आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 273

अग्रिम कर का मिथ्या प्राक्कलन या उसके संदाय में असफलता

धारा

धारा संख्या

273

अध्याय शीर्षक

अध्याय XXI - शास्तियां दंड

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2000

अग्रिम कर का मिथ्या प्राक्कलन या उसके संदाय में असफलता

अग्रिम कर का मिथ्या प्राक्कलन या उसके संदाय में असफलता

33[अग्रिम कर का मिथ्या प्राक्कलन या उसके संदाय में असफलता

273. 34[(1) यदि 34क[निर्धारण] अधिकारी का किसी निर्धारण वर्ष के लिए 35नियमित निर्धारण से संबंधित कार्यवाहियों के दौरान यह समाधान हो जाता है, कि--

() किसी निर्धारिती ने अपने द्वारा संदेय अग्रिम कर की धारा 209क की उपधारा (1) के खंड () के अधीन ऐसा कथन (विवरण) दिया है, जिसके बारे में वह जानता था या उसके पास यह विश्वास करने का कारण था कि वह मिथ्या है, अथवा

() कोर्इ निर्धारिती अपने द्वारा संदेय अग्रिम कर की धारा 209क का उपधारा (1) के खंड () के उपबंधों के अनुसार कथन देने में 36[* * *] असफल रहा है,

तो यह निदेश दे सकेगा कि वह व्यक्ति अपने द्वारा संदेय कर राशि के अतिरिक्त, यदि कोर्इ हो, शास्ति के रूप में ऐसी राशि का संदाय करेगा–

(i) जो खंड () निर्दिष्ट दशा में, उतनी रकम जो दस प्रतिशत कम किंतु डेढ़ गुने से अधिक न होगी और जितनी से निर्धारण वर्ष के ठीक पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष के दौरान अध्याय 17ग के उपबंधों के अधीन वस्तुत: संदत्त कर, निम्नलिखित में से जो भी कम हो, उससे कम है अर्थात्:--

(1) धारा 215 की उपधारा (5) में परिभाषित निर्धारित कर का पचहत्तर प्रतिशत, अथवा

(2) वह रकम, जो अग्रिम कर के रूप में संदेय होती यदि निर्धारिती ने धारा 209क की उपधारा (1) के खंड () के उपबंधों के अनुसार सही और पूर्ण विवरण दिया होता,

(ii) जो, खंड () में निर्दिष्ट दशा में धारा 215 की उपधारा (5) में यथा परिभाषित निर्धारित कर के पचहत्तर प्रतिशत के दस प्रतिशत से कम किंतु डेढ़ गुने से अधिक न होगी:]

37[परन्तु ऐसे निर्धारिती की दशा में जो कंपनी है, इस उपधारा के उपबंध इस प्रकार प्रभावी होंगे मानो "पचहत्तर प्रतिशत" शब्दों के स्थान पर, दोनों स्थानों पर जहां-जहां वे आते हैं, "तिरासी सही एक बटा तीन प्रतिशत" शब्द रखे गए हों।]

38[(2)] यदि 1 अप्रैल, 1970 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष के लिए या किसी पश्चात्वर्ती निर्धारण वर्ष के लिए नियमित निर्धारण से संबंधित किन्हीं कार्यवाहियों के दौरान 39[निर्धारण] अधिकारी का यह समाधान हो जाता है कि--

40[() किसी निर्धारिती ने अपने द्वारा संदेय अग्रिम कर की धारा 209क की उपधारा (1) या उपधारा (2) या उपधारा (3) या उपधारा (5) के अधीन या धारा 212 की उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन ऐसा प्राक्कलन दिया है जिसके बारे में वह जानता था या उसके पास यह विश्वास करने का कारण था कि वह असत्य है, अथवा]

41[(कक) किसी निर्धारिती ने 42[अपने द्वारा संदेय अग्रिम कर का धारा 209क की उपधारा (4) के अधीन] या धारा 212 की उपधारा (3क) के अधीन ऐसा प्राक्कलन दिया जिसके बारे में वह जानता था या उसके पास यह विश्वास करने का कारण था कि वह असत्य है, अथवा]

() कोर्इ निर्धारिती अपने द्वारा संदेय अग्रिम कर का 43[धारा 209क की उपधारा (1) के खण्ड ()] के उपबंधों के अनुसार प्राक्कलन देने में 44[* * *] असफल रहा है, अथवा

() कोर्इ निर्धारिती अपने द्वारा संदेय अग्रिम कर का 45[धारा 209क की उपधारा (4) या] धारा 212 की उपधारा (3क) के उपबंधों के अनुसार प्राक्कलन देने में 46[* * *] असफल रहा है,

तो वह निदेश दे सकेगा कि वह व्यक्ति अपने द्वारा संदेय कर की रकम के, यदि कोर्इ हो, अतिरिक्त शास्ति के रूप में ऐसी राशि का संदाय करेगा--

(i) जो खण्ड (क) में उल्लिखित दशा में, उतनी रकम के दस प्रतिशत से कम और ड्योढ़े से अधिक न होगी, जितनी से निर्धारण वर्ष के ठीक पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष के दौरान अध्याय 17ग के उपबंधों के अधीन वस्तुत: कर का संदाय किया गया निम्नलिखित में से जो भी कम हो उससे कम है, अर्थात्--

(1) धारा 215 की उपधारा (5) में परिभाषित निर्धारित कर का पचहत्तर प्रतिशत, अथवा

47[(2) जहां निर्धारिती द्वारा धारा 209क की उपधारा (1) के खंड () के अधीन कथन दिया गया था या जहां निर्धारिती को धारा 210 के अधीन सूचना दी गर्इ थी, वहां, यथास्थिति, ऐसे कथन या सूचना के अधीन संदेय रकम।]

48[(iक) खंड (कक) में उल्लिखित दशा में, उतनी रकम, के दस प्रतिशत से कम किन्तु ड्योढ़े से अधिक न होगी जितनी से निर्धारण वर्ष के ठीक पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष के दौरान अध्याय 17ग के उपबंधों के अधीन वस्तुत: कर का संदाय किया गया धारा 215 की उपधारा (5) में परिभषित निर्धारित कर के पचहत्तर प्रतिशत से कम है;]

(ii) जो खंड () में निर्दिष्ट दशा में धारा 215 की उपधारा (5) में परिभाषित निर्धारित कर के पचहत्तर प्रतिशत के दस प्रतिशत से कम और डेढ़ गुने से अधिक न होगी; तथा

49[(iii) जो खंड () में उल्लिखित दशा में उतनी रकम के दस प्रतिशत से कम किंतु डेढ़ गुने से अधिक न होगी जितनी से--

() जहां निर्धारिती ने धारा 209क की उपधारा (1) के खण्ड () के अधीन कोर्इ कथन या खंड (ख), जो भी हो, के अधीन कोर्इ प्राक्कलन या उस धारा की उपधारा (2) के अधीन कथन के बदले में कोर्इ प्राक्कलन भेजा है, वहां ऐसे कथन या प्राक्कलन के अनुसार संदेय कर; या

() जहां निर्धारिती के लिए धारा 210 के अधीन उसे जारी किए गए नोटिस के अनुसार अग्रिम कर का संदाय करना अपेक्षित था, वहां ऐसी सूचना के अधीन संदेय कर

धारा 215 की उपधारा (5) में यथा परिभाषित निर्धारित कर के पचहत्तर प्रतिशत से कम है] :

50[परन्तु ऐसे निर्धारिती की दशा में जो कंपनी है, इस उपधारा के उपबंध इस प्रकार प्रभावी होंगे मानो "पचहत्तर प्रतिशत" शब्दों के स्थान पर, जहां भी वे आते हों, "तिरासी सही एक बटा तीन प्रतिशत" शब्द प्रतिस्थापित किए गए हों।]

51[स्पष्टीकरण 52[1].–खंड (iक) के प्रयोजनों के लिए 53[मुख्य आयुक्त या आयुक्त] द्वारा 54[यथास्थिति धारा 209क] की उपधारा (4) के 55[प्रथम] परन्तुक या धारा 212 की उपधारा (3क) के 55[प्रथम] परन्तुक के अधीन विस्तारित तारीख जहां इस प्रकार विस्तरित तारीख निर्धारण वर्ष के ठीक पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष से आगे है; वहां भी यह समझा जाएगा कि उस वित्तीय वर्ष के दौरान वास्तव में कर का संदाय कर दिया गया।]

56[स्पष्टीकरण 2.–जहां शास्ति के लिए दायी व्यक्ति कोर्इ ऐसी रजिस्टर्ड फर्म या अरजिस्टर्ड फर्म है जिसका धारा 183 के खंड () के अधीन निर्धारण किया गया है, वहां इस अधिनियम के अन्य उपबंधों में दी गर्इ किसी बात के होते हुए भी, इस धारा के अधीन अधिरोपणीय शास्ति वह रकम होगी जो उस फर्म पर इस प्रकार अधिरोपणीय होगी मानो वह फर्म अरजिस्टर्ड फर्म हो।]

57[(3) इस धारा के उपबंध 1 अप्रैल, 1988 को प्रारम्भ होने वाले निर्धारण वर्ष या किसी पूर्वतर निर्धारण वर्ष के किसी निर्धारण को और उसके संबंध में लागू होंगे, तथा इस धारा में इस अधिनियम के अन्य उपबंधों के प्रति निर्देशों का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वे उस समय प्रवृत्त और सुसंगत निर्धारण वर्ष को लागू उपबंधों के प्रति निर्देश हैं।]

 

33. वित्त अधिनियम, 1969 द्वारा 1.4.1970 से प्रतिस्थापित।

34. वित्त अधिनियम, 1978 द्वारा 1.6.1978 से अंत:स्थापित।

34क. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से आय-कर के स्थान पर प्रतिस्थापित।

35. "नियमित निर्धारण" पद के अर्थ के लिए, देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.

36. ", युक्तियुक्त कारण के बिना" शब्दों का कराधान विधि (संशोधन और प्रकीर्ण उपबंध) अधिनियम, 1986 द्वारा 10.9.986 से लोप किया गया।

37. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1980 द्वारा 1.9.1980 से अंत:स्थापित।

38. वित्त अधिनियम, 1978 द्वारा 1.6.1978 से अंत:स्थापित।

39. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आय-कर" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

40. वित्त अधिनियम, 1978 द्वारा 1.6.1978 से प्रतिस्थापित। इससे पूर्व खंड () वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1977 द्वारा 1.4.1977 से संशोधित किया गया था।

41. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1977 द्वारा 1.9.1977 से अंत:स्थापित।

42. वित्त अधिनियम, 1978 द्वारा 1.6.1978 से अंत:स्थापित।

43. वित्त अधिनियम, 1978 द्वारा 1.6.1978 से "धारा 212 की उपधारा (3)" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

44. कराधान विधि (संशोधन और प्रकीर्ण उपबंध) अधिनियम, 1986 द्वारा 10.9.1986 से ", युक्तियुक्त कारण के बिना" शब्दों का लोप किया गया।

45. वित्त अधिनियम, 1978 द्वारा 1.6.1978 से अंत:स्थापित।

46. कराधान विधि (संशोधन और प्रकीर्ण उपबंध) अधिनियम, 1986 द्वारा 10.9.1986 से "युक्तियुक्त कारण के बिना" शब्दों का लोप किया गया।

47. वित्त अधिनियम 1978 द्वारा 1.6.1978 से प्रतिस्थापित।

48. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1977 द्वारा 1.9.1977 से अंत:स्थापित।

49. वित्त अधिनियम, 1978 द्वारा 1.6.1978 से प्रतिस्थापित।

50. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1980 द्वारा 1.9.1980 से अंत:स्थापित।

51. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1977 द्वारा 1.9.1977 से अंत:स्थापित।

52. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1984 द्वारा 1.4.1985 से स्पष्टीकरण 1 के रूप में संख्यांकित।

53. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आयुक्त" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

54. वित्त अधिनियम, 1978 द्वारा 1.6.1978 से अंत:स्थापित।

55. वित्त अधिनियम, 1981 द्वारा 1.4.1981 से अंत:स्थापित।

56. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1984 द्वारा 1.4.1985 से अंत:स्थापित।

57. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से अंत:स्थापित।

 

 

[वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा संशोधित रूप में]

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