शास्ति आदि के अधिरोपण से उन्मुक्ति
वित्त अधिनियम, 2016 द्वारा 1.6.2017 से नर्इ अंत:स्थापित धारा 270क के पश्चात्, निम्नलिखित धारा 270कक अंत:स्थापित की जाएगी :
शास्ति आदि के अधिरोपण से उन्मुक्ति
270कक. (1) कोर्इ निर्धारिती धारा 270क के अधीन शास्ति के अधिरोपण और धारा 276ग या धारा 276गग के अधीन कार्यवाहियों के आरंभ किए जाने से उन्मुक्ति अनुदत्त करने के लिए निर्धारण अधिकारी को आवेदन कर सकेगा, यदि वह निम्नलिखित शर्तों को पूरा करता है,-
(क) यथास्थिति, धारा 143 की उपधारा (3) या धारा 147 के अधीन निर्धारण या पुन: निर्धारण के अनुसार संदेय कर और ब्याज का ऐसी मांग की सूचना में विनिर्दिष्ट समय के भीतर संदाय कर दिया गया है; और
(ख) उपधारा (1) में निर्दिष्ट आदेश के विरुद्ध कोर्इ अपील फाइल नहीं की गर्इ है ।
(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट कोर्इ अपील उस मास की समाप्ति से एक मास के भीतर की जाएगी जिसमें उपधारा (1) के खंड (क) में निर्दिष्ट आदेश प्राप्त किया गया था और आवेदन ऐसे प्ररूप में किया जाएगा तथा ऐसी रीति में सत्यापित किया जाएगा, जो विहित की जाए ।
(3) निर्धारण अधिकारी, उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट शर्तों को पूरा करने के अधीन रहते हुए और धारा 249 की उपधारा (2) के खंड (ख) में यथाविनिर्दिष्ट, अपील फाइल करने की अवधि के अवसान के पश्चात् धारा 270क के अधीन शास्ति के अधिरोपण और कार्यवाहियों के आरंभ करने से धारा 276ग या धारा 276गग के अधीन उन्मुक्ति वहां अनुदत्त करेगा, जहां शास्ति की कार्यवाहियां उक्त धारा 270क की उपधारा (9) के अधीन संस्थित न की गर्इ हो।
(4) निर्धारण अधिकारी उस मास की समाप्ति से जिसमें उपधारा (1) के अधीन आवेदन प्राप्त किया गया था, एक मास की अवधि के भीतर ऐसे आवेदन को स्वीकार या अस्वीकार करने का आदेश पारित करेगा :
परंतु आवेदन को अस्वीकार करने का कोर्इ आदेश निर्धारिती को सुने जाने का अवसर प्रदान किए बिना, पारित नहीं किया जाएगा ।
(5) उपधारा (4) के अधीन किया गया आदेश अंतिम होगा।
(6) उन मामलों में, जहां उपधारा (4) के अधीन कोर्इ आदेश आवेदन को स्वीकार करने के लिए किया गया है, वहां धारा 264 के अधीन कोर्इ अपील या धारा 264 के अधीन पुनरीक्षण के लिए कोर्इ आवेदन उपधारा (1) के खंड (क) में निर्दिष्ट निर्धारण या पुनर्निर्धारण के आदेश के विरुद्ध ग्राह्य नहीं होगा ।
[वित्त अधिनियम, 2016 द्वारा संशोधित रूप में]

