषित कर सकेगा और ऐसा आदेश किसी न्यायालय या किसी अन्य प्राधिकारी के समक्ष प्रश्नगत नहीं किया जाएगा।

51[स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए ऐसे निर्धारिती के बारे में जिसका किसी भूमि में पट्टाधृति या अधिभोग का अन्य अधिकार है, यह समझा जाएगा कि वह ऐसी भूमि का स्वामी है और जहां निर्धारिती ऐसे अधिकार का अन्तरण करता है वहां यह समझा जाएगा कि उसने ऐसी भूमि का विक्रय या अन्यथा अन्तरण किया है।]

 

34. वित्त अधिनियम, 1965 द्वारा 1.4.1965 से अंत:स्थापित।

35. परिपत्र संख्या 325, तारीख 3.2.1982 भी देखिए। ब्यौरे के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

36. वित्त अधिनियम, 1966 द्वारा 1.4.1966 से ''चालीस'' के स्थान पर प्रतिस्थापित।

37. यथोक्त द्वारा ''बीस'' के स्थान पर प्रतिस्थापित।

38. यथोक्त द्वारा ''उस पूर्ववर्ष से, जिसमें भूमि, यथास्थिति, रोपण या पुन: रोपण के लिए तैयार की जाए, ठीक बाद के तीसरे उत्तरवर्ती पूर्ववर्ष की बाबत कटौती के रूप अनुज्ञात की जाएगी'' के स्थान पर प्रतिस्थापित।

39. वित्त अधिनियम, 1990 द्वारा 1.4.1990 से प्रतिस्थापित।

40. वित्त अधिनियम, 1966 द्वारा 1.4.1966 से, ''उस पूर्ववर्ष से, जिसमें भूमि तैयार की गर्इ है, ठीक बाद के तीसरे उत्तरवर्ती पूर्ववर्ष से'' के स्थान पर प्रतिस्थापित।

41. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1967 द्वारा 1.4.1968 से, ''(इस प्रयोजन के लिए कुल आय की संगणना धारा 33 की उपधारा (1) या उपधारा (1क) या उपधारा (2) के खंड (ii) के अधीन मोक देने के बाद किंतु इस धारा की उपधारा (1) के अधीन कोर्इ मोक दिए बिना की गर्इ हो)'' के स्थान पर प्रतिस्थापित।

42. वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.4.1988 से ''या धारा 280ण'' का लोप किया गया।

43. वित्त अधिनियम, 1966 द्वारा 1.4.1966 से अंत:स्थापित।

44. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1967 द्वारा 1.4.1968 से ''(इस प्रयोजन के लिए कुल आय की संगणना धारा 33 की उपधारा (1) या उपधारा (1क) या उपधारा (2) के खंड (ii) के अधीन मोक देने के बाद किंतु इस धारा की उपधारा (1) के अधीन कोर्इ मोक दिए बिना की गर्इ हो)'' के स्थान पर प्रतिस्थापित।

45. वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.4.1988 से ''या धारा 280ण'' का लोप किया गया।

46. देखिए नियम 8क और फार्म संख्या 4, 5 एवं 5क.

47. ''सरकारी कम्पनी'' की परिभाषा के लिए देखिए पूर्व पृष्ठ 1.25 पर पाद टिप्पण 57.

48. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1967 द्वारा 1.4.1967 से प्रतिस्थापित।

49. वित्त अधिनियम, 1981 द्वारा 1.4.1982 से प्रतिस्थापित।

50. सूचीबद्ध पहाड़ी क्षेत्र के लिए देखिये टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

51. वित्त अधिनियम, 1975 द्वारा 1.4.1965 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।

 

 

[वित्त अधिनियम, 2006 द्वारा संशोधित रूप में]

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