धारा 48 का संशोधन।
धारा 48 का संशोधन।
29. आय-कर अधिनियम की धारा 48 में, तीसरे परंतुक के स्थान पर निम्नलिखित परंतुक 1 अप्रैल, 2017 से रखे जाएंगे, अर्थात् :–
"परंतु यह भी कि दूसरे परंतुक में अंतर्विष्ट कोर्इ बात ऐसी दीर्घकालिक पूंजी आस्ति, जो–
(क) सरकार द्वारा जारी किए गए पूंजी सूचांकित बंधपत्रों से भिन्न कोर्इ बंधपत्र या डिबेंचर है; या
(ख) प्रभुत्वसंपन्न स्वर्ण बंधपत्र स्कीम, 2015 के अधीन भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी प्रभुत्वसंपन्न स्वर्ण बंधपत्र से भिन्न कोर्इ बंधपत्र या डिबेंचर है,
के अंतरण से उद्भूत दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभ को लागू नहीं होगी :
परंतु यह भी कि किसी ऐसे निर्धारिती की दशा में, जो अनिवासी है, उसके द्वारा अभिदत्त किसी भारतीय कंपनी के रुपए के अंकित बंधपत्र के मोचन के समय किसी विदेशी करेंसी के विरुद्ध रुपए के अधिमूल्यन के परिणामस्वरूप उद्भूत किसी अभिलाभ को इस धारा के अधीन प्रतिफल के पूर्ण मूल्य की संगणना के प्रयोजनों के लिए छोड़ दिया जाएगा:"।

