प्रक्रिया
प्रक्रिया
274. (1) इस अध्याय के अधीन शास्ति अधिरोपित करने वाला कोर्इ आदेश तब तक नहीं किया जाएगा जब तक निर्धारिती की सुनवार्इ न हो जाए या उसे सुने जाने का युक्तियुक्त अवसर न दे दिया गया हो।
87[(2) इस अध्याय के अधीन शास्ति अधिरोपित करने वाला कोर्इ आदेश--
(क) जहां शास्ति दस हजार रुपए से अधिक है, वहां आय-कर अधिकारी द्वारा,
(ख) जहां शास्ति बीस हजार रुपए से अधिक है, वहां सहायक आयुक्त 88[या उपायुक्त] द्वारा 89[संयुक्त] आयुक्त के पूर्व अनुमोदन से ही किया जाएगा, अन्यथा नहीं।]
90[(3) आय-कर प्राधिकारी इस अध्याय के अधीन शास्ति अधिरोपित करने वाला आदेश किए जाने पर उसकी एक प्रति तत्काल निर्धारण अधिकारी को भेजेगा, जब तक कि वह स्वयं निर्धारण अधिकारी न हो।]
87. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से अंत:स्थापित। मूल उपधारा (2) कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1971 से संशोधित की गर्इ थी और कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.4.1975 से उसका लोप कर दिया गया था।
88. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.10.1998 से अंत:स्थापित।
89. यथोक्त द्वारा, "उप" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
90. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व उपधारा (3) वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1977 द्वारा 10.7.1978 से प्रतिस्थापित की गर्इ थी और यह इस प्रकार थी :
"(3) उपायुक्त (अपील) या आयुक्त (अपील), इस अध्याय के अधीन शास्ति अधिरोपित करने वाला आदेश करने पर उसकी एक प्रति तुरंत निर्धारण अधिकारी को भेजेगा।"
[वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा संशोधित रूप में]

