प्रश्नों का उत्तर देने, कथन पर हस्ताक्षर करने, जानकारी, विवरणियां या कथन देने, निरीक्षण की अनुज्ञा देने आदि में असफलता के लिए शास्त
17[प्रश्नों का उत्तर देने, कथन पर हस्ताक्षर करने, जानकारी, विवरणियां या कथन देने, निरीक्षण की अनुज्ञा देने आदि में असफलता के लिए शास्ति
272क. (1) यदि कोर्इ व्यक्ति,–
(क) जो अपने निर्धारण के किसी विषय से संबंधित किसी मामले का सत्य कथन करने के लिए वैध रूप से आबद्ध है, किसी आय-कर प्राधिकारी द्वारा इस अधिनियम के अधीन अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए, अपने से पूछे गए किसी प्रश्न का उत्तर देने से इनकार करता है; या
(ख) इस अधिनियम के अधीन किसी कार्यवाही के दौरान अपने द्वारा किए गए किसी ऐसे कथन पर हस्ताक्षर करने से इन्कार करता है जिसकी कोर्इ आय-कर प्राधिकारी उससे वैध रूप से हस्ताक्षर करने की अपेक्षा करे; या
(ग) जिसको धारा 131 की उपधारा (1) के अधीन कोर्इ समन, किसी निश्चित स्थान और समय पर साक्ष्य देने के लिए हाजिर होने के लिए अथवा कोर्इ लेखा बहियां या अन्य दस्तावेजें पेश करने के लिए जारी किया गया है, उस स्थान या समय पर हाजिर होने अथवा लेखा बहियें या दस्तावेजें पेश करने में लोप करता है; या
(घ) 18[***]
तो वह शास्ति के रूप में ऐसे प्रत्येक व्यतिक्रम या ऐसी प्रत्येक असफलता के लिए 19[दस हजार रुपए की राशि का संदाय करेगा]।
(2) यदि कोर्इ व्यक्ति,–
(क) धारा 94 की उपधारा (6) के अधीन जारी की गर्इ सूचना का पालन करने में; या
(ख) धारा 176 की उपधारा (3) द्वारा अपेक्षित अपने कारबार या वृत्ति को बंद करने की सूचना देने में; या
(ग) धारा 133 या धारा 206 20[* * *] 21[या धारा 206ग] या धारा 285ख में उल्लिखित विवरणियां, कथन या विवरण सम्यक् समय के भीतर देने में; या
(घ) धारा 134 में निर्दिष्ट किसी रजिस्टर का या ऐसे रजिस्टर में किसी प्रविष्टि का निरीक्षण अनुज्ञात करने में अथवा ऐसे रजिस्टर या उसमें किसी प्रविष्टि की प्रतियाँ लेने के लिए अनुज्ञात करने में; या
22[(ड़) आय की ऐसी विवरणी देने में जिसे देने के लिए उससे धारा 139 की उपधारा (4क) या उपधारा (4ग) के अधीन अपेक्षा की जाती है, या उसे अनुज्ञात समय के भीतर और उन उपधाराओं के अधीन अपेक्षित रीति से देने में; या]
(च) धारा 197क में उल्लिखित घोषणा की प्रति का सम्यक् समय पर परिदान करने या कराने में; या
(छ) धारा 203 22क[या धारा 206ग] द्वारा यथा अपेक्षित प्रमाणपत्र देने में; या
(ज) धारा 226 की उपधारा (2) के अधीन अपेक्षित कर काटने और संदाय करने में;
23[(झ) धारा 192 की उपधारा (2ग) द्वारा यथा अपेक्षित विवरण देने में,]
24[(ञ ) धारा206ग की उपधारा (1क) में निर्दिष्ट घोषणा की एक प्रति सम्यक् समय पर परिदत्त करने में या परिदत्त कराने में;
25[(ट) धारा 200 की उपधारा (3) या धारा206ग की उपधारा (3) के परन्तुक में विनिर्दिष्ट समय के भीतर विवरणी की प्रति परिदत्त करने या परिदत्त कराने में,]
26[(ठ) धारा 206क की उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट समय के भीतर 26क[विवरणियां] परिदत्त करने या परिदत्त कराने में,]
असफल रहता है तो वह, शास्ति के रूप में 27[ऐसे प्रत्येक दिन के लिए जिसके दौरान असफलता जारी रहती है, एक सौ रुपए की राशि का संदाय करेगा] :
28[परन्तु 29[धारा 197क में वर्णित घोषणा, धारा 203 द्वारा अपेक्षित प्रमाणपत्र और] धारा 206 और धारा 206ग के अधीन विवरणी 30[और धारा 200 की उपधारा (3) या धारा 206ग की उपधारा (3) के परन्तुक के अधीन विवरणी] के संबंध में असफलता के लिए शास्ति की रकम, यथास्थिति, कटौती-योग्य या संग्रहणीय कर की रकम से अधिक नहीं होगी:]
30क[परंतु यह और कि खंड (ट) में निर्दिष्ट असफलता के लिए इस धारा के अधीन कोर्इ शास्ति उस दशा में उद्गृहीत की जाएगी, यदि ऐसी असफलता धारा200 की उपधारा (3) या धारा206ग की उपधारा (3) के परंतुक में निर्दिष्ट ऐसे विवरण के संबंध में है, जो 1 जुलार्इ, 2012 को या उसके पश्चात्, यथास्थिति, स्रोत पर काटे गए कर या स्रोत पर संगृहीत कर के लिए परिदत्त किया जाना है या परिदत्त कराया जाना है।]
(3) उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन अधिरोपणीय कोर्इ शास्ति,–
(क) ऐसी दशा में, जिसमें ऐसा उल्लंघन, असफलता या व्यतिक्रम, जिसकी बाबत ऐसी शास्ति अधिरोपणीय है, 31[संयुक्त] निदेशक या 31[संयुक्त] आयुक्त की पंक्ति से अन्यून पंक्ति के किसी आय-कर प्राधिकारी के समक्ष किसी कार्यवाही के दौरान होता है, ऐसे आय-कर प्राधिकारी द्वारा;
(ख) उपधारा (2) के खंड (च) के अंतर्गत आने वाली दशा में, मुख्य आयुक्त या आयुक्त द्वारा; और
(ग) किसी अन्य दशा में 31[संयुक्त] निदेशक या 31[संयुक्त] आयुक्त द्वारा अधिरोपित की जाएगी।
(4) इस धारा के अधीन कोर्इ भी आदेश उपधारा (3) में निर्दिष्ट किसी आय-कर प्राधिकारी द्वारा तब तक पारित नहीं किया जाएगा जब तक उस व्यक्ति को जिस पर शास्ति अधिरोपित की जानी प्रस्तावित है, ऐसे प्राधिकारी द्वारा उस मामले में सुनवार्इ का अवसर नहीं दे दिया जाता है।
स्पष्टीकरण.–इस धारा में "आय-कर प्राधिकारी" के अंतर्गत महानिदेशक, निदेशक, 32[संयुक्त] निदेशक और सहायक निदेशक 33[या उपनिदेशक] तब आएंगे, जब वे धारा 131 की उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट मामलों के बारे में किसी वाद का विचारण करते समय सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन, किसी न्यायालय में निहित शक्तियों का प्रयोग करते हैं।
17. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व धारा 272क कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.4.1976 से अंत:स्थापित की गर्इ थी और बाद में वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1977 द्वारा 10.7.1978 से, वित्त अधिनियम, 1982 द्वारा 1.6.1982 से, कराधान विधि (संशोधन और प्रकीर्ण उपबंध) अधिनियम, 1986 द्वारा 10.9.1986 से और वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.6.1987 से संशोधित की गर्इ थी।
18. वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.6.2002 से लोप किया गया। लोप से पूर्व खंड (घ) इस प्रकार था :
"(घ) धारा 139 के उपबंधों का पालन करने में असफल रहता है,"
19. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.6.2001 से "ऐसी राशि का संदाय करेगा, जो ऐसे प्रत्येक व्यतिक्रम या असफलता के लिये पांच सौ रुपए से कम की नहीं होगी किंतु जो दस हजार रुपए तक हो सकेगी" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
20. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1996 द्वारा 1.10.1996 से "या धारा 206क या धारा 206ख" शब्दों का लोप किया गया।
21. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.10.1991 से अंत:स्थापित।
22. वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.4.2003 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व, खंड (ड़) इस प्रकार था:
"(ड़) आय की ऐसी विवरणी देने में जिसे देने के लिए उससे धारा 139 की उपधारा (4क) के अधीन अपेक्षा की जाती है या उसे अनुज्ञात समय के भीतर और उस उपधारा के अधीन अपेक्षित रीति से देने में; या"
22क. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.10.1991 से अंत:स्थापित।
23. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2002 से अंत:स्थापित।
24. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 2003 द्वारा 8.9.2003 से अंत:स्थापित।
25. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2004 द्वारा 1.4.2005 से अंत:स्थापित।
26. वित्त अधिनियम, 2005 द्वारा 1.6.2005 से अंत:स्थापित।
26क. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा 1.10.2009 से "तिमाही विवरणी" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
27. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.6.1999 से "ऐसी राशि का संदाय करेगा, जो ऐसे प्रत्येक दिन के लिए जिसके दौरान असफलता जारी रहती है एक सौ रुपए से कम नहीं होगी किंतु जो दो सौ रुपए तक की हो सकेगी" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
28. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.10.1991 से अंत:स्थापित।
29. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.4.1999 से अंत:स्थापित।
30. वित्त अधिनियम, 2006 द्वारा 1.6.2006 से अंत:स्थापित।
30क. वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.7.2012 से अंत:स्थापित।
31. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.10.1998 से "उप" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
32. यथोक्त द्वारा प्रतिस्थापित।
33. यथोक्त द्वारा अंत:स्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा संशोधित रूप में]

