निवेश की जमा खाता
(9) [वित्त अधिनियम, 1990 द्वारा 1.4.1976 से भूतलक्षी प्रभाव से लोप किया गया।]
98[विनिधान निक्षेप लेखा
32कख. (1) इस धारा के अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए, जहां किसी निर्धारिती ने, जिसकी कुल आय में "कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ" शीर्ष के अधीन, कर से प्रभार्य आय सम्मिलित है, ऐसी आय में से केन्द्रीय सरकार द्वारा बनार्इ जाने वाली 99स्कीम (जिसे इस धारा में इसके पश्चात् स्कीम कहा गया है) के अनुसार या यदि निर्धारिती भारत में चाय उगाने और विनिर्मित करने का कारबार कर रहा है तो इस निमित्त चाय बोर्ड द्वारा अनुमोदित स्कीम के अनुसार और उसमें विनिर्दिष्ट प्रयोजनों के लिए—
(क) पूर्ववर्ष की समाप्ति से छह मास की समाप्ति के पूर्व या अपनी आय की विवरणी देने के पूर्व, इनमें से जो भी पहले हो, विकास बैंक में अपने द्वारा रखे गए खाते में (जिसे इस धारा में इसके पश्चात् निक्षेप खाता कहा गया है) कोर्इ रकम जमा की है; या
(ख) खंड (क) के अधीन निक्षेप खाते में कोर्इ रकम जमा किए बिना, किसी नए पोत, नए विमान, नर्इ मशीनरी या संयंत्र के क्रय के लिए पूर्ववर्ष के दौरान किसी रकम का उपयोग किया है,
वहां निर्धारिती को—
(i) इस प्रकार जमा की गर्इ रकम या रकमों के योग के बराबर राशि और इस प्रकार उपयोग की गर्इ रकम की; या
(ii) निर्धारिती के उपधारा (5) के अनुसार संपरीक्षित लेखाओं में यथासंगणित 1[* * *] कारबार या वृत्ति के लाभ के बीस प्रतिशत के बराबर राशि की,
कटौती 2[(ऐसी कटौती पूर्ववर्ती वर्षों से अग्रनीत हानि के, यदि कोर्इ हो, धारा 72 के अधीन मुजरा किए जाने के पहले अनुज्ञात की गर्इ हो)], इनमें से जो भी कम हो, अनुज्ञात की जाएगी:]
3[परन्तु जहां ऐसा निर्धारिती कोर्इ फर्म या व्यक्ति संगम या व्यष्टि निकाय है वहां इस धारा के अधीन कटौती, यथास्थिति किसी भागीदार या ऐसी फर्म, व्यक्ति संगम या व्यष्टि निकाय, के किसी सदस्य की आय की संगणना करने में अनुज्ञात नहीं की जाएगी :]
4[परन्तु यह और कि कोर्इ ऐसी कटौती 1 अप्रैल, 1991 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष या किसी पश्चात्वर्ती निर्धारण वर्ष के संबंध में अनुज्ञात नहीं की जाएगी।]
(2) इस धारा के प्रयोजनों के लिए,—
(i) 5[* * *]
6[(ii) "नए पोत" या "नए विमान" के अन्तर्गत ऐसा पोत या विमान है जिसका निर्धारिती द्वारा अर्जित किए जाने की तारीख के पूर्व किसी अन्य व्यक्ति द्वारा उपयोग किया गया था, यदि वह ऐसे अर्जन की तारीख के पूर्व किसी समय भारत में निवासी किसी व्यक्ति के स्वामित्व में नहीं था;
(iii) "नर्इ मशीनरी या संयंत्र" के अन्तर्गत ऐसी मशीनरी या संयंत्र है जिसका निर्धारिती द्वारा उसके अधिष्ठापन के पूर्व किसी अन्य व्यक्ति द्वारा भारत से बाहर उपयोग किया जाता था, यदि निम्नलिखित शर्तें पूरी हो जाती हैं, अर्थात् :—
(क) ऐसी मशीनरी या संयंत्र का निर्धारिती द्वारा ऐसे अधिष्ठापन की तारीख के पूर्व किसी समय भारत में उपयोग नहीं किया गया था;
(ख) ऐसी मशीनरी या संयंत्र का भारत से बाहर के किसी देश से भारत में आयात किया जाता है; और
(ग) निर्धारिती द्वारा मशीनरी या संयंत्र के अधिष्ठापन की तारीख के पूर्व किसी अवधि के लिए किसी व्यक्ति की कुल आय की संगणना करने में इस अधिनियम के अधीन ऐसी मशीनरी या संयंत्र की बाबत अवक्षयण मद्दे कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की गर्इ है या अनुज्ञेय नहीं है;
(iv) "चाय बोर्ड" से चाय अधिनियम, 1953 (1953 का 29) की धारा 4 के अधीन स्थापित चाय बोर्ड अभिप्रेत है।]
(3) 7[उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए निर्धारिती के कारबार या वृत्ति का लाभ] ऐसी रकम होगी जो कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की 8[अनुसूची 6] के भाग 2 और 39 की अपेक्षाओं के अनुसार संगणित लाभ की रकम में से धारा 32 की उपधारा (1) के उपबंधों के अनुसार संगणित अवक्षयण के बराबर रकम घटाने के पश्चात् प्राप्त हो और 10[जिसमें—
(i) अवक्षयण की रकम;
(ii) संदत्त या संदेय आय-कर और उसके लिए उपबंधित रकम;
(iii) कंपनी (लाभ) अतिकर अधिनियम, 1964 (1964 का 7) के अधीन संदत्त या संदेय अतिकर की रकम;
(iv) किन्हीं आरक्षितियों में अग्रनीत रकमें, चाहे वे किसी भी नाम से ज्ञात हों;
(v) अभिनिश्चित दायित्वों से भिन्न दायित्वों को चुकाने के लिए की गर्इ व्यवस्थाओं के लिए अलग रखी गर्इ रकम या रकमें;
(vi) समनुषंगी कम्पनियों की हानियों के लिए उपबंध के रूप में रकम; और
(vii) संदत्त या प्रस्तावित लाभांशों की रकम या रकमें,
यदि कोर्इ हों, जोड़ दी जाएंगी यदि ऐसी रकमें लाभ-हानि लेखे में डेबिट की गर्इ हैं; और जिसमें से आरक्षितियों या व्यवस्थाओं से वापस ली गर्इ रकम या रकमें घटा दी जाएंगी, यदि ऐसी रकमें लाभ-हानि लेखे में जमा की गर्इ हों 11[* * *]]।
12[* * *]
(4) उपधारा (1) के अधीन, कोर्इ कटौती निम्नलिखित के क्रय के लिए उपयोग की गर्इ किसी रकम की बाबत अनुज्ञात नहीं की जाएगी, अर्थात्—
(क) किसी कार्यालय परिसर या किसी निवास-स्थान में, जिसके अन्तर्गत गेस्ट हाऊस की प्रकृति की वास-सुविधा भी हैै, अधिष्ठापित मशीनरी या संयंत्र;
(ख) कोर्इ कार्यालय साधित्र (जो कम्प्यूटर नहीं है);
(ग) कोर्इ सड़क परिवहन यान;
(घ) ऐसी कोर्इ मशीनरी या संयंत्र, जिसकी संपूर्ण वास्तविक लागत किसी पूर्ववर्ष में "कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ" शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय की संगणना करने में कटौती के रूप में (चाहे वह अवक्षयण के रूप में हो या अन्यथा) अनुज्ञात की जाती है;
13[(ड़) ऐसी कोर्इ नर्इ मशीनरी या संयंत्र जिसे धारा 80ड़जक में परिभाषित लघु उद्योग उपक्रम से भिन्न किसी औद्योगिक उपक्रम में, ग्यारहवीं अनुसूची की सूची में विनिर्दिष्ट किसी वस्तु या चीज के निर्माण, विनिर्माण या उत्पादन के कारबार के प्रयोजनों के लिए अधिष्ठापित किया जाना है।]
(5) उपधारा (1) के अधीन कटौती तब तक अनुज्ञेय नहीं होगी जब तक जिस निर्धारण वर्ष के लिए कटौती का दावा किया जाता है उस निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए उस निर्धारिती के कारबार या वृत्ति के लेखाओं की धारा 288 की उपधारा (2) के नीचे दिए गए स्पष्टीकरण में परिभाषित किसी लेखापाल द्वारा संपरीक्षा न की गर्इ है और निर्धारिती अपनी आय की विवरणी के साथ ऐसे लेखापाल द्वारा सम्यक्त: हस्ताक्षरित और सत्यापित ऐसी संपरीक्षा की विहित फार्म14 में रिपोर्ट नहीं दे देता :
परन्तु उस दशा में जहां निर्धारिती से किसी अन्य विधि द्वारा या उसके अधीन उसके लेखाओं की संपरीक्षा कराना अपेक्षित है वहां इस उपधारा के उपबंधों का पर्याप्त अनुपालन होगा यदि ऐसा निर्धारिती ऐसे कारबार या वृत्ति के लेखाओं की ऐसी विधि के अधीन संपरीक्षा कराता है और ऐसी अन्य विधि के अधीन अपेक्षित संपरीक्षा की रिपोर्ट तथा इस उपधारा के अधीन विहित फार्म में एक और रिपोर्ट देता है।
15[(5क) निक्षेप खाते में निर्धारिती के नाम में जमा रकम, निक्षेप की तारीख से पांच वर्ष की अवधि की समाप्ति से पहले स्कीम में विनिर्दिष्ट प्रयोजनों के 16[या] नीचे विनिर्दिष्ट परिस्थितियों के सिवाय वापस लेने की अनुज्ञा नहीं दी जाएगी :—
(क) कारबार का बंद किया जाना;
(ख) निर्धारिती की मृत्यु;
(ग) हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब का विभाजन;
(घ) फर्म का विघटन;
(ड़) कम्पनी का परिसमापन।]
17[स्पष्टीकरण.–शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि उस उपधारा की कोर्इ भी बात निक्षेप खाते से किसी रकम की वापसी के संबंध में उपधारा (5कक) या उपधारा (6) के उपबंधों के प्रवर्तन पर कोर्इ प्रभाव नहीं डालेगी चाहे ऐसी रकम की वापसी ऐसे निक्षेप की तारीख से पांच वर्ष की अवधि की समाप्ति के पूर्व की गर्इ हो या उसके पश्चात्।]
17[(5कक) जहां किसी निक्षेप खाते में निर्धारिती के नाम में जमा कोर्इ रकम किसी पूर्ववर्ष के दौरान निर्धारिती द्वारा उपधारा (5क) के खंड (क) या खंड (घ) में विनिर्दिष्ट परिस्थितियों में वापस ली जाती है वहां ऐसी संपूर्ण रकम उस पूर्ववर्ष में उस कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ समझी जाएगी और तदनुसार उस पूर्ववर्ष की आय के रूप में आय-कर से प्रभार्य होगी मानो, यथास्थिति, कारबार बंद न किया गया हो या फर्म का विघटन न हुआ हो।]
18[(5ख) जहां निक्षेप खाते में निर्धारिती के नाम से जमा रकम का निर्धारिती द्वारा 19[* * *] कारबार या वृत्ति के संबंध में किसी व्यय के प्रयोजनों के लिए स्कीम के अनुसार उपयोग किया जाता है वहां ऐसा व्यय "कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ" शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय की संगणना करने में अनुज्ञात नहीं किया जाएगा।]
(6) जहां निक्षेप खाते में निर्धारिती के नाम में जमा किसी ऐसी रकम का, जो स्कीम में विनिर्दिष्ट प्रयोजनों के लिए निर्धारिती द्वारा उपयोग किए जाने के लिए विकास बैंक द्वारा किसी पूर्ववर्ष के दौरान या लेखाओं के 20[[उपधारा (5क) के खण्ड (ख), खण्ड (ग) और खण्ड (ड़) में विनिर्दिष्ट परिस्थितियों से भिन्न परिस्थितियों में]] बंद किए जाने के समय दी जाती है, स्कीम के अनुसार 21[और उसमें विनिर्दिष्ट समय के भीतर] 22[* * *] पूर्णत: या भागत:, उपयोग नहीं किया जाता है वहां यथास्थिति, ऐसी संपूर्ण रकम या उसका भाग, जिसका इस प्रकार उपयोग नहीं किया जाता है, उस पूर्ववर्ष के कारबार या वृत्ति का लाभ और अभिलाभ समझा जाएगा और तदनुसार उस पूर्ववर्ष की आय के रूप में आय-कर से प्रभार्य होगा।
(7) जहां स्कीम के अनुसार अर्जित कोर्इ आस्ति, किसी पूर्ववर्ष में, उस पूर्ववर्ष से, जिसमें वह अर्जित की गर्इ थी, आठ वर्ष की समाप्ति के पूर्व किसी समय निर्धारिती द्वारा किसी व्यक्ति को विक्रय की जाती है या अन्यथा अंतरित की जाती है, वहां ऐसी आस्ति की लागत का ऐसा भाग जो उपधारा (1) के अधीन अनुज्ञात कटौतियों से संबंधित है, उस पूर्ववर्ष के, जिसमें ऐसी आस्ति विक्रय या अन्यथा अंतरित की जाती है, कारबार या वृत्ति का लाभ और अभिलाभ समझा जाएगा और तदनुसार उस पूर्ववर्ष की आय के रूप में आय-कर से प्रभार्य होगा :
परन्तु इस उपधारा की कोर्इ बात वहां लागू नहीं होगी जहां—
(i) वह आस्ति, निर्धारिती द्वारा सरकार को, किसी स्थानीय प्राधिकरण को, किसी केंद्रीय, राज्य या प्रांतीय अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित किसी निगम को या कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 617 में परिभाषित किसी 23सरकारी कंपनी को बेची जाती है या अन्यथा अंतरित की जाती है; या
(ii) ऐसी आस्ति का विक्रय या अंतरण, फर्म द्वारा चलाए जाने वाले कारबार या वृत्ति में किसी कंपनी द्वारा किसी फर्म के उत्तरवर्तन के संबंध में किया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप वह फर्म किसी आस्ति का उस कंपनी को विक्रय या अन्यथा अंतरण करती है और स्कीम कंपनी को उसी रीति में लागू बनी रहती है जिस रीति में वह फर्म को लागू है।
स्पष्टीकरण.–परन्तुक के खंड (ii) के उपबंध केवल वहां लागू होंगे जहां—
(i) उत्तरवर्तन के ठीक पूर्व कारबार या वृत्ति से संबंधित फर्म की सभी संपत्तियां कंपनी की संपत्तियां हो जाती हैं;
(ii) उत्तरवर्तन के ठीक पूर्व कारबार या वृत्ति से संबंधित फर्म के सभी दायित्व कंपनी के दायित्व हो जाते हैं; और
(iii) कंपनी के सभी शेयरधारक उत्तरवर्तन के ठीक पूर्व फर्म के भागीदार थे।
(8) यदि केन्द्रीय सरकार ऐसा करना आवश्यक या समीचीन समझती है तो वह, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ग्यारहवीं अनुसूची में विनिर्दिष्ट वस्तुओं या चीजों की सूची में से किसी वस्तु या चीज का लोप कर सकेगी।
(9) केन्द्रीय सरकार, ऐसी जांच करने के पश्चात्, जो वह ठीक समझे, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, यह निदेश दे सकेगी कि इस धारा के उपबंध किसी वर्ग के निर्धारितियों को ऐसी तारीख से लागू नहीं होंगे जो वह अधिसूचना में विनिर्दिष्ट करे।
24[(10) जहां किसी निर्धारण वर्ष में निर्धारिती को इस धारा के अधीन कोर्इ कटौती अनुज्ञात की गर्इ है, वहां उस निर्धारिती को उक्त निर्धारण वर्ष में (जिसे इसमें इसके पश्चात् प्रारंभिक निर्धारण वर्ष कहा गया है) और प्रारंभिक निर्धारण वर्ष के ठीक पश्चात्वर्ती निर्धारण वर्ष से प्रारंभ होने वाली चार वर्ष की अतिरिक्त कालावधि के ब्लाक में धारा 32क की उपधारा (1) के अधीन कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी।]
स्पष्टीकरण.–इस धारा में,–
(क) "कम्प्यूटर" के अन्तर्गत परिकलन मशीन और परिकलन युक्ति नहीं है,
(ख) "विकास बैंक" से अभिप्रेत है—
(i) किसी ऐसे निर्धारिती की दशा में जो भारत में चाय उगाने और विनिर्मित करने का कारबार कर रहा है, राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक अधिनियम, 1981 (1981 का 61) की धारा 3 के अधीन स्थापित राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक;
(ii) अन्य निर्धारितियों की दशा में, भारतीय औद्योगिक विकास बैंक अधिनियम, 1964 (1964 का 18) के अधीन स्थापित भारतीय औद्योगिक विकास बैंक और इसके अन्तर्गत ऐसा बैंक या संस्था भी है जो स्कीम में इस निमित्त विनिर्दिष्ट की जाए।]
98. वित्त अधिनियम, 1986 द्वारा 1.4.1987 से अंत:स्थापित।
99. विनिधान निक्षेप लेखा स्कीम, 1986 उपधारा (1) के अधीन सरकार द्वारा विरचित स्कीम है। स्कीम के ब्यौरे के लिए देखिये टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज़ सरकुलर्स।
1. वित्त अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1991 से 'पात्र' शब्द का लोप किया गया।
2. वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1987 से अंत:स्थापित।
3. यथोक्त द्वारा अंत:स्थापित।
4. वित्त अधिनियम, 1990 द्वारा 1.4.1990 से अंत:स्थापित।
5. वित्त अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1991 से लोप किया गया।
6. वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1987 से प्रतिस्थापित।
7. वित्त अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1991 से "उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए" शब्दों से प्रारंभ होने वाले और 'पृथक लेखे रखे जाते हैं वहां' शब्दों से समाप्त होने वाले अंश के स्थान पर प्रतिस्थापित।
8. वित्त अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1991 से "छठी अनुसूची" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
9. कम्पनी अधिनियम, 1956 की अनुसूची 6 के भाग 2 और 3 के लिए, देखिए परिशिष्ट।
10. वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1987 से, "जिसमें संपरीक्षित लाभ-हानि लेखा में डेबिट की गर्इ अवक्षयण की रकम, यदि कोर्इ हो, के बराबर रकम जोड़ दी जाएगी; और" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
11. वित्त अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1991 से "और" शब्द का लोप किया गया।
12. यथोक्त द्वारा लोप किया गया।
13. यथोक्त द्वारा अंत:स्थापित।
14. धारा 32कख(5) के अधीन अपेक्षित संपरीक्षा रिपोर्ट के लिए देखिए नियम 5कख और फार्म संख्या 3कक.
15. वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1987 से अंत:स्थापित।
16. वित्त अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1987 से भूतलक्षी प्रभाव से "और" शब्द के स्थान पर प्रतिस्थापित।
17. यथोक्त द्वारा अंत:स्थापित।
18. वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1987 से अंत:स्थापित।
19. वित्त अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1991 से "पात्र" का लोप किया गया।
20. वित्त अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1987 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।
21. वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1987 से अंत:स्थापित।
22. यथोक्त द्वारा "उस पूर्ववर्ष के भीतर" शब्दों का लोप किया गया।
23. "सरकारी कम्पनी" की परिभाषा के लिए देखिये पूर्व पृष्ठ 1.26 पर पाद-टिप्पण 64.
24. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से प्रतिस्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2008 द्वारा संशोधित रूप में]

