स्रोत पर कर की कटौती करने में असफलता के लिए शास्ति
98[ स्रोत पर कर की कटौती करने में असफलता के लिए शास्ति
271ग. 99[(1) यदि कोर्इ व्यक्ति–
(क) अध्याय 17ख के उपबंधों द्वारा या उनके अधीन यथा अपेक्षित संपूर्ण कर या उसके किसी भाग की कटौती करने में; या
(ख) (i) धारा 115ण की उपधारा (2); या
(ii) धारा 194ख के दूसरे परन्तुक,
द्वारा या के अधीन यथा अपेक्षित संपूर्ण कर या उसके किसी भाग का संदाय करने में, असफल रहता है, तो ऐसा व्यक्ति, शास्ति के रूप में उतनी कर राशि के बराबर राशि जो ऐसा व्यक्ति उपरोक्त रूप में संदाय करने या काटने में असफल रहा संदाय करने का दायी होगा।
1[(2) उपधारा (1) के अधीन अधिरोपणीय कोर्इ शास्ति 2[संयुक्त] आयुक्त द्वारा अधिरोपित की जाएगी।]
98. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से अंत:स्थापित।
99. वित्त अधिनियम, 1997 द्वारा 1.6.1997 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व उपधारा (1), जो प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से अंत:स्थापित की गर्इ थी और वित्त अधिनियम, 1990 द्वारा 1.4.1990 से संशोधित की गर्इ थी, इस प्रकार थी :
"(1) यदि कोर्इ व्यक्ति अध्याय 17ख के उपबंधों के द्वारा या के अधीन यथा अपेक्षित संपूर्ण कर या उसका कोर्इ भाग काटने में असफल रहता है, तो वह शास्ति के रूप में उतनी कर राशि के बराबर राशि का, जितनी वह पूर्वोक्त रूप में कटौती करने में असफल रहा था, संदाय करने का दायी होगा।"
1. वित्त अधिनियम, 1990 द्वारा 1.4.1990 से अंत:स्थापित।
2. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.10.1998 से "उप" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा संशोधित रूप में]

