आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 269धध

कुछ ऋण और जमा लेने या स्वीकार करने का तरीका

धारा

धारा संख्या

269धध

अध्याय शीर्षक

अध्याय XX -ख - करापवंचन प्रतिक्रिया करने के लिए कुछ मामलों में स्वीकृति, भुगतान या भुगतान की विधि के रूप में आवश्यकता

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2000

कुछ ऋण और जमा लेने या स्वीकार करने का तरीका

कुछ ऋण और जमा लेने या स्वीकार करने का तरीका

10[अध्याय 20

कर अपवंचन को रोकने के लिए कुछ दशाओं में 11[स्वीकृति, संदाय या] प्रतिसंदाय के ढंग, के बारे में अपेक्षा

11[कुछ उधार और निक्षेप लेने या स्वीकार करने का ढंग

12[269धध. कोर्इ भी व्यक्ति, 30 जून, 1984 के पश्चात् किसी अन्य व्यक्ति से (जिसे इस धारा में इसके पश्चात् निक्षेपकर्ता कहा गया है) कोर्इ उधार या निक्षेप, (एकाउंट पेर्इ) चैक या पाने वाले के खाते में देय (एकाउंट पेर्इ) बैंक ड्राफ्ट द्वारा ही लेगा या स्वीकार करेगा, अन्यथा नहीं, यदि

() ऐसे उधार या निक्षेप की रकम अथवा ऐसे उधार और निक्षेप की कुल रकम; या

() ऐसे उधार या निक्षेप लेने या स्वीकार करने की तारीख को ऐसे व्यक्ति द्वारा उस निक्षेपकर्ता से पहले लिए गए या स्वीकार किए गए उधार या निक्षेप की (चाहे वह रकम देय हो गयी हो या नहीं), असंदत्त है तो वह रकम या कुल रकम जो असंदत्त है; या

() खंड () में निर्दिष्ट रकम या कुल रकम खंड () में निर्दिष्ट रकम या कुल रकम के साथ मिलकर,

13[बीस] हजार रुपए या उससे अधिक है :

परन्तु इस धारा के उपबंध ऐसे उधार या निक्षेप को लागू नहीं होंगे जो निम्नलिखित से लिए या स्वीकार किए जाते हैं या ऐसे उधार या निक्षेप को लागू नहीं होंगे जो निम्नलिखित द्वारा लिये या स्वीकार किये जाते हैं, अर्थात्

() सरकार;

() कोर्इ बैंककारी कंपनी, डाकघर बचत बैंक या सहकारी बैंक;

() केन्द्रीय, राज्य या प्रान्तीय अधिनियम द्वारा स्थापित कोर्इ निगम;

() कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 617 में परिभाषित कोर्इ सरकारी कंपनी14;

() ऐसी अन्य संस्था, संगम या निकाय अथवा ऐसे वर्ग की संस्थाएं, संगम या निकाय, जिन्हें केन्द्रीय सरकार, लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से, राजपत्र में इस निमित्त अधिसूचित15 करे :

16[परन्तु यह और कि इस धारा के उपबंध किसी उधार या निक्षेप को लागू नहीं होंगे, जहां ऐसा व्यक्ति जिससे उधार या निक्षेप लिया जाता है या स्वीकार किया जाता है और ऐसा व्यक्ति, जिसके द्वारा उधार या निक्षेप लिया जाता है या स्वीकार किया जाता है, दोनों ही की कोर्इ कृषि आय है और इनमें से किसी की भी इस अधिनियम के अधीन कर से प्रभार्य कोर्इ आय नहीं है।]

स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए,

17[(i) "बैंककारी कंपनी" से ऐसी कंपनी अभिप्रेत है, जिसे बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) लागू होता है और इसके अंतर्गत उस अधिनियम की धारा 51 में निर्दिष्ट बैंक या बैंककारी संस्था भी है;]

(ii) "सहकारी बैंक" का वही अर्थ है, जो बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) के भाग 5 में उसका है;

(iii) "उधार या निक्षेप" से धन का उधार या निक्षेप अभिप्रेत है।]

 

10. आय-कर (दूसरा संशोधन) अधिनियम, 1981 द्वारा 11.7.1981 से अध्याय 20ख अंत:स्थापित।

11. वित्त अधिनियम, 1984 द्वारा 1.4.1984 से अंत:स्थापित।

12. परिपत्र सं. 522, तारीख 18.8.1988 भी देखिए। ब्यौरे के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

13. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से "दस" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

14. "सरकारी कंपनी" की परिभाषा के लिए, देखिए पूर्व पृष्ठ 1.25 पर पाद-टिप्पण 46.

15. संस्थाओं का उल्लेख करने वाली अधिसूचना के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

16. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से अंत:स्थापित।

17. वित्त अधिनियम, 1985 द्वारा 1.4.1986 से खंड (i) निम्नलिखित के स्थान पर रखा गया :

"(i) 'बैंककारी कंपनी' का वही अर्थ है, जो धारा 40क की उपधारा (8) के स्पष्टीकरण के खंड () में उसका है।"

 

 

[वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा संशोधित रूप में]

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