समुचित प्राधिकरण
समुचित प्राधिकरण
269पख. (1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा–
(क) इस अध्याय के अधीन समुचित प्राधिकरण के कृत्यों का निर्वहन करने के लिए इतने समुचित प्राधिकरण गठित कर सकेगी, जो वह ठीक समझे; और
(ख) उन स्थानीय सीमाओं को निश्चित कर सकेगी जिनके भीतर समुचित प्राधिकरण इस अध्याय के अधीन अपने कृत्यों का निर्वहन करेंगे।
(2) समुचित प्राधिकरण तीन सदस्यों से मिलकर बनेगा जिनमें से दो आय-कर आयुक्त का पद या उसके समतुल्य या उससे ऊंचा पद धारण करने वाले भारतीय आय-कर सेवा के समूह "क" के सदस्य होंगे और एक मुख्य इंजीनियर का पद या उसके समतुल्य या उससे ऊंचा पद धारण करने वाला केन्द्रीय इंजीनियरी सेवा के समूह "क" का सदस्य होगा।
(3) धारा 269पग में निर्दिष्ट किसी स्थावर सम्पत्ति के संबंध में इस अध्याय के किसी उपबंध के अधीन किसी समुचित प्राधिकरण द्वारा निर्वहन किए जाने वाले किसी कृत्य की बाबत उसमें उल्लिखित समुचित प्राधिकरण,–
(क) उस दशा में जहां ऐसी सम्पत्ति केवल एक समुचित प्राधिकरण की अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के भीतर स्थिति है, ऐसा समुचित प्राधिकरण होगा;
(ख) उस दशा में जहां ऐसी संपत्ति दो या अधिक समुचित प्राधिकरणों की अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के भीतर स्थिति है, बोर्ड द्वारा धारा 295 के अधीन इस निमित्त बनाए गए नियमों7 के अनुसार ऐसी संपत्ति के संबंध में ऐसे कृत्यों का निर्वहन करने के लिए सशक्त समुचित प्राधिकरण होगा।
स्पष्टीकरण.–इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, ऐसी स्थावर संपत्ति, जो धारा 269पक के खंड (घ) के उपखंड (ii) में निर्दिष्ट प्रकृति के ऐसे अधिकार हैं, जो किसी भूमि या किसी ऐसे भवन या भवन के किसी ऐसे भाग में या उसकी बाबत हैं, जिसका निर्माण हो चुका है, या जिसका निर्माण होना है, उस स्थान पर स्थित समझी जाएगी जहां, यथास्थिति, ऐसी भूमि स्थित है या ऐसे भवन का निर्माण हो चुका है या निर्माण होना है।
7. नियम 48 ञ देखिए।
[वित्त अधिनियम, 2013 द्वारा संशोधित रूप में]

