आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 282

साधारणतया सूचना की तामील

धारा

धारा संख्या

282

अध्याय शीर्षक

अध्याय XXIII - विविध

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2015

साधारणतया सूचना की तामील

साधारणतया सूचना की तामील

93क[साधारणतया सूचना की तामील

282. (1) इस अधिनियम के अधीन किसी सूचना या समन या अध्यपेक्षा या आदेश या किसी अन्य संसूचना (जिसे इस धारा में इसके पश्चात् ‘‘संसूचना’’ कहा गया है) की तामील उसमें नामित व्यक्ति को निम्नलिखित द्वारा उसकी एक प्रति परिदत्त या संप्रेषित करके की जा सकेगी,—

()  डाक द्वारा या ऐसी कुरियर सेवाओं द्वारा, जो बोर्ड द्वारा अनुमोदित की जाएं; या

()  ऐसी रीति में, जो समनों की तामील के प्रयोजनों के लिए सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन उपबंधित की गर्इ है; या

()  सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (2000 का 21) के अध्याय 4 में यथा उपबंधित किसी इलैक्ट्रानिक अभिलेख के रूप में;

()  दस्तावेजों के पारेषण के ऐसे किसी अन्य साधन द्वारा, जो बोर्ड द्वारा इस निमित्त बनाए गए नियमों द्वारा उपबंधित किया जाए।

(2) बोर्ड, उन पतों के लिए (जिसके अंतर्गत इलैक्ट्रानिक डाक या इलैक्ट्रानिक डाक संदेश के लिए पता भी है) उपबंध करने वाले नियम बना सकेगा जिन पर उपधारा (1) में निर्दिष्ट संसूचना उसमें नामित व्यक्ति को परिदत्त या संप्रेषित की जा सकेगी।

स्पष्टीकरण — इस धारा के प्रयोजनों के लिए, ‘‘इलैक्ट्रानिक डाक’’ और ‘‘इलैक्ट्रानिक डाक संदेश’’ पदों के वही अर्थ होंगे, जो सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (2000 का 21) की धारा 66क के स्पष्टीकरण में हैं।]

 

93क. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा 1.10.2009 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व धारा 282 इस प्रकार थी:

“282. साधारणतया सूचना की तामील—(1) इस अधिनियम के अधीन सूचना या अध्यपेक्षा की तामील उसमें नामित व्यक्ति पर या तो डाक द्वारा की जा सकेगी या इस प्रकार की जा सकेगी, मानो वह सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन न्यायालय द्वारा जारी किया गया समन हो।

      (2) ऐसी कोर्इ सूचना या अध्यपेक्षा निम्नलिखित को संबोधित की जा सकेगी--

()  किसी फर्म या हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब की दशा में फर्म के किसी सदस्य को या कुटुम्ब के कर्ता या किसी वयस्क सदस्य को;

()  किसी स्थानीय प्राधिकारी या कंपनी की दशा में, उसके प्रधान अधिकारी को;

()  व्यष्टियों के किसी अन्य संगम या निकाय की दशा में, उसके प्रधान अधिकारी या किसी सदस्य को;

()  किसी अन्य व्यक्ति की दशा में (जो व्यष्टि नहीं है) उस व्यक्ति को जो उसके कामकाज का प्रबंध करता है या उस पर नियंत्रण रखता है।”

 

 

[वित्त अधिनियम, 2015 द्वारा संशोधित रूप में]

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