कुछ उधारों और निक्षेपों के प्रतिसंदाय का ढंग
कुछ उधारों और निक्षेपों के प्रतिसंदाय का ढंग
269न. किसी बैंककारी कंपनी या सहकारी बैंक की कोर्इ शाखा और कोर्इ अन्य कंपनी या सहकारी सोसाइटी और कोर्इ फर्म या अन्य व्यक्ति, उसको दिए गए किसी उधार या किए गए निक्षेप का प्रतिसंदाय या उसके द्वारा प्राप्त किसी विनिर्दिष्ट रकम का संदाय ऐसे व्यक्ति के, जिसने ऐसा उधार दिया है या निक्षेप किया है या विनिर्दिष्ट अग्रिम का संदाय किया है, नाम लिखे गए, पाने वाले के खाते में देय चैक द्वारा, या पाने वाले के खाते में देय बैंक ड्राफ्ट द्वारा या किसी बैंक खाते के माध्यम से इलैक्ट्रानिक समाशोधन प्रणाली का उपयोग करके ही करेगा अन्यथा नहीं, यदि–
(क) उधार या निक्षेप या विनिर्दिष्ट अग्रिम की, उस पर संदेय ब्याज सहित यदि कोर्इ है, रकम; या
(ख) ऐसे प्रतिसंदाय की तारीख को, ऐसे व्यक्ति द्वारा, यथास्थिति, बैंककारी कंपनी या सहकारी बैंक की शाखा में या अन्य कंपनी या सहकारी सोसाइटी या फर्म या अन्य व्यक्ति के पास, चाहे अपने नाम में या किसी अन्य व्यक्ति के साथ संयुक्तत: धारित उधारों और निक्षेपों की ऐसे उधारों या निक्षेपों पर संदेय ब्याज सहित, यदि कोर्इ हो, कुल रकम; या
(ग) ऐसे विनिर्दिष्ट अग्रिम पर संदेय ऐसे व्यक्ति द्वारा अपने नाम पर या किसी अन्य व्यक्ति के साथ संयुक्तत: ऐसे संदाय की तारीख तक ब्याज, यदि कोर्इ है, के साथ, प्राप्त विनिर्दिष्ट अग्रिम की कुल रकम;
बीस हजार रुपए या उससे अधिक है :
परंतु जहां प्रतिसंदाय किसी बैंककारी कंपनी या सहकारी बैंक की शाखा द्वारा किया जाना है वहां ऐसा प्रतिसंदाय ऐसी शाखा में उस व्यक्ति के, जिसको ऐसे उधार या निक्षेप या प्रतिसंदाय किया जाना है, बचत बैंक खाते में या चालू खाते में (यदि कोर्इ है) ऐसे उधारों या निक्षेपों की रकम जमा करके भी किया जा सकेगा :
परंतु यह और कि इस धारा की कोर्इ बात,–
(i) सरकार से;
(ii) किसी बैंककारी कंपनी, डाकघर बचत बैंक या सहकारी बैंक से;
(iii) किसी केंद्रीय, राज्य या प्रान्तीय अधिनियम द्वारा स्थापित किसी निगम से;
(iv) कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 617 में यथापरिभाषित किसी सरकारी कंपनी से;
(v) किसी अन्य संस्था, संगम या निकाय या संस्थाओं, संगमों या निकायों के ऐसे वर्ग से, जो केंद्रीय सरकार, लेखबद्ध लिए जाने वाले कारणों से, इस निमित्त राजपत्र में अधिसूचित करे,
लिए गए या प्राप्त किए गए किसी उधार या निक्षेप या विनिर्दिष्ट अग्रिम के प्रतिसंदाय को लागू नहीं होगी।
स्पष्टीकरण–इस धारा के प्रयोजनों के लिए,–
(i) "बैंककारी कंपनी" का वही अर्थ है जो उसका धारा 269धध के स्पष्टीकरण के खंड (i) में है;
(ii) "सहकारी बैंक" का वही अर्थ है जो उसका बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) के भाग 5 में है;
(iii) "उधार या निक्षेप" से धन का कोर्इ उधार या निक्षेप अभिप्रेत है जो सूचना के पश्चात् प्रतिसंदेय है या किसी अवधि के पश्चात् प्रतिसंदेय है और कंपनी से भिन्न किसी व्यक्ति की दशा में इसके अंतर्गत किसी भी प्रकृति का उधार और निक्षेप है;
(iv) ''विनिर्दिष्ट अग्रिम'' से किसी स्थावर संपत्ति के अंतरण के संबंध में, चाहे अंतरण हुआ है या नहीं, चाहे जिस नाम से ज्ञात हो, अग्रिम की प्रकृति में की कोर्इ धनराशि अभिपे्रत है।
[वित्त अधिनियम, 2018 द्वारा संशोधित रूप में]

