नियमों और कुछ अधिसूचनाओं का संसद के समक्ष रखा जाना
नियमों और कुछ अधिसूचनाओं का संसद के समक्ष रखा जाना
296. केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के अधीन बनाए गए प्रत्येक नियम को, धारा 245च की उपधारा (7) के अधीन समझौता आयोग, धारा 245फ के अधीन अग्रिम विनिर्णय प्राधिकरण और धारा 255 की उपधारा (5) के अधीन अपील अधिकरण द्वारा बनाए गए प्रक्रिया के नियमों को और धारा 10 के खंड (23ग) के उपखंड (iv) के अधीन 1 जून, 2007 से पहले जारी की गर्इ प्रत्येक अधिसूचना और धारा 139 की उपधारा (1ग) या धारा 153क की उपधारा (1) के तीसरे परन्तुक या धारा 153ग की उपधारा (1) के दूसरे परन्तुक के अधीन जारी की गर्इ प्रत्येक अधिसूचना को उस नियम के बनाए जाने या उस अधिसूचना के जारी किए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, तीस दिन की अवधि के लिए रखवाएगी। यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक क्रमवर्ती सत्रों में पूरी हो सकेगी; यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त क्रमवर्ती सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम या अधिसूचना में कोर्इ परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् उसका ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभाव होगा; यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि उस नियम को नहीं बनाया जाना चाहिए या उस अधिसूचना को जारी नहीं किया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् उसका कोर्इ प्रभाव नहीं होगा। किंतु नियम या अधिसूचना के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गर्इ किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
[वित्त अधिनियम, 2021 द्वारा संशोधित रूप में]

