कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ
घ. कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ
कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ
28. निम्नलिखित आय ''कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ'' शीर्ष के अधीन आय-कर से प्रभार्य होगी,–
(i) पूर्ववर्ष के दौरान किसी समय निर्धारती द्वारा चलाए गए किसी ऐसे कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ,–
(ii) कोर्इ ऐसा प्रतिकर या अन्य संदाय जो निम्नलिखित को देय या द्वारा प्राप्त हो,—
(क) किसी भारतीय कम्पनी के सम्पूर्ण या पर्याप्तत: सम्पूर्ण कार्यों का प्रबंध करने वाले किसी व्यक्ति को, चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो, अपने प्रबंध के पर्यवसान पर या उसके संबंध में अथवा उससे संबद्ध निबंधनों और शर्तों के उपान्तरण पर या उसके संबंध में;
(ख) भारत में किसी अन्य कम्पनी के सम्पूर्ण या पर्याप्तत: सम्पूर्ण कार्यों का प्रबंध करने वाले किसी व्यक्ति को चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो, अपने पद के पर्यवसान पर या उसके संबंध में अथवा उससे संबद्ध निबंधनों और शर्तों के उपान्तरण पर या उसके संबंध में;
(ग) किसी व्यक्ति के कारबार के संबद्ध कार्यकलापों के किसी भाग के लिए भारत में कोर्इ अभिकरण धारण करने वाले किसी व्यक्ति को, चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो, अधिकरण के पर्यवसान पर या उसके संबंध में अथवा उससे संबद्ध निबंधनों और शर्तों के उपान्तरण पर या उसके संबंध में;
(घ) किसी व्यक्ति को सरकार में या सरकार के स्वामित्व या नियंत्रण के अधीन किसी निगम में, तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन, किसी सम्पत्ति या कारबार के प्रबंध के निहित होने के लिए या उसके संबंध में;
वित्त अधिनियम, 2018 द्वारा 1.4.2019 से धारा 28 के खंड (ii) के उपखंड (घ) के पश्चात् उपखंड (ड़) अंत:स्थापित किया जाएगा:
(ड़) किसी व्यक्ति को, चाहे किसी भी नाम से ज्ञात हो, उसके कारबार से संबंधित किसी संविदा के पर्यवसान या निबंधनों और शर्तों में उपांतरण पर या उसके संबंध में।
(iii) किसी व्यापारिक, वृत्तिक या समरूप संगम या अपने सदस्यों के लिए की गर्इ विनिर्दिष्ट सेवाओं से प्राप्त आय;
(iiiक) आयात और निर्यात (नियंत्रण) अधिनियम, 1947 (1947 का 18) के अधीन बनाए गए आयात (नियंत्रण) आदेश, 1955 के अधीन अनुदत्त किसी लाइसेंस के विक्रय से लाभ;
(iiiख) भारत सरकार की किसी स्कीम के अधीन निर्यात मद्दे किसी व्यक्ति द्वारा प्राप्त या प्राप्य नकद सहायता (चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो);
(iiiग)सीमाशुल्क और केन्द्रीय उत्पाद-शुल्क वापसी नियम, 1971 के अधीन निर्यात मद्दे किसी व्यक्ति को वापसी के रूप में पुन:संदत्त या पुन:संदेय कोर्इ सीमा-शुल्क या उत्पाद शुल्क;
(iiiघ) विदेश व्यापार (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1992 (1992 का 22) की धारा 5 के अधीन विरचित और घोषित निर्यात-आयात नीति के अधीन ड्यूटी एन्टाइटलमेंट पास बुक स्कीम, जो ड्यूटी रिमिशन स्कीम है, के अंतरण पर कोर्इ लाभ;
(iiiड़) विदेश व्यापार (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1992 (1992 का 22) की धारा 5 के अधीन विरचित और घोषित निर्यात-आयात नीति के अधीन ड्यूटी फ्री रिप्लेनिशमेंट सर्टिफिकेट, जो ड्यूटी रिमीशन स्कीम है, के अंतरण पर कोर्इ लाभ;
(iv)किसी कारबार या किसी वृत्ति के प्रयोग से उद्भूत होने वाले किसी फायदे या परिलब्धि का मूल्य, चाहे वह धन में बदलने योग्य हो या नहीं;
(v)किसी फर्म के भागीदार को ऐसी फर्म से देय या प्राप्त कोर्इ ब्याज, वेतन, बोनस, कमीशन या पारिश्रमिक, चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो :
परन्तु जहां कोर्इ ब्याज, वेतन, बोनस, कमीशन या पारिश्रमिक, चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो, या उसका कोर्इ भाग, धारा 40 के खंड (ख) के अधीन कटौती किए जाने के लिए अनुज्ञात नहीं किया गया है वहां इस खंड के अधीन आय का उस रकम की मात्रा तक, जो कटौती किए जाने के लिए इस प्रकार अनुज्ञात नहीं की जाती है, समायोजन किया जाएगा;
(vक) (क) किसी कारबार या वृत्तिके संबंध में कोर्इ क्रियाकलाप न करने के लिए; या
(ख) कोर्इ व्यवहार ज्ञान, पेटेंट, कापीराइट, व्यापारिक, अनुज्ञप्ति, फ्रेंचाइज़ या इसी प्रकार की कोर्इ अन्य कारबार या वाणिज्यिक अधिकार अथवा ऐसी सूचना या तकनीक, जो माल के निर्माण या प्रोसेसिंग में या सेवाओं का उपबंध करने में सहायक हो, दूसरे को न देने के लिए,
किसी करार के अधीन नकद या वस्तु रूप में प्राप्त या प्राप्य कोर्इ राशि :
परन्तु उपखंड (क)–
(i) किसी वस्तु या चीज़ के निर्माण, उत्पादन या प्रसंस्करण के अधिकार के या कोर्इ कारबार या वृत्तिकरने के अधिकार के अंतरण के कारण नकद या वस्तु रूप में प्राप्त या प्राप्य ऐसी किसी राशि को, जो ''पूंजी अभिलाभ'' शीर्ष के अधीन प्रभार्य है, लागू नहीं होगा;
(ii) राष्ट्र संघ के पर्यावरण संबंधी कार्यक्रम के अधीन मोनट्रियल प्रोटोकोल आन सब्सटान्सेज़ दैट डिपलीट दि ओज़ोन लेयर की बहुपक्षीय विधि से भारत सरकार के साथ किए गए करार के निबंधनों के अनुसार प्रतिकर के रूप में प्राप्त किसी राशि को लागू नहीं होगा।
स्पष्टीकरण–इस खंड के प्रयोजनों के लिए–
(i) "करार" के अंतर्गत कोर्इ ठहराव या समझौता या सामूहिक कार्य है–
(अ) चाहे ऐसा ठहराव, समझौता या कार्य प्रायिक या लिखित रूप में अथवा नहीं; या
(आ) चाहे ऐसा ठहराव, समझौता या कार्य विधिक कार्यवाहियों द्वारा प्रवर्तनीय होने के लिए आशयित हो अथवा नहीं;
(ii) "सेवा" से ऐसे किसी प्रकार की सेवा अभिप्रेत है जो संभाव्य उपयोगकर्ताओं को उपलब्ध करार्इ जाती है और इसमें किसी औद्योगिक या वाणिज्यिक प्रकृति के कारबार के संबंध में जैसे कि लेखाकर्म, बैंककारी, संचार, समाचार या सूचना, विज्ञापन, मनोरंजन, आमोद-प्रमोद, शिक्षा, वित्तपोषण, बीमा, चिट फंड, रियल एस्टेट, सन्निर्माण, परिवहन, भंडारण, प्रोसेसिंग, इलैक्ट्रिकल या अन्य ऊर्जा प्रदाय, बोर्डिग या लाजिंग सेवाओं का उपबंध करना भी है;
(vi)कीमैन बीमा पालिसी पर बोनस के रूप में आबंटित राशि सहित ऐसी पालिसी के अधीन प्राप्त कोर्इ राशि।
स्पष्टीकरण.–इस खंड के प्रयोजनों के लिए "कीमैन बीमा पालिसी" पद का वही अर्थ है जो धारा 10 के खंड (10घ) में उसका है;
वित्त अधिनियम, 2018 द्वारा 1.4.2019 से धारा 28 के खंड (vi) के पश्चात् खंड (viक) अंत:स्थापित किया जाएगा:
(viक) उस तारीख को सूची का उचित बाजार मूल्य जिसको इसे विहित रीति में अवधारित पूंजी आस्ति में संपरिवर्तित किया जाता है या व्यवहृत किया जाता है;
(vii) किसी ऐसी पूंजी आस्ति के मद्दे (भूमि या साख या वित्तीय लिखत से भिन्न) जो गिरार्इ, नष्ट, त्यक्त या अंतरित की जा रही हो, नकद या वस्तु रूप में प्राप्त या प्राप्य राशि यदि उस पूंजी आस्ति पर संपूर्ण व्यय को धारा 35कघ के अधीन कटौती के रूप में अनुज्ञात किया गया है।
स्पष्टीकरण 1.–[प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से लोप किया गया।]
स्पष्टीकरण 2.– जहां किसी निर्धारिती द्वारा चलाए गए सट्टे वाले संव्यवहार ऐसी प्रकृति के हैं कि वे कारबार का रूप ले लेते हैं, वहां उस कारबार को (जिसे इसमें इसके पश्चात् ''सट्टे का कारबार'' कहा गया है) किसी अन्य कारबार से भिन्न और पृथक् समझा जाएगा।
[वित्त अधिनियम, 2018 द्वारा संशोधित रूप में]

