कुछ उधार, निक्षेप या विनिर्दिष्ट राशियां लेने या प्रतिगृहीत करने का ढंग
अध्याय 20ख
कर अपवंचन को रोकने के लिए कुछ दशाओं में स्वीकृति, संदाय या प्रतिसंदाय के ढंग के बारे में अपेक्षा
कुछ उधार, निक्षेप या विनिर्दिष्ट राशियां लेने या प्रतिगृहीत करने का ढंग
269धध. कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति से (जिसे इसमें निक्षेपकर्ता कहा गया है) कोई उधार या निक्षेप या विनिर्दिष्ट धनराशि, पाने वाले के खाते में देय चैक या पाने वाले के खाते में देय बैंक ड्राफ्ट द्वारा या किसी बैंक खाते के माध्यम से 37ग[इलैक्ट्रानिक निकासी प्रणाली का उपयोग करके या किसी अन्य इलैक्ट्रानिक पद्धति का उपयोग करके, जो विहित की जाए] ही लेगा या प्रतिगृहीत करेगा अन्यथा नहीं, यदि—
(क) ऐसे उधार या निक्षेप की रकम या विनिर्दिष्ट राशि अथवा ऐसे उधार, निक्षेप और विनिर्दिष्ट राशि की कुल रकम; या
(ख) ऐसे उधार या निक्षेप या विनिर्दिष्ट राशि लेने या उसका प्रतिग्रहण करने की तारीख को ऐसे व्यक्ति द्वारा उस निक्षेपकर्ता से पहले लिया गया या प्रतिगृहीत उधार या निक्षेप या विनिर्दिष्ट राशि (चाहे प्रतिसंदाय शोध्य हो गया हो या नहीं) की रकम या कुल रकम, जो असंदत है; या
(ग) खंड (ख) में निर्दिष्ट रकम या कुल रकम खंड (क) में निर्दिष्ट रकम या कुल रकम के साथ मिलकर,
बीस हजार रुपए या उससे अधिक है :
परंतु इस धारा के उपबंध ऐसे किसी उधार या निक्षेप या विनिर्दिष्ट राशि को लागू नहीं होंगे जो निम्नलिखित से ली अथवा प्रतिगृहीत की जाती है या ऐसे किसी उधार या निक्षेप या विनिर्दिष्ट राशि को लागू नहीं होंगे जो निम्नलिखित द्वारा ली जाती है या प्रतिगृहीत की जाती है, अर्थात् :—
(क) सरकार;
(ख) कोई बैंककारी कंपनी, डाकघर बचत बैंक या सहकारी बैंक;
(ग) केंद्रीय, राज्य या प्रान्तीय अधिनियम द्वारा स्थापित कोई निगम;
(घ) कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18) की धारा 2 के खंड (45) में यथापरिभाषित कोई सरकारी कंपनी;
(ड़) ऐसी अन्य संस्था, संगम या निकाय अथवा ऐसे वर्ग की संस्थाएं, संगम या निकाय जिन्हें केंद्रीय सरकार, लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से, राजपत्र में इस निमित अधिसूचित करें :
परंतु यह और कि इस धारा के उपबंध किसी उधार या निक्षेप या विनिर्दिष्ट राशि को लागू नहीं होंगे जहां ऐसा व्यक्ति जिससे उधार या निक्षेप या विनिर्दिष्ट राशि ली जाती है या प्रतिगृहीत की जाती है और ऐसा व्यक्ति जिसके द्वारा उधार या निक्षेप या विनिर्दिष्ट धनराशि ली जाती है या प्रतिगृहीत की जाती है, दोनों ही की कृषि आय है और उनमें से किसी की भी इस अधिनियम के अधीन कर से प्रभार्य कोई आय नहीं है।
38क[परंतु यह भी कि इस धारा के उपबंधों का वैसे ही प्रभाव होगा, मानो "बीस हजार रुपए" शब्दों के स्थान पर, "दो लाख रुपए" शब्द रख दिए गए हों किसी निक्षेप या ऋण की दशा में वहां रख दिए गए हों, जहां,—
(क) किसी प्राथमिक कृषि प्रत्यय सोसाइटी या प्राथमिक सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक द्वारा उसके सदस्य द्वारा ऐसे निक्षेप को स्वीकार किया गया है ; या
(ख) किसी प्राथमिक कृषि प्रत्यय सोसाइटी या प्राथमिक सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक द्वारा उसके सदस्य द्वारा ऐसे ऋण को स्वीकार किया गया है ।;]
स्पष्टीकरण.—इस धारा के प्रयोजनों के लिए,—
(i) "बैंककारी कंपनी" से ऐसी कंपनी अभिप्रेत है जिसे बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) के उपबंध लागू होते हैं और इसके अंतर्गत उस अधिनियम की धारा 51 में निर्दिष्ट कोई बैंक या बैंककारी संस्था भी है;
38ख[(ii) "सहकारी बैंक", "प्राथमिक कृषि प्रत्यय सोसाइटी", "प्राथमिक सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक" के वही अर्थ होंगे, जो क्रमशः उनके धारा 80त की उपधारा (4) के स्पष्टीकरण में उनके हैं ;]
(iii) "उधार या निक्षेप" से धन का उधार या निक्षेप अभिप्रेत है;
(iv) "विनिर्दिष्ट राशि" से किसी स्थावर संपत्ति के अंतरण के संबंध में, चाहे ऐसा अंतरण होता है अथवा नहीं, अग्रिम के रूप में या अन्यथा, प्राप्य कोई धनराशि अभिप्रेत है।
[वित्त अधिनियम, 2023 द्वारा संशोधित रूप में]

