आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 281ख

कुछ दशाओं में राजस्व के संरक्षण के लिए अनन्तिम कुर्की

धारा

धारा संख्या

281ख

अध्याय शीर्षक

अध्याय XXIII - विविध

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2014

कुछ दशाओं में राजस्व के संरक्षण के लिए अनन्तिम कुर्की

कुछ दशाओं में राजस्व के संरक्षण के लिए अनन्तिम कुर्की

88[कुछ दशाओं में राजस्व के संरक्षण के लिए अनन्तिम कुर्की89

281ख. (1) जहां किसी आय के निर्धारण की अथवा किसी ऐसी आय के, जो निर्धारण से छूट गर्इ है, निर्धारण या पुनर्निर्धारण की कार्यवाही के लंबित रहते हुए 86[निर्धारण] अधिकारी की यह राय है कि राजस्व के हितों की रक्षा के प्रयोजन के लिए ऐसा करना आवश्यक है वहां वह 90[90क[प्रधान मुख्य आयुक्त या] मुख्य आयुक्त, 90क[प्रधान आयुक्त या] आयुक्त, 90क[प्रधान महानिदेशक या] महानिदेशक या 90क[प्रधान निदेशक या] निदेशक] के पूर्व अनुमोदन से, लिखित आदेश द्वारा, उस निर्धारिती की किसी संपत्ति को दूसरी अनुसूची में दी गर्इ रीति से अनंतिम रूप से कुर्क कर सकता है।

91[स्पष्टीकरण.–इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए धारा 132 की उपधारा (5) के अधीन कार्यवाही, आय के निर्धारण की अथवा किसी ऐसी आय के, जो निर्धारण से छूट गर्इ है, निर्धारण या पुन: निर्धारण की कार्यवाही समझी जाएंगी।]

(2) ऐसी प्रत्येक अनन्तिम कुर्की उपधारा (1) के अधीन किए गए आदेश की तारीख से छह मास की अवधि की समाप्ति के पश्चात् निष्प्रभावी हो जाएगी :

परन्तु 92[92क[प्रधान मुख्य आयुक्त या] मुख्य आयुक्त, 92क[प्रधान आयुक्त या] आयुक्त, 92क[प्रधान महानिदेशक या] महानिदेशक या 92क[प्रधान निदेशक या] निदेशक] ऐसे कारणों से जो लेखबद्ध किए जायेंगे, पूर्वोक्त, कालावधि को इतनी अतिरिक्त अवधि या अवधियों के लिए बढ़ा सकता है, जो वह ठीक समझे किन्तु विस्तार की कुल अवधि किसी भी दशा में 92ख[दो वर्ष या निर्धारण अथवा पुन:निर्धारण के आदेश की तारीख के पश्चात् साठ दिन, इनमें से जो भी पश्चात्वर्ती हो] से अधिक नहीं होगी :]

93[***]

 

88. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.10.1975 से अंत:स्थापित।

89. अनुदेश सं. 8/2004, तारीख 2.9.2004 तथा परिपत्र सं. फा.सं. 404/22/2004-आर्इ.टी.सी.सी., तारीख 5.11.2004 भी देखिए।

90. वित्त अधिनियम, 1997 द्वारा 1.10.1996 से भूतलक्षी प्रभाव से ‘‘मुख्य आयुक्त या आयुक्त’’ के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पहले ‘‘मुख्य आयुक्त या आयुक्त’’ शब्द प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से ‘‘आयुक्त’’ के स्थान पर रखे गए थे।

90क. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2014 द्वारा 1.6.2013 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।

90ख. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2014 द्वारा 1.6.2013 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।

91. वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.4.1988 से अंत:स्थापित।

92. वित्त अधिनियम, 1997 द्वारा 1.10.1996 से भूतलक्षी प्रभाव से ‘‘मुख्य आयुक्त या आयुक्त’’ के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पहले "मुख्य आयुक्त या आयुक्त" शब्द प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से ‘‘आयुक्त’’ के स्थान पर रखे गए थे।

92क. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2014 द्वारा 1.6.2013 से भूतलक्षी प्रभाव से अंतस्थापित।

92ख. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2014 द्वारा 1.10.2014 से "दो वर्ष" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

93. वित्त (सं. 2) अधिनियम द्वारा दूसरे और तीसरे परन्तुक का लोप किया गया। लोप किए जाने से पूर्व वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.4.1988 से अंत:स्थापित पहला परन्तुक और वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा 1.4.1988 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित दूसरा परन्तुक निम्नानुसार थे :

"परन्तु यह और कि जहां धारा 245ग के अधीन समझौते के लिए कोर्इ आवेदन किया जाता है वहां ऐसा आवेदन किए जाने की तारीख से प्रारम्भ होने वाली और धारा 245घ की उपधारा (1) के अधीन आदेश किए जाने की तारीख को समाप्त होने वाली अवधि पूर्वगामी परंतुक में विनिर्दिष्ट अवधि में से निकाल दी जाएगी :

परंतु यह भी कि उस अवधि को, जिसके दौरान निर्धारण या पुनर्निर्धारण की कार्यवाहियों को किसी न्यायालय के आदेश या व्यादेश द्वारा रोक दिया जाता है, पहले परंतुक में विनिर्दिष्ट अवधि से अपवर्जित किया जाएगा।"

 

 

[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2014 द्वारा संशोधित रूप में]

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