आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 271ककख

जहां तलाशी आरंभ की गर्इ है, वहां शास्ति

धारा

धारा संख्या

271ककख

अध्याय शीर्षक

अध्याय XXI - शास्तियां दंड

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2012

जहां तलाशी आरंभ की गर्इ है, वहां शास्ति

जहां तलाशी आरंभ की गर्इ है, वहां शास्ति

89ख[जहां तलाशी आरंभ की गर्इ है, वहां शास्ति

271ककख. (1) निर्धारण अधिकारी, इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंधों में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, यह निदेश दे सकेगा कि ऐसे किसी मामले में, जहां तलाशी 1 जुलार्इ, 2012 को या उसके पश्चात् धारा 132 के अधीन आरंभ की गर्इ है, वहां निर्धारिती उसके द्वारा संदेय कर के अतिरिक्त, यदि कोर्इ हो, शास्ति के रूप में निम्नलिखित का संदाय करेगा,–

(क) विनिर्दिष्ट पूर्ववर्ष की अप्रकटित आय के दस प्रतिशत की दर से संगणित कोर्इ राशि, यदि ऐसा निर्धारिती–

(i) तलाशी के अनुक्रम में, धारा 132 की उपधारा (4) के अधीन विवरण में अप्रकटित आय को स्वीकार करता है और वह रीति विनिर्दिष्ट करता है, जिसमें ऐसी आय व्युत्पन्न हुर्इ है;

(ii) उस रीति का प्रमाण देता है, जिसमें अप्रकटित आय व्युत्पन्न हुर्इ थी; और

(iii) विनिर्दिष्ट तारीख को या उसके पूर्व,–

(ए) अप्रकटित आय की बाबत ब्याज, यदि कोर्इ हो, के साथ कर का संदाय करता है;

(बी) विनिर्दिष्ट पूर्ववर्ष से संबंधित आय की विवरणी, उसमें ऐसी अप्रकटित आय की घोषणा करते हुए प्रस्तुत करता है;

(ख) विनिर्दिष्ट पूर्ववर्ष की अप्रकटित आय के बीस प्रतिशत की दर से संगणित कोर्इ राशि, यदि ऐसा निर्धारिती–

(i) तलाशी के अनुक्रम में, धारा 132 की उपधारा (4) के अधीन विवरण में अप्रकटित आय को स्वीकार नहीं करता है; और

(ii) विनिर्दिष्ट तारीख को या उसके पूर्व,–

(ए) विनिर्दिष्ट पूर्ववर्ष के लिए प्रस्तुत की गर्इ आय की विवरणी में ऐसी आय की घोषणा करता है; और

(बी) अप्रकटित आय की बाबत ब्याज, यदि कोर्इ हो, के साथ कर का संदाय करता है;

(ग) ऐसी राशि का, जो विनिर्दिष्ट पूर्ववर्ष की अप्रकटित आय के तीस प्रतिशत से कम नहीं होगी, किंतु नब्बे प्रतिशत से अधिक नहीं होगी, यदि वह खंड (क) और खंड (ख) के उपबंधों के अंतर्गत नहीं आती है।

(2) धारा271 की उपधारा (1) के खंड (ग) के उपबंधों के अधीन कोर्इ शास्ति, निर्धारिती पर, उपधारा (1) में निर्दिष्ट अप्रकटित आय की बाबत अधिरोपित नहीं की जाएगी।

(3) धारा274 और धारा275 के उपबंध, जहां तक हो सके, इस धारा में निर्दिष्ट शास्ति के संबंध में लागू होंगे।

स्पष्टीकरण–इस धारा के प्रयोजनों के लिए,–

(क) "विनिर्दिष्ट तारीख" से, यथास्थिति, धारा139 की उपधारा (1) के अधीन आय की विवरणी प्रस्तुत करने की नियत तारीख या वह तारीख, जिसको आय की विवरणी प्रस्तुत करने के लिए धारा153 क के अधीन सूचना में विनिर्दिष्ट अवधि समाप्त होती है, अभिप्रेत है;

(ख) "विनिर्दिष्ट पूर्ववर्ष" से वह पूर्ववर्ष अभिप्रेत है,–

(i) जो तलाशी की तारीख से पूर्व समाप्त हो गया है किंतु उस वर्ष के लिए धारा139 की उपधारा (1) के अधीन आय की विवरणी प्रस्तुत करने की तारीख तलाशी की तारीख से पूर्व समाप्त नहीं हुर्इ है और निर्धारिती ने उक्त तलाशी की तारीख से पूर्व पूर्ववर्ष के लिए आय की विवरणी नहीं दी है; या

(ii) जिसमें तलाशी ली गर्इ थी;

(ग) "अप्रकटित आय" से अभिप्रेत है,–

(i) कोर्इ धन, सोना-चांदी, आभूषण या अन्य मूल्यवान् वस्तु या चीज या लेखाबहियों में किसी प्रविष्टि या अन्य दस्तावेजों या संव्यवहारों से, जो धारा 132 के अधीन तलाशी के अनुक्रम में पाए जाते हैं, पूर्णत: या भागत: प्रदर्शित विनिर्दिष्ट पूर्ववर्ष की कोर्इ आय, जिसे,–

(ए) तलाशी की तारीख को या उससे पूर्व एसे पूर्ववर्ष के संबंध में सामान्य अनुक्रम में रखी गर्इ लेखाबहियों या अन्य दस्तावेजों में अभिलिखित नहीं किया गया है; या

(बी) तलाशी की तारीख से पूर्व मुख्य आयुक्त या आयुक्त को अन्यथा प्रकट नहीं किया गया है; या

(ii) विनिर्दिष्ट पूर्ववर्ष के संबंध में, सामान्य अनुक्रम में रखी गर्इ लेखाबहियों या अन्य दस्तावेजों में अभिलिखित किसी व्यय की बाबत किसी प्रविष्टि द्वारा पूर्णत: या भागत: प्रदर्शित विनिर्दिष्ट पूर्ववर्ष की कोर्इ आय, जिसे मिथ्या पाया जाता है और इस प्रकार नहीं पाया जाता यदि तलाशी न ली गर्इ होती।]

 

89ख. वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.7.2012 से अंत:स्थापित।

 

 

[वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा संशोधित रूप में]

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