आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 270क

आय की कम रिपोर्ट करने और मिथ्या रिपोर्ट करने के लिए शास्ति

धारा

धारा संख्या

270क

अध्याय शीर्षक

अध्याय XXI - शास्तियां दंड

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2019 (सं.2)

आय की कम रिपोर्ट करने और मिथ्या रिपोर्ट करने के लिए शास्ति

आय की कम रिपोर्ट करने और मिथ्या रिपोर्ट करने के लिए शास्ति

आय की कम रिपोर्ट करने और मिथ्या रिपोर्ट करने के लिए शास्ति

270क. (1) निर्धारण अधिकारी या आयुक्त (अपील) या प्रधान आयुक्त या आयुक्त इस अधिनियम के अधीन किन्हीं कार्यवाहियों के दौरान यह निदेश दे सकेगा कि ऐसा कोर्इ व्यक्ति, जिसने अपनी आय की न्यून रिपोर्ट की है, कम रिपोर्ट की गर्इ आय पर, कर के लिए अतिरिक्त शास्ति, यदि कोर्इ हो, का संदाय करने का दायी होगा।

(2) किसी व्यक्ति के बारे में उसकी आय को कम रिपोर्ट किया गया तब समझा जाएगा जब—

() निर्धारित की गर्इ आय धारा 143 की उपधारा (1) के खंड () के अधीन प्रक्रियागत विवरणी में अवधारित आय से अधिक है;

() निर्धारित आय वहां, उस अधिकतम रकम से, जो कर से प्रभार्य नहीं है, 38घ[जहां आय की विवरणी प्रस्तुत नहीं की गर्इ है या जहां धारा 148 के अधीन पहली बार विवरणी प्रस्तुत की गर्इ है] से अधिक है;

() पुनर्निर्धारित की गर्इ आय से ऐसे पुन: निर्धारण से ठीक पूर्व निर्धारित या पुनर्निर्धारित आय से अधिक है;

() यथास्थिति, धारा 115ञख या धारा 115ञग के उपबंधों के अनुसार निर्धारित या पुनर्निर्धारित समझी गर्इ कुल आय की रकम, धारा 143 की उपधारा (1) के खंड () के अधीन प्रक्रियागत विवरणी में अवधारित समझी गर्इ कुल आय से अधिक है;

() धारा 115ञख या धारा 115ञग के उपबंधों के अनुसार निर्धारित समझी गर्इ कुल आय की रकम, वहां उस अधिकतम रकम से, जो कर से प्रभार्य नहीं है, 38ड़[जहां आय की कोर्इ विवरणी प्रस्तुत नहीं की गर्इ है या जहां धारा 148 के अधीन पहली बार विवरणी प्रस्तुत की गर्इ है], अधिक है;

() यथास्थिति, धारा 115ञख या धारा 115ञग के उपबंधों के अनुसार पुनर्निर्धारित समझी गर्इ कुल आय की रकम, ऐसे पुनर्निर्धारण के ठीक पूर्व निर्धारित या पुनर्निर्धारित समझी गर्इ कुल आय से अधिक है;

() निर्धारित या पुनर्निर्धारित आय का प्रभाव हानि कम करने या ऐसी हानि को आय में संपरिवर्तित करने का है।

(3) कम रिपोर्ट की गर्इ आय की रकम,—

(i) उस दशा में जहां आय का निर्धारण पहली बार किया गया है,—

() यदि विवरणी दे दी गर्इ है, तो निर्धारित आय की रकम और धारा 143 की उपधारा (1) के खंड () के अधीन अवधारित आय की रकम का अन्तर;

() उस दशा में 38ड़[जहां आय की कोर्इ विवरणी प्रस्तुत नहीं की गर्इ है या जहां धारा 148 के अधीन पहली बार विवरणी प्रस्तुत की गर्इ है],—

() किसी कंपनी, फर्म या स्थानीय प्राधिकारी की दशा में निर्धारित आय की रकम; और

() मद () के अन्तर्गत नहीं होने की दशा में, निर्धारित आय की रकम और ऐसी अधिकतम रकम जो कर से प्रभार्य नहीं है, का अन्तर;

(ii) किसी अन्य दशा में पुन: निर्धारित या पुन: संगणित आय की रकम और किसी पूर्ववर्ती आदेश में निर्धारित, पुन: निर्धारित या पुन: संगणित आय की रकम का अन्तर, होगी :

परंतु उस दशा में, जहां कम रिपोर्ट की गर्इ आय धारा 115ञख या धारा 115ञग के उपबंधों के अनुसार समझी गर्इ कुल आय के अवधारण से उद्भूत होती है, वहां कुल कम रिपोर्ट की गर्इ आय की रकम निम्नलिखित सूत्र के अनुसार अवधारित की जाएगी—

(क-ख) + (ग-घ)

जहां,—

क = धारा 115ञख या धारा 115ञग (जिसे इसमें साधारण उपबंध कहा गया है) में अंतर्विष्ट उपबंधों से भिन्न उपबंधों के अनुसार कुल निर्धारित आय;

ख = कुल आय, जो कर से तब प्रभार्य होती यदि साधारण उपबंधों के अनुसार निर्धारित कुल आय में से ऐसी कम रिपोर्ट की गर्इ आय की रकम को घटा दिया जाता;

ग = धारा 115ञख या धारा 115ञग में अंतर्विष्ट उपबंधों के अनुसार निर्धारित कुल आय;

घ = कुल आय, जो कर से तब प्रभार्य होती यदि धारा 115ञख या धारा 115ञग में अंतर्विष्ट उपबंधों के अनुसार निर्धारित कुल आय में से कम रिपोर्ट की गर्इ आय की रकम को घटा दिया जाता :

परंतु यह और कि जहां किसी मुद्दे पर कम रिपोर्ट की गर्इ आय की रकम को धारा 115ञख या धारा 115ञग में अंतर्विष्ट उपबंधों के अधीन तथा साधारण उपबंधों, दोनों के अधीन माना गया है, वहां ऐसी रकम को मद घ के अधीन रकम का अवधारण करते समय अवधारित कुल आय में से ही घटाया जाएगा ।

स्पष्टीकरण—इस धारा के प्रयोजनों के लिए,—

() "पूर्ववर्ती आदेश" से उस आदेश के तुरंत पूर्व का ऐसा आदेश अभिप्रेत है जिसके अनुक्रम के दौरान, उपधारा (1) के अधीन शास्ति आंरभ की गर्इ है;

() ऐसे किसी मामले में जहां निर्धारण या पुनर्निर्धारण का प्रभाव विवरणी में घोषित हानि कम करने या उस हानि को आय में संपरिवर्तित करने का हो, तो कम रिपोर्ट की गर्इ रकम, दावा की गर्इ हानि और निर्धारित या पुनर्निर्धारित, यथास्थिति, आय या हानि के बीच का अंतर होगी।

(4) उपधारा (6) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, जहां किसी निर्धारण वर्ष में किसी प्राप्ति, निक्षेप या विनिधान के स्रोत का, यथास्थिति, उस निर्धारण वर्ष, जिसमें ऐसी प्राप्ति या विनिधान (जिसे इसमें इसके पश्चात् "पूर्ववर्ती वर्ष" कहा गया है) होता है, से पूर्व के किसी वर्ष में ऐसे व्यक्ति के निर्धारण में हानि की संगणना करते हुए आय में जोड़ी जाने वाली या घटार्इ जाने वाली रकम का दावा किया जाता है और ऐसे पूर्ववर्ती वर्ष के लिए कोर्इ शास्ति उद्गृहीत नहीं की गर्इ थी, तब कम रिपोर्ट की गर्इ आय में, ऐसी रकम, जो ऐसी प्राप्ति, निक्षेप या विनिधान को पूरा करने के लिए पर्याप्त है, सम्मिलित होगी।

(5) उपधारा (4) में निर्दिष्ट रकम, निम्नलिखित क्रम में पूर्ववर्ती वर्ष के लिए कम रिपोर्ट की गर्इ आय की रकम समझी जाएगी—

() उस वर्ष से ठीक पूर्व पूर्ववर्ती वर्ष, जो प्रथम पूर्ववर्ती वर्ष है, जिसमें प्राप्ति, निक्षेप, या विनिधान होता है; और

() जहां प्रथम पूर्ववर्ती वर्ष में जोड़ी गर्इ या घटार्इ गर्इ रकम प्राप्ति, निक्षेप या विनिधान को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है वहां प्रथम पूर्ववर्ती वर्ष से ठीक पूर्ववर्ती वर्ष और इसी प्रकार से।

(6) इस धारा के प्रयोजनों के लिए न्यून रिपोर्ट की गर्इ आय, निम्नलिखित में सम्मिलित नहीं की जाएगी, अर्थात्:—

() आय की ऐसी रकम, जिसके संबंध में निर्धारिती स्पष्टीकरण देता है और, यथास्थिति, निर्धारण अधिकारी या आयुक्त (अपील) या आयुक्त या प्रधान आयुक्त का यह समाधान हो जाता है कि स्पष्टीकरण सद्भावी है और निर्धारिती ने दिए गए स्पष्टीकरण को साबित करने के लिए सभी ताित्त्वक तथ्यों को प्रकट किया है;

() किसी प्राक्कलन के आधार पर अवधारित कम रिपोर्ट की गर्इ आय की रकम, यदि लेखे, यथास्थिति, निर्धारण अधिकारी या आयुक्त या प्रधान आयुक्त (अपील) के समाधानप्रद रूप में सही और पूर्ण है किंतु नियोजित की गर्इ पद्धति ऐसी है कि आय की उसमें से समुचित रूप से कटौती नहीं की जा सकती;

() किसी प्राक्कलन के आधार पर अवधारित कम रिपोर्ट की गर्इ आय की रकम, यदि निर्धारिती ने, स्वप्रेरणा से उसी मुद्दे पर परिवर्धन या मोक न करने की कम रकम का प्राक्कलन किया है, अपनी आय की संगणना में ऐसी आय को सम्मिलित किया है और परिवर्धन या मोक न करने के सभी ताित्त्वक तथ्यों का प्रकटन किया है;

() जहां निर्धारिती ने धारा 92घ के अधीन यथा विहित जानकारी और दस्तावेजों को बनाए रखा था, वहां कीमत अंतरण निर्धारण अधिकारी द्वारा अवधारित सन्निकट कीमत के अनुरूप किए गए किसी परिवर्धन द्वारा व्यपदिष्ट कम रिपोर्ट की गर्इ आय की रकम, को अध्याय 10 के अधीन अंतर्राष्ट्रीय संव्यवहार घोषित किया है और संव्यवहार से संबंधित सभी ताित्त्वक तथ्यों को प्रकट किया है; और

() धारा 271ककख में निर्दिष्ट अप्रकटित आय की रकम।

(7) उपधारा (1) में निर्दिष्ट शास्ति, कम रिपोर्ट की गर्इ आय पर संदेय कर की रकम का पचास प्रतिशत के बराबर राशि होगी।

(8) उपधारा (6) या उपधारा (7) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, जहां किसी व्यक्ति द्वारा आय की किसी मिथ्या रिपोर्ट किए जाने के परिणामस्वरूप आय कम रिपोर्ट की जाती है, वहां उपधारा (1) में निर्दिष्ट शास्ति कम रिपोर्ट की गर्इ आय पर संदेय कर की रकम के दो सौ प्रतिशत के बराबर होगी।

(9) उपधारा (8) में निर्दिष्ट आय की मिथ्या रिपोर्ट करने के मामले निम्नलिखित होंगे :कृ

() तथ्यों का दुव्र्यपदेशन या छिपाना;

() लेखा बहियों में विनिधानों को अभिलिखित करने में असफलता;

() ऐसे व्यय का दावा, जो किसी साक्ष्य द्वारा साबित नहीं है;

() लेखा बहियों में किसी मिथ्या प्रविष्टि का अभिलेखन;

() लेखा बहियों में किसी ऐसी प्राप्ति को अभिलिखित न करना जिसका कुल आय पर प्रभाव है; और

() किसी अंतर्राष्ट्रीय संव्यवहार या अंतर्राष्ट्रीय संव्यवहार के रूप में समझे गए किसी संव्यवहार या कोर्इ विनिर्दिष्ट घरेलू संव्यवहार, जिसको अध्याय 10 के उपबंध लागू होते हैं, की रिपोर्ट करने में असफलता ।

(10) कम रिपोर्ट की गर्इ आय के संबंध में संदेय कर निम्नानुसार होगा,—

() 38च[जहां आय की कोर्इ विवरणी प्रस्तुत नहीं की गर्इ है या जहां धारा 148 के अधीन पहली बार विवरणी प्रस्तुत की गर्इ है] और आय का निर्धारण प्रथम बार किया गया है, कम रिपोर्ट की गर्इ आय पर संगणित कर की रकम, जो कि ऐसी अधिकतम रकम, जो कर से प्रभार्य न हो, से अधिक है;

() जहां धारा 143 की उपधारा (1) के खंड (क) के अधीन अवधारित या पूर्ववर्ती आदेश में निर्धारित, पुनर्निर्धारित या पुन:संगणित कुल आय कोर्इ हानि है, कम रिपोर्ट की गर्इ आय पर संगणित कर की रकम मानो वह कुल आय थी;

() किसी अन्य मामले में निम्नलिखित सूत्र के अनुसार अवधारित—

(X - Y)

जहां

X = कम रिपोर्ट की गर्इ आय पर संगणित कर की रकम, जो कि धारा 143 की उपधारा (1) के खंड () के अधीन अवधारित कुल आय या किसी पूर्ववर्ती आदेश में निर्धारित, पुनर्निर्धारित या पुन:संगणित कुल आय से अधिक है; और

Y = धारा 143 की उपधारा (1) के खंड () के अधीन अवधारित कुल आय या किसी पूर्ववर्ती आदेश में निर्धारित, पुनर्निर्धारित या पुन:संगणित कुल आय पर संगणित कर की रकम।

(11) रकम का कोर्इ परिवर्धन या मोक न किया जाना शास्ति के अधिरोपण के लिए आधार होगा, यदि ऐसे परिवर्धन या मोक न किए जाने से उसी या किसी अन्य निर्धारण वर्ष के लिए व्यक्ति के मामले में शास्ति के अधिरोपण का आधार बनाया गया है ।

(12) उपधारा (1) में निर्दिष्ट शास्ति, यथास्थिति, निर्धारण अधिकारी, आयुक्त (अपील), आयुक्त या प्रधान आयुक्त द्वारा लिखित में आदेश द्वारा अधिरोपित की जाएगी।

 

38घ. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2019 द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से 1.4.2017 से प्रतिस्थापित।

38ड़. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2019 द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से 1.4.2017 से प्रतिस्थापित।

38च. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2019 द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से 1.4.2017 से प्रतिस्थापित।

 

 

 

[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2019 द्वारा संशोधित रूप में]

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