आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 33

विकास रिबेट

धारा

धारा संख्या

33

अध्याय शीर्षक

अध्याय IV - कुल आय की गणना

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2019 (सं.2)

विकास रिबेट

विकास रिबेट

विकास रिबेट

33. (1) (क) किसी नए पोत या नर्इ मशीनरी या संयंत्र की बाबत (ऐसे कार्यालय साधित्रों या सड़क परिवहन यानों से भिन्न) जो निर्धारिती के स्वामित्व में है और उसके द्वारा चलाए गए कारबार के प्रयोजनों के लिए सम्पूर्णत: प्रयुक्त किया जाता है, इस धारा के और धारा 34 के उपबंधों के अनुसार और उनके अधीन रहते हुए, विकास रिबेट के रूप में ऐसी राशि की कटौती, जैसी खण्ड (ख) में विनिर्दिष्ट है उस पूर्ववर्ष की बाबत, जिसमें वह पोत अर्जित किया गया था या मशीनरी या संयंत्र अधिष्ठापित किया गया था यदि पोत, मशीनरी या संयंत्र ठीक बाद के पूर्ववर्ष में प्रथम बार उपयोग में लाया गया है तब उस पूर्ववर्ष की बाबत, अनुज्ञात की जाएगी।

() खण्ड () में निर्दिष्ट राशि निम्नलिखित होगी—

() किसी पोत की दशा में, निर्धारिती को उसकी वास्तविक लागत का चालीस प्रतिशत;

() मशीनरी या संयंत्र की दशा में—

(i) जहां मशीनरी या संयंत्र को पांचवीं अनुसूची की सूची में विनिर्दिष्ट वस्तुओं या चीजों में से किसी एक या अधिक वस्तुओं या चीजों के सन्निर्माण, विनिर्माण या उत्पादन के कारबार के प्रयोजनों के लिए अधिष्ठापित किया जाता है, वहां,—

() निर्धारिती को उस मशीनरी या संयंत्र की वास्तविक लागत का पैंतीस प्रतिशत यदि वह 1 अप्रैल, 1970 के पूर्व अधिष्ठापित किया जाता है; और

() ऐसी लागत का पच्चीस प्रतिशत यदि वह 31 मार्च, 1970 के पश्चात् अनुष्ठापित किया जाता है;

(ii) जहां मशीनरी या संयंत्र, 31 मार्च, 1967 के पश्चात् किसी ऐसे निर्धारिती द्वारा, जो भारतीय कम्पनी है, उसके द्वारा होटल के रूप में प्रयुक्त किसी परिसर में लगाया जाता है और ऐसा होटल केन्द्रीय सरकार द्वारा तत्समय इस निमित्त अनुमोदित है, वहां,–

() निर्धारिती को उस मशीनरी या संयंत्र की वास्तविक लागत का पैंतीस प्रतिशत यदि वह 1 अप्रैल, 1970 के पूर्व अधिष्ठापित किया जाता है; और

() ऐसी लागत का पच्चीस प्रतिशत यदि वह 31 मार्च, 1970 के पश्चात् अधिष्ठापित किया जाता है;

(iii) जहां ऐसी मशीनरी या संयंत्र 31 मार्च, 1967 के पश्चात् अधिष्ठापित किया जाता है जो निर्धारिती द्वारा चलाए जा रहे कारबार से सम्बद्ध वैज्ञानिक अनुसंधान पर पूंजीगत प्रकृति के व्यय के रूप की आस्ति है, वहां—

() निर्धारिती को उस मशीनरी या संयंत्र की वास्तविक लागत का पैंतीस प्रतिशत यदि वह 1 अप्रैल, 1970 के पूर्व अधिष्ठापित किया जाता है; और

() ऐसी लागत का पच्चीस प्रतिशत, यदि वह 31 मार्च, 1970 के पश्चात् अधिष्ठापित किया जाता है;

(iv) किसी अन्य दशा में—

() निर्धारिती को उस मशीनरी या संयंत्र की वास्तविक लागत का बीस प्रतिशत यदि वह 1 अप्रैल, 1970 के पूर्व अधिष्ठापित किया जाता है; और

() ऐसी लागत का पन्द्रह प्रतिशत, यदि वह 31 मार्च, 1970 के पश्चात् अधिष्ठापित किया जाता है।

(1क)() किसी निर्धारिती को, जो 31 मार्च, 1964 के पश्चात् कोर्इ ऐसा पोत अर्जित करता है जो उसके द्वारा अर्जित किए जाने की तारीख से पूर्व किसी अन्य व्यक्ति द्वारा प्रयुक्त किया गया था, धारा 34 के उपबन्धों के अधीन रहते हुए विकास रिबेट के तौर पर ऐसी दर या दरों पर जैसी विहित की जाएं, कोर्इ राशि भी कटौती के रूप में अनुज्ञात की जाएगी, परन्तु यह तब जबकि निम्नलिखित शर्तें पूरी हो जाती हैं, अर्थात् :–

(i) ऐसा पोत ऐसे अर्जन की तारीख से पूर्व किसी भी समय भारत में निवासी किसी व्यक्ति के स्वामित्व में नहीं था;

(ii) ऐसे पोत का सम्पूर्णत: प्रयोग निर्धारिती द्वारा चलाए जाने वाले कारबार के प्रयोजनों के लिए किया जाता है; और

(iii) ऐसी अन्य शर्तें जैसी विहित की जाएं।

() किसी निर्धारिती को, जो कोर्इ ऐसी मशीनरी या संयंत्र (कार्यालय, साधित्र या सड़क परिवहन यान से भिन्न) अधिष्ठापित करता है जो निर्धारिती द्वारा ऐसे अधिष्ठापन से पूर्व किसी अन्य व्यक्ति द्वारा भारत के बाहर प्रयुक्त किया गया था, धारा 34 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, विकास रिबेट के तौर पर ऐसी दर या दरों पर जैसी विहित की जाएं कोर्इ राशि भी कटौती के रूप में अनुज्ञात की जाएगी, परन्तु यह तब जबकि निम्नलिखित शर्तें पूरी हो जाती हैं, अर्थात् :—

(i) ऐसी मशीनरी या संयंत्र, निर्धारिती द्वारा ऐसे अधिष्ठापन की तारीख से पूर्व, किसी समय भारत में प्रयुक्त नहीं किया गया था;

(ii) निर्धारिती द्वारा उसका आयात भारत से बाहर के किसी देश से भारत में किया गया है;

(iii) निर्धारिती द्वारा ऐसी मशीनरी या संयंत्र के अधिष्ठापित किए जाने की तारीख से पूर्व किसी अवधि के लिए किसी व्यक्ति की कुल आय की संगणना करने में भारतीय आय-कर अधिनियम, 1922 (1922 का 11) या इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन ऐसी मशीनरी या संयंत्र की बाबत अवक्षयण या विकास रिबेट के लिए कोर्इ कटौती न तो अनुज्ञात की गयी है और न ही अनुज्ञेय है;

(iv) ऐसी मशीनरी या संयंत्र का सम्पूर्णत: प्रयोग निर्धारिती द्वारा चलाए जाने वाले कारबार के प्रयोजनों के लिए किया जाता है; और

(v) ऐसी अन्य शर्तें जो विहित की जाएं।

()इस उपधारा के अधीन विकास रिबेट, उस पूर्ववर्ष की बाबत जिसमें पोत अर्जित किया गया था या मशीनरी या संयंत्र अधिष्ठापित किया गया था या यदि पोत, मशीनरी या संयंत्र ठीक उत्तरवर्ती पूर्ववर्ष में प्रथम बार प्रयोग में लाया जाता है तो उस पूर्ववर्ष की बाबत कटौती के रूप में अनुज्ञात किया जाएगा।

(2) 31 दिसम्बर, 1957 के पश्चात् अर्जित पोत या अधिष्ठापित मशीनरी या संयंत्र की दशा में जहां कि, यथास्थिति, उस पूर्ववर्ष के जिसमें पोत अर्जित किया गया था या मशीनरी या संयंत्र अधिष्ठापित किया गया था अथवा ठीक उत्तरवर्ती वर्ष के सुसंगत निर्धारण वर्ष के लिए निर्धारणीय निर्धारिती की कुल आय (इस प्रयोजन के लिए कुल आय संगणना इस धारा की उपधारा (1) या उपधारा (1क) या धारा 33क की उपधारा (1) के अधीन कोर्इ मोक दिए बिना या अध्याय 6क के अधीन कोर्इ कटौती) किए बिना की जाएगी शून्य है या विकास रिबेट की कुल रकम से, जिसका परिकलन यथास्थिति उपधारा (1) या उपधारा (1क) के अधीन लागू दर से किया गया हो, कम है, वहां,—

(i) उपधारा (1) या उपधारा (1क) के अधीन उस निर्धारण वर्ष के लिए विकास रिबेट के रूप में अनुज्ञात की जाने वाली राशि केवल उतनी रकम होगी जितनी उक्त कुल आय को घटाकर शून्य कर देने के लिए पर्याप्त है; और

(ii) विकास रिबेट की रकम उस मात्रा तक जिस तक वह पूर्वोक्त रूप में अनुज्ञात नहीं की गर्इ है आगामी निर्धारण वर्ष को अग्रनीत की जाएगी और आगामी निर्धारण वर्ष के लिए अनुज्ञात किया जाने वाला विकास रिबेट उतनी रकम होगी जितनी कि उस निर्धारण वर्ष के लिए निर्धारणीय निर्धारिती की कुल आय को, जो कि पूर्वोक्त रीति में संगणित की गर्इ हो, घटाकर शून्य कर देने के लिए पर्याप्त है और विकास रिबेट का वह अतिशेष, यदि कोर्इ हो, जो उस समय बाकी है, आगामी निर्धारण वर्ष को अग्रनीत किया जाएगा और इसी प्रकार आगे किया जाता रहेगा किंतु ऐसे कि विकास रिबेट का कोर्इ भी भाग, यथास्थिति, उस पूर्ववर्ष से जिसमें पोत अर्जित किया गया था या मशीनरी या संयंत्र अधिष्ठापित किया था अथवा ठीक उत्तरवर्ती पूर्ववर्ष से सुसंगत निर्धारण वर्ष के ठीक उत्तरवर्ती आठ से अधिक निर्धारण वर्षों को अग्रनीत नहीं किया जाएगा।

स्पष्टीकरण.–जहां एक से अधिक पूर्ववर्ष में अर्जित पोतों या अधिष्ठापित मशीनरी या संयंत्र की बाबत उपधारा (2) के उपबंधों के अनुसार विकास रिबेट किसी निर्धारण वर्ष के लिए अनुज्ञात किया जाता है और उस निर्धारण वर्ष के लिए निर्धारणीय निर्धारिती की कुल आय (इस प्रयोजन के लिए कि कुल आय की संगणना इस धारा की उपधारा (1) या उपधारा (1क) या धारा 33क की उपधारा (1) के अधीन कोर्इ मोक दिए बिना या अध्याय 6क के अधीन कटौती) किए बिना की जाएगी, उस निर्धारण वर्ष के लिए पूर्वोक्त आस्तियों की बाबत अनुज्ञात की जाने वाली देय रकमों के योग से कम है, वहां निम्नलिखित प्रक्रिया का अनुसरण किया जाएगा, अर्थात् :—

(i) उपधारा (2) के खण्ड (ii) के अधीन मोक उस उपधारा के खण्ड (i) के अधीन किसी मोक के दिए जाने के पूर्व दिया जाएगा; और

(ii) जहां उन रकमों की बाबत जो एक से अधिक निर्धारण वर्षों से अग्रनीत की गर्इ हों, उपधारा (2) के खण्ड (ii) के अधीन कोर्इ मोक दिया जाना है, वहां ऐसी रकम जो किसी पूर्वतर निर्धारण वर्ष में अग्रनीत की गर्इ है, उस रकम से पहले अनुज्ञात की जाएगी जो किसी बाद के निर्धारण वर्ष से अग्रनीत की गर्इ हों।

(3) जहां समामेलन की किसी स्कीम में समामेलक कम्पनी कोर्इ ऐसा पोत, मशीनरी या संयंत्र, जिसकी बाबत उपधारा (1)या उपधारा (1क) के अधीन समामेलक कम्पनी को विकास रिबेट अनुज्ञात किया गया है, समामेलित कम्पनी को बेचती है या अन्यथा अन्तरित करती है, वहां,—

() समामेलित कम्पनी समामेलक कम्पनी द्वारा सृष्ट रिजर्व की बाबत और उस कालावधि की बाबत जिसमें ऐसा पोत, मशीनरी या संयंत्र विक्रय या अन्यथा अन्तरित नहीं किया जाएगा, धारा 34 की उपधारा (3) में वर्णित शर्तें पूरी करती रहेगी और इन शर्तों में से किसी का व्यतिक्रम होने पर धारा 155 की उपधारा (5) के उपबंध समामेलित कम्पनी को वैसे ही लागू होंगे जैसे वे समामेलक कम्पनी को लागू होते यदि उसने व्यतिक्रम किया होता; और

() ऐसे पोत, मशीनरी या संयंत्र की बाबत समामेलक कम्पनी को उस समय भी बाकी विकास रिबेट का अतिशेष, यदि कोर्इ हो, उपधारा (2) के उपबंधों के अनुसार समामेलित कम्पनी को अनुज्ञात किया जाएगा, किन्तु इस प्रकार किसी ऐसी कुल कालावधि, जिसके लिए विकास रिबेट का अतिशेष समामेलक कम्पनी और समामेलित कम्पनी के निर्धारण में अग्रनीत किया जाएगा, उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट आठ वर्ष की कालावधि से अधिक नहीं होगी और समामेलित कम्पनी को इस धारा और धारा 34 के प्रयोजनों के लिए ऐसे पोत, मशीनरी या संयंत्र की बाबत निर्धारिती माना जाएगा।

(4) जहां किसी फर्म द्वारा चलाए जाने वाले कारबार में कोर्इ कम्पनी उसकी उत्तरवर्ती हो जाती है जिसके परिणामस्वरूप वह फर्म उस कम्पनी को कोर्इ पोत, मशीनरी या संयंत्र विक्रय या अन्यथा अन्तरित करती है वहां उपधारा (3) के खण्ड () और () के उपबंध उस फर्म और कम्पनी को यथासंभव लागू होंगे।

स्पष्टीकरण.–इस खण्ड के उपबंध केवल वहां लागू होंगे जहां—

(i) उत्तरवर्तन के ठीक पहले कारबार से सम्बद्ध फर्म की सभी सम्पत्ति कम्पनी की सम्पत्ति हो जाती है;

(ii) उत्तरवर्तन के ठीक पहले कारबार से सम्बद्ध फर्म के सभी दायित्व कम्पनी के दायित्व हो जाते हैं; और

(iii) कम्पनी के सभी शेयरधारक उत्तरवर्तन के ठीक पहले फर्म के भागीदार थे।

(5) यदि केन्द्रीय सरकार ऐसा करना आवश्यक या समीचीन समझती है तो वह राजपत्र में अधिसूचना द्वारा यह निदेश दे कर सकेगी कि इस धारा के अधीन अनुज्ञेय कटौती उस तारीख के पश्चात् जो ऐसी अधिसूचना की तारीख से तीन वर्ष से अधिक पहले की न हो, जो उसमें विनिर्दिष्ट की जाए, अर्जित किसी पोत या अधिष्ठापित किसी मशीनरी या संयंत्र की बाबत अनुज्ञात नहीं की जाएगी।

(6) इस धारा के पूर्वगामी उपबन्धों में किसी बात के होते हुए भी विकास रिबेट के रूप में कोर्इ कटौती, किसी ऐसी मशीनरी या संयंत्र की बाबत अनुज्ञात नहीं की जाएगी जो किसी कार्यालय परिसर या किसी निवास स्थान में जिसके अन्तर्गत गैस्ट हाऊस के प्रकार की कोर्इ वास-सुविधा भी है, 31 मार्च, 1965 के पश्चात् अधिष्ठापित किया जाए :

परन्तु इस उपधारा के उपबंध, ऐसे निर्धारिती की दशा में जो भारतीय कम्पनी है किसी ऐसी मशीनरी या संयंत्र की बाबत जो उसके द्वारा होटल के रूप में प्रयुक्त परिसर में लगाया गया है, वहां लागू नहीं होंगे जहां ऐसा होटल केन्द्रीय सरकार द्वारा तत्समय इस निमित्त अनुमोदित है।

 

 

 

[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2019 द्वारा संशोधित रूप में]

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