आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

मुख्य सामग्री पर जाने के लिए यहां क्लिक करें
शब्द आकार
सैचुरेशन
मदद

धारा 272क

प्रश्नों का उत्तर देने, कथन पर हस्ताक्षर करने, जानकारी, विवरणियां या कथन देने, निरीक्षण की अनुज्ञा देने आदि में असफलता के लिए शास्ति

धारा

धारा संख्या

272क

अध्याय शीर्षक

अध्याय XXI - शास्तियां दंड

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2022

प्रश्नों का उत्तर देने, कथन पर हस्ताक्षर करने, जानकारी, विवरणियां या कथन देने, निरीक्षण की अनुज्ञा देने आदि में असफलता के लिए शास्ति

प्रश्नों का उत्तर देने, कथन पर हस्ताक्षर करने, जानकारी, विवरणियां या कथन देने, निरीक्षण की अनुज्ञा देने आदि में असफलता के लिए शास्ति

प्रश्नों का उत्तर देने, कथन पर हस्ताक्षर करने, जानकारी, विवरणियां या कथन देने, निरीक्षण की अनुज्ञा देने आदि में असफलता के लिए शास्ति

272क. (1) यदि कोई व्यक्ति,–

() जो अपने निर्धारण के किसी विषय से संबंधित किसी मामले का सत्य कथन करने के लिए वैध रूप से आबद्ध है, किसी आय-कर प्राधिकारी द्वारा इस अधिनियम के अधीन अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए, अपने से पूछे गए किसी प्रश्न का उत्तर देने से इनकार करता है; या

() इस अधिनियम के अधीन किसी कार्यवाही के दौरान अपने द्वारा किए गए किसी ऐसे कथन पर हस्ताक्षर करने से इन्कार करता है जिसकी कोई आय-कर प्राधिकारी उससे वैध रूप से हस्ताक्षर करने की अपेक्षा करे; या

() जिसको धारा 131 की उपधारा (1) के अधीन कोई समन, किसी निश्चित स्थान और समय पर साक्ष्य देने के लिए हाजिर होने के लिए अथवा कोई लेखा बहियां या अन्य दस्तावेजें पेश करने के लिए जारी किया गया है, उस स्थान या समय पर हाजिर होने अथवा लेखा बहियें या दस्तावेजें पेश करने में लोप करेगा; या

() धारा 142 की उपधारा (1) या धारा 143 की उपधारा (2) के अधीन किसी सूचना का अनुपालन करने में असफल रहता है या धारा 142 की उपधारा (2क) के अधीन जारी किए गए किसी निदेश का अनुपालन करने में असफल रहता है,

तो वह शास्ति के रूप में ऐसे प्रत्येक व्यतिक्रम या ऐसी प्रत्येक असफलता के लिए दस हजार रुपए की राशि का संदाय करेगा।

(2) यदि कोई व्यक्ति,–

() धारा 94 की उपधारा (6) के अधीन जारी की गई सूचना का पालन करने में; या

() धारा 176 की उपधारा (3) द्वारा अपेक्षित अपने कारबार या वृत्ति को बंद करने की सूचना देने में; या

() धारा 133 या धारा 206 या धारा 206ग या धारा 285ख में उल्लिखित विवरणियां, कथन या विवरण सम्यक् समय के भीतर देने में; या

() धारा 134 में निर्दिष्ट किसी रजिस्टर का या ऐसे रजिस्टर में किसी प्रविष्टि का निरीक्षण अनुज्ञात करने में अथवा ऐसे रजिस्टर या उसमें किसी प्रविष्टि की प्रतियाँ लेने के लिए अनुज्ञात करने में; या

() आय की ऐसी विवरणी देने में जिसे देने के लिए उससे धारा 139 की उपधारा (4क) या उपधारा (4ग) के अधीन अपेक्षा की जाती है, या उसे अनुज्ञात समय के भीतर और उन उपधाराओं के अधीन अपेक्षित रीति से देने में; या

() धारा 197क में उल्लिखित घोषणा की प्रति का सम्यक् समय पर परिदान करने या कराने में; या

() धारा 203 या धारा 206ग द्वारा यथा अपेक्षित प्रमाणपत्र देने में; या

() धारा 226 की उपधारा (2) के अधीन अपेक्षित कर काटने और संदाय करने में;

() धारा 192 की उपधारा (2ग) द्वारा यथा अपेक्षित विवरण देने में,

() धारा 206ग की उपधारा (1क) में निर्दिष्ट घोषणा की एक प्रति सम्यक् समय पर परिदत्त करने में या परिदत्त कराने में;

() धारा 200 की उपधारा (3) या धारा 206ग की उपधारा (3) के परन्तुक में विनिर्दिष्ट समय के भीतर विवरणी की प्रति परिदत्त करने या परिदत्त कराने में,

() धारा 206क की उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट समय के भीतर विवरणियां परिदत्त करने या परिदत्त कराने में,

(ड़) कोई विवरण ऐसे समय के भीतर जो धारा 200 की उपधारा (2क) या धारा 206ग की उपधारा (3क) में विहित किया जाए, परिदत्त करने या कराने में,

असफल रहता है तो वह, शास्ति के रूप में ऐसे प्रत्येक दिन के लिए जिसके दौरान असफलता जारी रहती है, 1[पांच सौ रुपए] की राशि का संदाय करेगा :

परन्तु धारा 197क में वर्णित घोषणा, धारा 203 द्वारा अपेक्षित प्रमाणपत्र और धारा 206 और धारा 206ग के अधीन विवरणी और धारा 200 की उपधारा (2क) या उपधारा (3) या धारा 206ग की उपधारा (3) के परन्तुक या उपधारा (3क) के अधीन विवरणो के संबंध में असफलता के लिए शास्ति की रकम, यथास्थिति, कटौती-योग्य या संग्रहणीय कर की रकम से अधिक नहीं होगी:

परंतु यह और कि खंड () में निर्दिष्ट असफलता के लिए इस धारा के अधीन कोई शास्ति उस दशा में उद्गृहीत की जाएगी, यदि ऐसी असफलता धारा 200 की उपधारा (3) या धारा 206ग की उपधारा (3) के परंतुक में निर्दिष्ट ऐसे विवरण के संबंध में है, जो 1 जुलाई, 2012 को या उसके पश्चात्, यथास्थिति, स्रोत पर काटे गए कर या स्रोत पर संगृहीत कर के लिए परिदत्त किया जाना है या परिदत्त कराया जाना है।

(3) उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन अधिरोपणीय कोई शास्ति,–

() ऐसी दशा में, जिसमें ऐसा उल्लंघन, असफलता या व्यतिक्रम, जिसकी बाबत ऐसी शास्ति अधिरोपणीय है, संयुक्त निदेशक या संयुक्त आयुक्त की पंक्ति से अन्यून पंक्ति के किसी आय-कर प्राधिकारी के समक्ष किसी कार्यवाही के दौरान होता है, ऐसे आय-कर प्राधिकारी द्वारा;

(कक) उपधारा (1) के खंड () के अधीन आने वाले मामले की दशा में, आय-कर प्राधिकारी द्वारा जिसने उसमें निर्दिष्ट सूचना या निदेश जारी किया था;

() उपधारा (2) के खंड () के अंतर्गत आने वाली दशा में, प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा; और

() किसी अन्य दशा में संयुक्त निदेशक या संयुक्त आयुक्त द्वारा अधिरोपित की जाएगी।

(4) इस धारा के अधीन कोई भी आदेश उपधारा (3) में निर्दिष्ट किसी आय-कर प्राधिकारी द्वारा तब तक पारित नहीं किया जाएगा जब तक उस व्यक्ति को जिस पर शास्ति अधिरोपित की जानी प्रस्तावित है, ऐसे प्राधिकारी द्वारा उस मामले में सुनवाई का अवसर नहीं दे दिया जाता है।

स्पष्टीकरण.–इस धारा में ''आय-कर प्राधिकारी'' के अंतर्गत प्रधान महानिदेशक या महानिदेशक, प्रधान निदेशक या निदेशक, संयुक्त निदेशक और सहायक निदेशक या उपनिदेशक तब आएंगे, जब वे धारा 131 की उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट मामलों के बारे में किसी वाद का विचारण करते समय सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन, किसी न्यायालय में निहित शक्तियों का प्रयोग करते हैं।

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2022 द्वारा संशोधित रूप में]

फ़ुटनोट