आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 32

अवक्षयण

धारा

धारा संख्या

32

अध्याय शीर्षक

अध्याय IV - कुल आय की गणना

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2005

अवक्षयण

अवक्षयण

अवक्षयण

2232. (1) 23[निम्नलिखित के अवक्षयण की बाबत—

(i) भवन24, मशीनरी24, संयंत्र या फर्नीचर, जो मूर्त आस्तियां हैं;

(ii) तकनीकी ज्ञान, पेटेन्ट, कापीराइट, व्यापार चिन्ह, लाइसेंस, फ्रेंचाइज़ या उसी प्रकार के कोर्इ अन्य कारबार या वाणिज्यिक अधिकार, जो 1 अप्रैल, 1998 को या उसके पश्चात् अर्जित अमूर्त आस्तियां हैं,

जो पूर्णत: या भागत: निर्धारिती24 के स्वामित्वाधीन24 हैं और कारबार24 या वृत्ति के प्रयोजनों के लिए प्रयुक्त की जाती हैं, निम्नलिखित कटौतियां अनुज्ञात की जाएंगी–]

25[(i) विद्युत (पावर) के जनन या जनन और वितरण में लगे उपक्रम की आस्तियों की दशा में, निर्धारिती को उसकी वास्तविक लागत की ऐसी प्रतिशतता, जो विहित26 की जाए;]

(ii) 27[आस्ति समूह की दशा में, उसके अवलिखित मूल्य की ऐसी प्रतिशतता, जो विहित28 की जाए] :

29[* * *]

30[परन्तु 31[* * *] निम्नलिखित की बाबत इस खंड के अधीन कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी;

() भारत के बाहर विनिर्मित किसी मोटर कार की बाबत, जहां ऐसी मोटर कार निर्धारिती द्वारा 28 फरवरी, 1975 के पश्चात् 32[किंतु 1 अप्रैल, 2001 के पूर्व] अर्जित की जाती है और जब तक कि उसका प्रयोग—

(i) पर्यटकों के लिए उसे भाड़े पर चलाए जाने के कारबार में नहीं किया जाता है; या

(ii) भारत के बाहर किसी अन्य देश में अपने कारबार या वृत्ति में नहीं किया जाता है; और

() किसी मशीनरी या संयंत्र की बाबत, यदि उसकी वास्तविक लागत धारा 42 के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा किए गए किसी करार के अधीन एक वर्ष या उससे अधिक वर्षों में कटौती के रूप में अनुज्ञात की जाती है :

33[परन्तु यह और कि जहां खंड (i) या खंड (ii) 34[या खंड (iiक)] में निर्दिष्ट कोर्इ आस्ति निर्धारिती द्वारा पूर्ववर्ष के दौरान अर्जित की जाती है और उस पूर्ववर्ष में एक सौ अस्सी दिन से कम अवधि के लिए कारबार या वृत्ति के प्रयोजनों के लिए प्रयोग में लार्इ जाती है वहां ऐसी आस्ति के संबंध में इस उपधारा के अधीन कटौती, उस आस्ति की बाबत, यथास्थिति, खंड (i) या खंड (ii) 34[या खंड (iiक)] के अधीन विहित प्रतिशतता के आधार पर परिकलित रकम के पचास प्रतिशत तक निर्बन्धित होगी:]

35[परन्तु यह भी कि जहां वाणिज्यिक यान के रूप में कोर्इ आस्ति निर्धारिती द्वारा 1 अक्तूबर, 1998 को या उसके बाद किन्तु 1 अप्रैल, 1999 से पूर्व अर्जित की जाए और कारबार या वृत्ति के प्रयोजनों के लिए 1 अप्रैल, 1999 से पूर्व प्रयोग में लार्इ जाए वहां ऐसी आस्ति की बाबत कटौती उसके अवलिखित मूल्य पर उतनी प्रतिशतता पर अनुज्ञात की जाएगी, जो विहित किया जाए।

स्पष्टीकरण.–इस परन्तुक के प्रयोजनों के लिए,—

() ''वाणिज्यिक यान'' से अभिप्रेत है–'भारी माल यान', 'भारी यात्री मोटर यान', 'हल्का मोटर यान', 'मध्यम माल यान' और 'मध्यम यात्री मोटर यान', किंतु 'मैक्सी कैब', 'मोटर कैब', 'ट्रैक्टर' और 'रोड रोलर' इसमें शामिल नहीं हैं;

() 'भारी माल यान'36, 'भारी यात्री मोटर यान'37, 'हल्का मोटर यान'37, 'मध्यम माल यान'37, 'मध्यम यात्री मोटर यान'37, 'मैक्सी कैब'38, 'मोटर कैब'38, 'ट्रैक्टर'37 और 'रोड रोलर' का क्रमश: वही अर्थ होगा जो मोटर यान अधिनियम, 1988 (1988 का 59) की धारा 2 में उनका है :]

39[परन्तु यह भी कि 1 अप्रैल, 1991 को प्रारम्भ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष की बाबत, इस खण्ड के अधीन आने वाली आस्तियों के किसी समूह के संबंध में कटौती, कंपनी के मामले में कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1991 के प्रारम्भ से ठीक पूर्व इस अधिनियम के अधीन विहित ऐसी आस्तियों के अवलिखित मूल्य पर, विहित प्रतिशतता के आधार पर परिकलित रकम के 75 प्रतिशत तक सीमित रहेगी:]

40[परन्तु यह भी कि धारा 47 के खंड (xiii) और खंड (xiv) या धारा 170 में उल्लिखित उत्तरवर्तन की दशा में यथास्थिति, पूर्ववर्ती और उत्तरवर्ती को अथवा समामेलन की दशा में समामेलक कंपनी और समामेलित कंपनी को या अविलयन की दशा में अविलयित कंपनी और परिणामी कंपनी को भवन, मशीनरी, संयंत्र या फर्नीचर, जो मूर्त आस्ति है या व्यवहार ज्ञान, पेटेंट या कापीराइट, व्यापार चिन्ह, लाइसेंस, फ्रेंचाइज़ या उसी प्रकार का कोर्इ अन्य कारबार या वाणिज्यिक अधिकार जो अमूर्त अस्तियां हैं के अवक्षयण की बाबत कुल कटौती किसी पूर्ववर्ष में विहित दरों पर परिकलित कटौती से अधिक नहीं होगी मानो, उत्तरवर्तन या समामेलन या अविलयन, जो भी हो हुआ ही नहीं था और ऐसी कटौती यथास्थिति पूर्ववर्ती और उत्तरवर्ती अथवा समामेलक कंपनी तथा समामेलित कंपनी या अविलयित कंपनी और परिणामी कंपनी के बीच ऐसे दिनों की संख्या के अनुपात में प्रभाजित की जाएगी जिनके लिए ऐसी आस्तियों का उनके द्वारा उपयोग किया गया था।]

41[स्पष्टीकरण 1.–जहां निर्धारिती का कारबार या वृत्ति किसी ऐसे भवन में चलाया जाता है जो उसके स्वामित्व में नहीं है किंतु जिसकी बाबत निर्धारिती पट्टा या अधिभोग का कोर्इ अन्य अधिकार रखता है और निर्धारिती द्वारा कारबार या वृत्ति के प्रयोजनों के लिए भवन में या उसके संबंध में किसी ढांचे का निर्माण या कोर्इ संकर्म करके और भवन का नवीकरण या विस्तार या उसमें सुधार करके, कोर्इ पूंजी व्यय किया जाता है वहां इस खंड के उपबंध इस प्रकार लागू होंगे मानो उक्त ढांचा या संकर्म निर्धारिती के स्वामित्वाधीन का भवन है।

स्पष्टीकरण 2.–इस 42[उपधारा] के प्रयोजनों के लिए ''आस्ति समूह के अवलिखित मूल्य'' का वही अर्थ है जो धारा 43 की उपधारा* (6) के खंड () में उसका है।]

43[स्पष्टीकरण 3.–इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए 'आस्तियों' और ''आस्ति का समूह'' से अभिप्रेत होगा—

() मूर्त आस्तियां जैसे भवन, मशीनरी, संयंत्र या फर्नीचर;

() अमूर्त आस्तियां जैसे व्यवहार ज्ञान, पेटेंट, कापीराइट, व्यापार चिन्ह, लाइसेंस, फ्रेंचाइज़ या उसी प्रकार के कोर्इ अन्य कारबार या वाणिज्यिक अधिकार।

स्पष्टीकरण 4.–इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए 'व्यवहार ज्ञान' से कोर्इ औद्योगिक आसूचना या तकनीक अभिप्रेत है जो माल के विनिर्माण या प्रसंस्करण में या खान, तेल कुंए या खनिज भंडारों के अन्य स्रोतों के कार्यकरण में (उन तक पहुंचने के लिए भंडारों की खोज करना या परीक्षण करना भी शामिल है), सहायक होना संभव है;]

44[स्पष्टीकरण 5.–शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि इस उपधारा के उपबंध लागू होंगे चाहे निर्धारिती ने अपनी कुल आय की संगणना में अवक्षयण की बाबत कटौती का दावा किया हो अथवा नहीं।]

45-46[(iiक) किसी नर्इ मशीनरी या संयंत्र (पोत और वायुयान से भिन्न) की दशा में, जो किसी वस्तु या चीज के निर्माण या उत्पादन के कारबार में लगे किसी निर्धारिती द्वारा 31 मार्च, 2002 के पश्चात् अर्जित और अधिष्ठापित किया गया है, ऐसी मशीनरी या संयंत्र के वास्तविक मूल्य के पन्द्रह प्रतिशत के बराबर की और राशि खंड (ii) के अधीन कटौती के रूप में अनुज्ञात की जाएगी:

परंतु ऐसी पन्द्रह प्रतिशत की और कटौती निम्नलिखित को अनुज्ञात की जाएगी,–

() किसी नए औद्योगिक उपक्रम को, ऐसे किसी पूर्ववर्ष के दौरान, जिसमें ऐसा उपक्रम 1 अप्रैल, 2002 को या उसके पश्चात् ऐसी किसी वस्तु या चीज का निर्माण या उत्पादन करना आरंभ करता है; या

() 1 अप्रैल, 2002 से पूर्व विद्यमान किसी औद्योगिक उपक्रम को, ऐसे किसी पूर्ववर्ष के दौरान, जिसमें वह अधिष्ठापित क्षमता में कम से कम 46क[दस] प्रतिशत तक की वृद्धि करके पर्याप्त विस्तार कर लेता है:

परन्तु यह और कि–

() ऐसी किसी मशीनरी या संयंत्र, जिसका निर्धारिती द्वारा उसका अधिष्ठापन किए जाने से पूर्व, किसी अन्य व्यक्ति द्वारा भारत के भीतर या भारत से बाहर प्रयोग किया गया था; या

() किसी कार्यालय परिसर या किसी निवास स्थान में, जिसके अंतर्गत अतिथिगृह के रूप में वास-सुविधा भी है, अधिष्ठापित किसी मशीनरी या संयंत्र; या

() किसी कार्यालय साधित्र या सड़क परिवहन यान; या

() ऐसी किसी मशीनरी या संयंत्र, जिसकी संपूर्ण वास्तविक लागत को किसी एक पूर्ववर्ष की "कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ" शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय की संगणना करने में कटौती (चाहे अवक्षयण के रूप में या अन्यथा) के रूप में अनुज्ञात किया गया है:

के संबंध में कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी:

परंतु यह भी कि पहले परंतुक के, यथास्थिति, खंड (अ) या खंड (आ) के अधीन कोर्इ कटौती तब तक अनुज्ञात नहीं की जाएगी जब तक कि आय की विवरणी और धारा 288 की उपधारा (2) के नीचे स्पष्टीकरण में परिभाषित46ख लेखाकार की रिपोर्ट के साथ मशीनरी या संयंत्र और उत्पादन की अधिष्ठापित क्षमता में वृद्धि के, ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, ब्यौरे यह प्रमाणित करते हुए नहीं दे देता है कि कटौती का इस खंड के उपबंधों के अनुसार सही दावा किया गया है।

स्पष्टीकरण–इस खंड के प्रयोजनों के लिए,–

(1) "नए औद्योगिक उपक्रम" से ऐसा उपक्रम अभिप्रेत है, जो,–

() पहले से विद्यमान किसी कारबार को विभाजित करके या पुन:निर्माण करके नहीं बनाया गया है; या

() पूर्व में किसी प्रयोजन के लिए प्रयुक्त मशीनरी या संयंत्र का नए कारबार में अंतरण करके नहीं बनाया गया है;

(2) "अधिष्ठापित क्षमता" से 31 मार्च, 2002 को विद्यमान उत्पादन की क्षमता अभिप्रेत है।]

वित्त अधिनियम, 2005 द्वारा 1.4.2006 से धारा 32 की उपधारा (1) के विद्यमान खंड (iiक) के स्थान पर, निम्नलिखित खंड (iiक) रखा जाएगा:

(iiक) ऐसी किसी नर्इ मशीनरी या संयंत्र (पोत और वायुयान से भिन्न) की दशा में, जो किसी वस्तु या चीज के निर्माण या उत्पादन के कारबार में लगे किसी निर्धारिती द्वारा, 31 मार्च, 2005 के पश्चात् अर्जित और अधिष्ठापित किया गया है, ऐसी मशीनरी या संयंत्र की वास्तविक लागत के बीस प्रतिशत के बराबर की और राशि खंड (ii) के अधीन कटौती के रूप में अनुज्ञात की जाएगी :

परंतु,–

(क) ऐसी किसी मशीनरी या संयंत्र, जिसका निर्धारिती द्वारा उसका अधिष्ठापन किए जाने से पूर्व किसी अन्य व्यक्ति द्वारा भारत के भीतर या भारत से बाहर प्रयोग किया गया था ; या

(ख) किसी कार्यालय परिसर या किसी निवास-स्थान में, जिसके अंतर्गत अतिथि गृह की प्रकृति की वास-सुविधा भी है, अधिष्ठापित ऐसी किसी मशीनरी या संयत्र; या

(ग) किसी कार्यालय साधित्र या सड़क परिवहन यान; या

(घ) ऐसी किसी मशीनरी या संयंत्र, जिसकी संपूर्ण वास्तविक लागत को, "कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ" शीर्ष के अधीन किसी एक पूर्ववर्ष की प्रभार्य आय की संगणना करने में कटौती के रूप में (चाहे अवक्षयण के रूप में या अन्यथा) अनुज्ञात किया गया है,

के संबंध में कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी ;

47[(iii) किसी भवन, मशीनरी, संयंत्र या फर्नीचर की दशा में, जिसकी बाबत अवक्षयण का दावा किया जाए और खंड (i) के अधीन मंजूर किया जाए और जो पूर्ववर्ष में (उस पूर्ववर्ष से भिन्न जिसमें उसका पहली बार प्रयोग किया जाए), बेच दी जाए, हटा दी जाए या गिरा दी जाए या नष्ट कर दी जाए, वह राशि जो ऐसे भवन, मशीनरी, संयंत्र या फर्नीचर की बाबत संदेय धनराशि स्क्रैप मूल्य की राशि, यदि कोर्इ हो, सहित उसके अवलिखित मूल्य से कम रहती है :

परन्तु ऐसी कमी निर्धारिती की पुस्तकों में वास्तव में बट्टे खाते डाल दी जाती है।

स्पष्टीकरण.–इस खंड के प्रयोजनों के लिए—

(1) किसी भवन, मशीनरी, संयंत्र या फर्नीचर की बाबत 'संदेय धनराशियों' के अंतर्गत निम्नलिखित भी है :–

() उनकी बाबत संदेय कोर्इ बीमा, साल्वेज या प्रतिकर;

() जहां भवन, मशीनरी, संयंत्र या फर्नीचर बेचा जाए, वहां वह कीमत जिसमें वह बेचा जाए,

किन्तु इस प्रकार कि जहां मोटर कार की वास्तविक लागत धारा 43 के खंड (1) के परन्तुक के अनुसार पच्चीस हजार रुपये मानी जाए, वहां ऐसी मोटर कार की बाबत संदेय धनराशि वह राशि मानी जाएगी जो उस रकम के, जिसमें मोटर कार बेची जाए, अथवा, यथास्थिति, उसकी बाबत संदेय किसी बीमे, साल्वेज या प्रतिकर धनराशि की रकम (स्क्रैप मूल्य की राशि यदि कोर्इ हो सहित) उस अनुपात में है मानो पच्चीस हजार रुपए की रकम निर्धारिती की मोटर कार की वह वास्तविक लागत है जो उक्त परन्तुक को लागू करने से पूर्व संगणित की गर्इ हो;

(2) 'विक्रीत' शब्द के अन्तर्गत तत्समय लागू किसी विधि के अधीन विनिमय या अनिवार्य अर्जन के रूप में अंतरण भी है किंतु समामेलन कंपनी द्वारा समामेलित कंपनी के जहां समामेलित कंपनी एक भारतीय कंपनी है किसी 47क[आस्ति के समामेलन संबंधी स्कीम में या बैंककारी कंपनी द्वारा बैंककारी संस्था की किसी आस्ति या बैंककारी विनियम अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 5 के खंड () में यथानिर्दिष्ट किसी बैंककारी कंपनी के उक्त अधिनियम की धारा 45 की उपधारा (15) में निर्दिष्ट किसी बैंककारी संस्था के साथ समामेलन की ऐसी स्कीम में, जो उस अधिनियम की धारा 45 की उपधारा (1) के अधीन केंद्रीय सरकार द्वारा मंजूर की गर्इ या प्रवर्तन में लार्इ गर्इ हो] अंतरण इसमें शामिल नहीं हैं।

(iv) 48[* * *]

(v) 49[* * *]

(vi) 50[* * *]

(1क) 51[* * *]

52[(2) जहां निर्धारिती के निर्धारण में उपधारा (1) के अधीन कोर्इ मोक किसी पूर्ववर्ष में इस कारण कि उस पूर्ववर्ष53 के लिए प्रभार्य कोर्इ लाभ या अभिलाभ नहीं है या इस कारण कि प्रभार्य लाभ या अभिलाभ मोक से कम है, पूर्णत: प्रभावी नहीं किया जा सकता वहां धारा 72 की उपधारा (2) और धारा 73 की उपधारा (3) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, यथास्थिति, मोक या उस मोक का वह भाग, जिसे प्रभावी नहीं किया गया है, अगले पूर्ववर्ष के लिए अवक्षयण मोक की रकम में जोड़ा जाएगा और उस मोक का भाग समझा जाएगा, या यदि उस पूर्ववर्ष के लिए मोक नहीं है तो उस पूर्ववर्ष के लिए मोक समझा जाएगा और इसी प्रकार उत्तरवर्ती पूर्ववर्षों के लिए चलता रहेगा।]

 

22. परिपत्र सं. 9, तारीख 23.3.1943, परिपत्र सं. 29-डी(XIX-14), तारीख 31.8.1965, पत्र [फा.सं. 10/14/66- आर्इ.टी.(ए-I)], तारीख 12.12.1966, तारीख 21.6.1968 के पत्र के साथ पठित पत्र [फा.सं. 10/47/68-आर्इ.टी.(ए. II)], तारीख 17.7.1968, परिपत्र सं. 609, तारीख 29.7.1991, परिपत्र सं. 622, तारीख 6.1.1992, परिपत्र सं. 652, तारीख 14.6.1993 और परिपत्र सं. 2/2001, तारीख 9.2.2001 भी देखिए। ब्यौरे के लिए देखिये टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

सुसंगत केस लॉज के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट

23. “निर्धारिती के पूर्णत: या भागत: स्वामित्वाधीन भवनों, मशीनरी, संयंत्र या फर्नीचर के अवक्षयण के संबंध में” शब्दों से प्रारंभ होने वाले और “निम्नलिखित कटौतियां अनुज्ञात की जाएंगी–” शब्दों से समाप्त होने वाले भाग के स्थान पर वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.4.1999 से प्रतिस्थापित। इसके प्रतिस्थापन से पूर्व, वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1996 द्वारा 1.4.1997 द्वारा यथा संशोधित उद्धृत अंश इस प्रकार था :

‘‘निर्धारिती के पूर्णत: या भागत: स्वामित्त्वाधीन और कारबार या वृत्ति के प्रयोजनों के लिए प्रयुक्त भवन, मशीनरी, संयंत्र या फर्नीचर के अवक्षयण के संबंध में, धारा 34 के उपबंधों के अधीन रहते हुए निम्नलिखित कटौतियां अनुज्ञात की जाएंगी–’’

24.‘भवन’, ‘मशीनरी’, ‘निर्धारिती के’, ‘स्वामित्वाधीन’ और ‘कारबार के प्रयोजनों के लिए प्रयुक्त’ पदों के अर्थ के लिए देखिये टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज़ मैनुअल, खंड 3.

25. आय-कर (संशोधन) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.4.1998 से अंत:स्थापित। इससे पूर्व कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.4.1976 से मूल खंड (i) प्रतिस्थापित किया गया था और बाद में कराधान विधि (संशोधन और प्रकीर्ण उपबंध) अधिनियम, 1986 द्वारा 1.4.1988 से उसका लोप किया गया था।

26. नियम 5(1क) और परिशिष्ट 1क देखिये।

27. कराधान विधि (संशोधन और प्रकीर्ण उपबंध) अधिनियम, 1986 द्वारा 1.4.1988 से ‘‘खंड (i) के अन्तर्गत आने वाले पोतों से भिन्न भवन, मशीनरी, संयंत्र या फर्नीचर की दशा में, उसके अवलिखित मूल्य की ऐसी प्रतिशतता जो किसी मामले या मामलों के वर्ग में विहित की जाए,’’ शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

28. नियम 5(1) और परिशिष्ट 1 देखिए। उससे अधिक अवक्षयण का दावा करने की प्रक्रिया के लिए परिशिष्ट 2 भी देखिये।

29. वित्त अधिनियम, 1995 द्वारा 1.4.1996 से प्रथम परन्तुक का लोप किया गया। इसके लोप से पूर्व, वित्त अधिनियम, 1966 द्वारा 1.4.1966 से यथा अंत:स्थापित और वित्त अधिनियम, 1983 द्वारा 1.4.1984 से यथा संशोधित प्रथम परन्तुक निम्न प्रकार था :

‘‘परन्तु जहां किसी मशीनरी या संयंत्र की वास्तविक लागत पांच हजार रुपए से अधिक नहीं है वहां उसकी वास्तविक लागत उस पूर्ववर्ष की बाबत, जिसमें ऐसी मशीनरी या संयंत्र निर्धारिती द्वारा अपने कारबार या वृत्ति के प्रयोजनों के लिए पहली बार प्रयुक्त किया जाता है, कटौती के रूप में अनुज्ञात की जाएगी :’’

30. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.4.1992 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व दूसरा परन्तुक वित्त अधिनियम, 1975 द्वारा 1.4.1975 से यथा अंत:स्थापित और कराधान विधि (संशोधन और प्रकीर्ण उपबंध) अधिनियम, 1986 द्वारा 1.4.1988 से यथा संशोधित किया गया था।

31. वित्त अधिनियम, 1995 द्वारा 1.4.1996 से “यह और” शब्दों का लोप किया गया।

32. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2002 से अंत:स्थापित।

33. आय-कर (संशोधन) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.4.1998 से प्रतिस्थापित। इसके प्रतिस्थापन से पूर्व, वित्त

(सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.4.1992 से यथा अंत:स्थापित और बाद में वित्त अधिनियम, 1995 द्वारा

1.4.1996 से यथा संशोधित दूसरा परन्तुक इस प्रकार था :

‘‘परन्तु यह और कि जहां आस्ति-समूह के अंतर्गत आने वाली कोर्इ आस्ति निर्धारिती द्वारा पूर्ववर्ष के दौरान अर्जित की जाए और उस पूर्ववर्ष में 180 दिन से कम अवधि तक कारबार या वृत्ति के प्रयोजनों के लिए प्रयुक्त की जाए वहां, ऐसी आस्ति की बाबत इस खंड के अधीन कटौती ऐसी आस्ति वाले आस्ति-समूह की दशा में इस खंड के अधीन विहित प्रतिशतता पर परिकलित रकम के 50 प्रतिशत तक सीमित रहेगी :’’

34. वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.4.2003 से अंत:स्थापित।

35. आय-कर (दूसरा संशोधन) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.4.1999 से अंत:स्थापित।

36. ‘भारी माल यान’ की परिभाषा के लिए देखिये आगे पृष्ठ 1.322 पर पाद-टिप्पण 88.

37. मोटर यान अधिनियम, 1988 की धारा 2 के खंड (17), (21), (23), (24) और (44) में ‘भारी यात्री मोटर यान’, ‘हल्का मोटर यान’, ‘मध्यम माल यान’ ‘मध्यम यात्री मोटर यान’ और ‘ट्रैक्टर’ की परिभाषा क्रमश: निम्न प्रकार दी गर्इ है :

‘(17) ‘‘भारी यात्री मोटर यान’’ से अभिप्रेत है ऐसा कोर्इ लोक सेवा यान या प्राइवेट सेवा यान या शिक्षा संस्था बस या कोर्इ बस जिसका सकल यान भार, या ऐसी मोटर कार जिसका लदान रहित भार, 12,000 किलोग्राम से अधिक है,

** ** **

(21) ‘‘हल्का मोटर यान’’ से अभिप्रेत है ऐसा कोर्इ परिवहन यान या बस जिसमें से किसी का सकल यान भार, या ऐसी मोटर कार या ट्रैक्टर या रोड-रोलर जिसमें से किसी का लदान रहित भार, 7,500 किलोग्राम से अधिक नहीं है,

** ** **

(23) ‘‘मध्यम माल यान’’ से हल्के मोटर यान या भारी माल यान से भिन्न कोर्इ माल वाहन अभिप्रेत है;

(24) “मध्यम यात्री मोटर यान” से ऐसा कोर्इ लोक सेवा यान या प्राइवेट सेवा यान या शिक्षा संस्था बस अभिप्रेत है जो मोटर साइकिल, अशक्त यात्री गाड़ी, हल्का मोटर यान या भारी यात्री मोटर यान से भिन्न है;

** ** **

(44) ‘‘ट्रैक्टर’’ से ऐसा मोटर यान अभिप्रेत है जो स्वयं (नोदन के प्रयोजन के लिए काम में आने वाले उपस्कर से भिन्न) कोर्इ भार वहन करने के लिए निर्मित नहीं है, किन्तु इसके अंतर्गत रोड-रोलर नहीं है;‘

38. ‘मैक्सी कैब’ और ‘मोटर कैब’ की परिभाषा के लिए देखिए आगे पृष्ठ 1.618 पर पाद टिप्पण 65.

39. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1991 द्वारा 15.1.1991 से अंत:स्थापित।

40. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.4.2000 से पांचवां परन्तुक प्रतिस्थापित। इसके प्रतिस्थापन से पूर्व, वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1996 द्वारा 1.4.1997 से यथा अंत:स्थापित और बाद में वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा

1.4.1999 से संशोधित पांचवां परन्तुक इस प्रकार था :

‘‘परन्तु यह भी कि धारा 47 के खंड (xiii) और खंड (xiv) या धारा 170 में निर्दिष्ट भवन, मशीनरी, संयंत्र या फर्नीचर, जो मूर्त आस्तियां हैं, या व्यवहार ज्ञान, पेटेंट, कापीराइट, व्यापार चिन्ह, लाइसेंस, फ्रेंचाइज़ या इसी प्रकार का कोर्इ अन्य कारबार या वाणिज्यिक अधिकार जो अमूर्त आस्तियां हैं जो पूर्ववर्ती और उत्तरवर्तन की दशा में उत्तरवर्ती को अनुज्ञेय है। या यथास्थिति समामेलक कंपनी और समामेलन की दशा में समामेलित कंपनी के अवक्षयण की बाबत सकल कटौती किसी पूर्ववर्ष में विहित दर पर परिकलित कटौती से अधिक नहीं होगी मानो उत्तरवर्तन या समामेलन हुआ ही नहीं था, और ऐसी कटौती पूर्ववर्ती और उत्तरवर्ती अथवा यथास्थिति समामेलन कंपनी और समामेलित कम्पनी के बीच उन दिनों की संख्या के अनुपात में प्रभाजित होगी जिनके लिए आस्तियों का उनके द्वारा उपयोग किया गया था।’’

41. कराधान विधि (संशोधन और प्रकीर्ण उपबंध) अधिनियम, 1986 द्वारा 1.4.1988 से अन्त:स्थापित।

42. वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.4.2003 से “खंड” के स्थान पर प्रतिस्थापित।

*.खंड पढ़ा जाना चाहिए।

.उपखंड पढ़ा जाना चाहिए।

43. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.4.1999 से अंत:स्थापित।

44. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2002 से अंत:स्थापित।

45-46. वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.4.2003 से अंत:स्थापित। इसके पूर्व मूल खंड (iiक) कराधान विधि (संशोधन और प्रकीर्ण उपबंध) अधिनियम, 1986 द्वारा 1.4.1988 से लोप किया गया। मूल खंड (iiक), जो वित्त

(सं. 2) अधिनियम, 1980 द्वारा 1.4.1981 से अन्त:स्थापित किया गया था, इस प्रकार था :

‘(iiक) किसी नर्इ मशीनरी या संयंत्र की दशा में (पोत और विमान से भिन्न) जो 31 मार्च, 1980 के पश्चात् किन्तु 1 अप्रैल, 1985 से पूर्व अधिष्ठापित किया गया था, पूर्ववर्ष की बाबत जिसमें ऐसी मशीनरी या संयंत्र अधिष्ठापित किया गया है (मशीनरी या संयंत्र के दोहरी या बहुल पारी कार्यचालन के लिए अतिरिक्त मोक और होटल के रूप में प्रयुक्त किसी परिसर में अधिष्ठापित मशीनरी या संयंत्र की बाबत अतिरिक्त मोक को हटाकर) अथवा, यदि मशीनरी या संयंत्र का प्रथम बार प्रयोग ठीक उत्तरवर्ती पूर्ववर्ष में किया जाता है तो उस पूर्ववर्ष की बाबत खंड (ii) के अधीन स्वीकार्य रकम की आधी रकम के बराबर और धनराशि :

परन्तु इस खंड के अधीन निम्नलिखित की बाबत कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी—

() किसी कार्यालय परिसर या किसी निवास-स्थान में अधिष्ठापित मशीनरी या संयंत्र;

() कोर्इ कार्यालय साधित्र या सड़क परिवहन यान; और

() कोर्इ मशीनरी या संयंत्र, जिसकी पूरी वास्तविक लागत किसी एक पूर्ववर्ष के ‘‘कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ’’ शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय निकालते समय कटौती के रूप में (चाहे अवक्षयण के रूप में या अन्यथा), अनुज्ञात हो।

स्पष्टीकरण.–इस खंड के प्रयोजनों के लिए,—

() “नर्इ मशीनरी या संयंत्र” का वही अर्थ होगा जो इस उपधारा के खंड (vi) के नीचे दिये गए स्पष्टीकरण के खंड (2) में उसका दिया गया है।

() “वास-स्थान” गैस्ट हाउस की प्रकति थी वास-सुविधा भी शामिल है, किंतु होटल के रूप में प्रयुक्त परिसर इसमें शामिल नहीं है;‘

46क. वित्त (संñ 2) अधिनियम, 2004 द्वारा 1.4.2005 से “पच्चीस” के स्थान पर प्रतिस्थापित।

46ख. नियम 5क और प्ररूप सं. 3कक देखिये।

47. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.4.1998 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित। इससे पूर्व मूल खंड (iii) का वित्त अधिनियम, 1966 द्वारा 1.4.1966 से और वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1967 द्वारा 1.4.1967 से संशोधन किया गया था तथा बाद में कराधान विधि (संशोधन और प्रकीर्ण उपबंध) अधिनियम, 1986 द्वारा 1.4.1988 से लोप किया गया था।

47क. वित्त अधिनियम, 2005 द्वारा 1.4.2005 से “आस्ति के समामेलन संबंधी स्कीम में” शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

48. कराधान विधि (संशोधन और प्रकीर्ण उपबंध) अधिनियम, 1986 द्वारा 1.4.1988 से खंड (iv) का लोप किया गया था। मूल खंड (iv) वित्त अधिनियम, 1983 द्वारा 1.4.1984 से, वित्त अधिनियम, 1978 द्वारा

1.4.1979 से, वित्त अधिनियम, 1976 द्वारा 1.4.1977 से और वित्त अधिनियम, 1966 द्वारा 1.4.1966 से संशोधित किया गया था।

49. कराधान विधि (संशोधन और प्रकीर्ण उपबंध) अधिनियम, 1986 द्वारा 1.4.1988 से खंड (v) का लोप किया गया था। मूल खंड (v) वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1967 द्वारा 1.4.1968 से अन्त:स्थापित और बाद में वित्त अधिनियम, 1983 द्वारा 1.4.1984 से संशोधित किया गया था।

50. कराधान विधि (संशोधन और प्रकीर्ण उपबंध) अधिनियम, 1986 द्वारा 1.4.1988 से खंड (vi) का लोप किया गया था। मूल खंड (vi) प्रत्यक्ष कर (संशोधन) अधिनियम, 1974 द्वारा 1.4.1975 से अन्त:स्थापित और बाद में वित्त अधिनियम, 1976 द्वारा 1.4.1976 से संशोधित किया गया था।

51. कराधान विधि (संशोधन और प्रकीर्ण उपबंध) अधिनियम, 1986 द्वारा 1.4.1988 से उपधारा (1क) का लोप किया गया था। मूल उपधारा (1क) कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1971 से अंत:स्थापित की गर्इ थी।

52. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2002 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व, कराधान विधि (संशोधन और प्रकीर्ण उपबंध) अधिनियम, 1986 द्वारा 1.4.1988 से, प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से और वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1993 से यथासंशोधित और वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1996 द्वारा

1.4.1997 से प्रतिस्थापित तथा वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा 1.4.2001 से संशोधित, उपधारा (2) इस प्रकार थी :

‘‘(2) जहां निर्धारिती के निर्धारण में किसी पूर्ववर्ष में उपधारा (1) के खण्ड (ii) के अधीन कोर्इ मोक इस कारण कि उस पूर्ववर्ष के लिए प्रभार्य कोर्इ लाभ या अभिलाभ नहीं है या इस कारण कि लाभ या अभिलाभ मोक से कम है, पूर्णतया प्रभावी नहीं की जा सकती तब यथास्थिति, वह मोक या मोक का वह भाग (जिसे इसमें इसके पश्चात् बाकी अवक्षयण मोक कहा गया है) जिसे प्रभावी नहीं किया गया है,–

(i) उसके द्वारा चलाए गए और उस निर्धारण वर्ष के लिए निर्धारण योग्य किसी कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ से, यदि कोर्इ हो, मुजरा किया जाएगा;

(ii) यदि बाकी अवक्षयण मोक खंड (i) के अधीन पूरी तरह मुजरा नहीं किया जा सकता तो मुजरा न की गर्इ राशि उस निर्धारण वर्ष के लिए निर्धारणीय किसी अन्य शीर्ष की आय से, यदि कोर्इ हो, मुजरा की जाएगी;

(iii) यदि बाकी अवक्षयण मोक खंड (i) और खंड (ii) के अधीन पूरी तरह मुजरा नहीं किया जा सकता तो मुजरा न किए गए मोक की राशि अगले निर्धारण वर्ष में ले जार्इ जाएगी और—

() उस निर्धारण वर्ष में उसके द्वारा चलाए गए और निर्धार्य किसी कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ से, यदि कोर्इ हो, मुजरा की जाएगी;

() यदि बाकी अवक्षयण मोक का पूरी तरह मुजरा नहीं किया जा सकता तो मुजरा न की गर्इ बाकी अवक्षयण मोक की राशि अगले वर्ष में ले जार्इ जाएगी जो उस निर्धारण वर्ष के ठीक बाद के आठ निर्धारण वर्षों से अधिक न हो जिसके लिए उपरोक्त मोक पहली बार संगणित किया गया था :

परन्तु यह कि उपखंड (ख) में वर्णित आठ निर्धारण वर्षों की समय सीमा कंपनी की दशा में उस पूर्ववर्ष से, जिसमें उक्त कंपनी रुग्ण औद्योगिक कंपनी (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1985 (1986 का 1) की धारा 17 की उपधारा (1) के अधीन रुग्ण औद्योगिक कंपनी हो गर्इ है, सुसंगत निर्धारण वर्ष से प्रारंभ होने वाले और उस पूर्ववर्ष से, जिसमें ऐसी कंपनी का समग्र शुद्ध मूल्य संचयित हानियों के बराबर या अधिक हो जाता है, सुसंगत निर्धारण वर्ष से समाप्त होने वाले निर्धारण वर्ष के लिए लागू नहीं होगी।

स्पष्टीकरण.–इस खंड के प्रयोजनों के लिए ‘शुद्ध मूल्य’ का वही अर्थ होगा जो रुग्ण औद्योगिक कंपनी (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1985 (1986 का 1) की धारा 3 की उपधारा (1) के खंड (छक) में उसका है।’’

53 ‘‘उस पूर्ववर्ष के लिए प्रभार्य कोर्इ लाभ या अभिलाभ’’ पद के अर्थ के लिए देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.

 

 

[वित्त अधिनियम, 2005 तथा विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 द्वारा संशोधित रूप में]

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