अभियोजन मुख्य आयुक्त या आयुक्त के कहने पर होना करने के लिए
अभियोजन का 35[मुख्य आयुक्त या आयुक्त] की प्रेरणा से होना
36279. 37[(1) किसी व्यक्ति के विरुद्ध धारा 275क, धारा 276, धारा 276क, धारा 276ख, धारा 276खख, धारा 276ग, धारा 276गग, धारा 276घ, धारा 277 या धारा 278 के अधीन किसी अपराध के लिए कोर्इ कार्यवाही, आयुक्त या आयुक्त (अपील) या समुचित प्राधिकारी की पूर्व मंजूरी से ही की जाएगी, अन्यथा नहीं :
परन्तु, यथास्थिति, मुख्य आयुक्त या महानिदेशक, इस उपधारा के अधीन कार्यवाही संस्थित करने के लिए पूर्वोक्त आय-कर प्राधिकारियों को ऐसे अनुदेश या निदेश जारी कर सकेगा, जो वह ठीक समझे।
स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए, "समुचित प्राधिकारी" का वही अर्थ है जो धारा 269पक के खंड (ग) में है।]
38[(1क) किसी व्यक्ति के विरुद्ध किसी ऐसे निर्धारण वर्ष के निर्धारण के संबंध में, जिसकी बाबत उस पर धारा 271 की उपधारा (1) के खंड (iii) के अधीन आरोपित या अधिरोपणीय शास्ति, धारा 273क के अधीन आदेश द्वारा घटा दी गर्इ है या उसका अधित्यजन कर दिया गया है, धारा 276ग या धारा 277 के अधीन किसी अपराध के लिए कार्यवाही नहीं की जाएगी।]
39[(2) इस अध्याय के अधीन किसी अपराध का प्रशमन कार्यवाही संस्थित किए जाने के पूर्व या पश्चात्, मुख्य आयुक्त या महानिदेशक द्वारा किया जा सकेगा।]
40[(3) जहां उपधारा (1) के अधीन किसी व्यक्ति के विरूद्ध कोर्इ कार्यवाही की गर्इ है, वहां धारा 116 के 41[खंड (क) से (छ)] में विनिर्दिष्ट आय-कर प्राधिकािरयों में से किसी के समक्ष, ऐसे व्यक्ति द्वारा किया गया कोर्इ कथन या पेश किया गया कोर्इ लेखा या अन्य दस्तावेजें ऐसी कार्यवाहियों के प्रयोजन के लिए साक्ष्य के रूप में केवल इस आधार पर अग्राह्य नहीं होंगी कि ऐसा कथन या ऐसा लेखा या अन्य दस्ताावेज इस विश्वाास के साथ किया गया या पेश किया गया था कि अधिरोपणीय शास्ति 42[धारा 273क के अधीन] घटा दी जाएगी या अधित्याजित कर दी जाएगी या वह अपराध जिसकी बाबत ऐसी कार्यवाही की गर्इ थी, प्रशमित कर दिया जाएगा।]
43[स्पष्टीकरण.–शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि इस अधिनियम के अधीन आदेश, अनुदेश या निदेश जारी करने की शक्ति के अंतर्गत इस धारा के अधीन अपराधों के समुचित प्रशमन के लिए अन्य आय-कर प्राधिकारियों को अनुदेश या निदेश (जिनके अंतर्गत बोर्ड का पूर्व अनुमोदन लेने के लिए निदेश या अनुदेश है) जारी करने की शक्ति सम्मिलित है, और यह समझा जाएगा कि यह शक्ति हमेशा से सम्मिलित रही है।]
35. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आयुक्त" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
36. पत्र [फा.सं. 4/7/69-आर्इ.टी.(इन.)], तारीख 21.3.1969 और अनुदेश सं. 1980 का 3170 भी देखिए। ब्यौरे के लिए, देखिये टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
37. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.10.1991 से प्रतिस्थापित। इससे पहले उपधारा (1) निम्न प्रकार थी :
'(1) किसी व्यक्ति के विरुद्ध धारा 275क, धारा 276, धारा 276क, धारा 276ख, धारा 276खख, धारा 276ग और धारा 276गग, धारा 276घ, धारा 277 या धारा 278 के अधीन किसी अपराध के लिए कार्यवाही मुख्य आयुक्त या महानिदेशक या आयुक्त की पूर्व मंजूरी से की जाएगी, अन्यथा नहीं :
परन्तु यदि अभियोजन, आयुक्त (अपील) या समुचित प्राधिकरण की प्रेरणा से है तो ऐसी कोर्इ मंजूरी अपेक्षित नहीं होगी।
स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए, "समुचित प्राधिकारी" का वही अर्थ है जो धारा 269पक के खंड (ग) में है।'
इससे पहले उपधारा (1) वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.4.1989 से प्रतिस्थापित की गर्इ थी। यह उपधारा कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.10.1975 से, आय-कर (दूसरा संशोधन) अधिनियम, 1981 द्वारा 11.7.1981 से, वित्त अधिनियम, 1982 द्वारा 1.4.1982 से और कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1984 द्वारा 1.4.1984 से भी संशोधित की गर्इ थी।
38. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.10.1975 से प्रतिस्थापित। मूल उपधारा आय-कर (संशोधन) अधिनियम, 1965 द्वारा 12.3.1965 से अंत:स्थापित की गर्इ थी।
39. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.10.1991 से प्रतिस्थापित। इससे पूर्व उपधारा (2), जो वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.4.1989 से प्रतिस्थापित की गर्इ थी, निम्न प्रकार थी :
"(2) इस अध्याय के अधीन किसी अपराध का प्रशमन या तो कार्यवाही चलाने के पहले या बाद में--
(क) बोर्ड या बोर्ड द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत मुख्य आयुक्त या महानिदेशक द्वारा, जहां अभियोजन आयुक्त (अपील) या समुचित प्राधिकारी की प्रेरणा से;
(ख) किसी अन्य मामले में, मुख्य आयुक्त या महानिदेशक या आयुक्त द्वारा,
किया जा सकेगा।"
40. आय-कर (संशोधन) अधिनियम, 1965 द्वारा 12.3.1965 से अंत:स्थापित।
41. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "खंड (क), (ख), (ग), (घ) और (ड़)" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
42. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.10.1975 से "धारा 271 की उपधारा (4क) के अधीन", के स्थान पर प्रतिस्थापित।
43. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.4.1962 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा संशोधित रूप में]

