आय की विवरणी देने में असफल रहना
38[आय की विवरणी देने में असफल रहना
276गग. यदि कोर्इ व्यक्ति 39[अनुषंगी फायदों की ऐसी विवरणी जिसके देने की उससे धारा 115बघ की उपधारा (1) या उक्त धारा की उपधारा (2) के अधीन या धारा 115बज के अधीन दी गर्इ सूचना द्वारा अपेक्षा की जाती है या] आय की ऐसी विवरणी जिसके देने की उससे धारा 139 की उपधारा (1) के अधीन अथवा 40[धारा 142 की उपधारा (1) के खंड (i)] या धारा 148 41[या धारा 153क] के अधीन दी गर्इ सूचना द्वारा अपेक्षा की जाती है, नियत समय के भीतर देने में जानबूझकर असफल रहेगा तो वह–
(i) ऐसे मामले में जहां कर की रकम, जिसकी यदि असफलता का पता नहीं चलता है42 तो अपवंचन हो जाता, 42क[पच्चीस] लाख रुपए से अधिक है, कठोर कारावास से, जिसकी अवधि छह मास से कम नहीं होगी किंतु सात वर्ष तक हो सकेगी, और जुर्माने से, दण्डनीय होगा।
(ii) किसी अन्य मामले में, कारावास से जिसकी अवधि तीन मास से कम नहीं होगी किंतु 42ख[दो] वर्ष तक हो सकेगी, और जुर्माने से, दण्डनीय होगा :
परन्तु 43[धारा 115बघ की उपधारा (1) के अधीन अनुषंगी फायदों की विवरणी या] धारा 139 की उपधारा (1) के अधीन आय की विवरणी नियत समय के भीतर देने में असफल रहने पर इस धारा के अधीन किसी व्यक्ति के विरुद्ध कोर्इ कार्यवाही–
(i) 1 अप्रैल, 1975 के पूर्व प्रारम्भ होने वाले किसी निर्धारण वर्ष के लिए नहीं होगी; या
(ii) 1 अप्रैल, 1975 को या उसके पश्चात् प्रारम्भ होने वाले किसी निर्धारण वर्ष के लिए यदि–
(क) वह निर्धारण वर्ष की समाप्ति से पूर्व विवरणी दे देता है; या
(ख) नियमित निर्धारण पर अवधारित कुल आय पर उसके द्वारा संदेय कर जिसमें से संदाय किए गए अग्रिम कर, यदि कोर्इ हो, और स्रोत पर कटौती किए गए कर को घटाने पर तीन हजार रुपए से अधिक नहीं है।]
38. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.10.1975 से अंत:स्थापित।
39. वित्त अधिनियम, 2005 द्वारा 1.4.2006 से अंत:स्थापित।
40. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से "धारा 139 की उपधारा (2)" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
41. वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.6.2003 से अंत:स्थापित।
42. ‘‘यदि असफलता का पता नहीं चलता है’’ पद के अर्थ के लिए सम्बंधित केस लाज़ देखिए।
42क. वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.7.2012 से "एक" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
42ख. वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.7.2012 से "तीन" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
43. वित्त अधिनियम, 2005 द्वारा 1.4.2006 से अंत:स्थापित।
[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2014 द्वारा संशोधित रूप में]

