आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 269ग

स्थावर सम्पत्ति जिसकी बाबत अर्जन की कार्यवाहियां की जा सकती हैं

धारा

धारा संख्या

269ग

अध्याय शीर्षक

अध्याय XXक - कर चोरी रोकने के लिए हस्तांतरण के कुछ मामलों में अचल संपत्तियों का अधिग्रहण

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2019 (सं.2)

स्थावर सम्पत्ति जिसकी बाबत अर्जन की कार्यवाहियां की जा सकती हैं

स्थावर सम्पत्ति जिसकी बाबत अर्जन की कार्यवाहियां की जा सकती हैं

स्थावर सम्पत्ति जिसकी बाबत अर्जन की कार्यवाहियां की जा सकती हैं

269ग. (1) जहां सक्षम प्राधिकारी को यह विश्वास करने का कारण है कि एक लाख रुपए से अधिक उचित बाजार मूल्य की कोर्इ स्थावर सम्पत्ति किसी व्यक्ति द्वारा (जिसे इस अध्याय में इसके पश्चात् अन्तरक कहा गया है) किसी अन्य व्यक्ति को (जिसे इस अध्याय में इसके पश्चात् अन्तरिती कहा गया है) ऐसे प्रकट प्रतिफल के लिए, जो उस सम्पत्ति के उचित बाजार मूल्य से कम है, अन्तरित कर दी गर्इ है और यह कि पक्षकारों के बीच करार पाए गए ऐसे अन्तरण के लिए प्रतिफल का अन्तरण - लिखत में इस उद्देश्य से सत्य कथन नहीं किया गया है कि–

() अन्तरक के उस अन्तरण से होने वाली किसी आय की बाबत इस अधिनियम के अधीन कर देने के दायित्व को कम करने या उसके अपवंचन को सुकर बनाया जाए, या

() किसी आय या धन या अन्य आस्तियों के, जो प्रकट नहीं की गर्इ हैं या जो भारतीय आय-कर अधिनियम, 1922 (1922 का 11) या इस अधिनियम या धन-कर अधिनियम, 1957 (1957 का 27) के प्रयोजनों के लिए अन्तरिती द्वारा प्रकट की जानी चाहिए थीं, छुपाना सुकर बनाया जाए,

वहां सक्षम प्राधिकारी इस अध्याय के उपबंधों के अधीन रहते हुए इस अध्याय के अधीन ऐसे सम्पत्ति के अर्जन के लिए कार्यवाहियां प्रारम्भ कर सकता है :

परन्तु ऐसी कार्यवाहियां प्रारम्भ करने के पहले, सक्षम प्राधिकारी ऐसे करने के अपने कारण लेखबद्ध करेगा :

परन्तु यह और कि ऐसी कोर्इ कार्यवाही तब तक प्रारम्भ नहीं की जाएगी जब तक कि सक्षम प्राधिकारी के पास यह विश्वास करने का कारण न हो कि सम्पत्ति का उचित बाजार मूल्य उसके प्रकट प्रतिफल से ऐसे प्रकट प्रतिफल के पन्द्रह प्रतिशत से अधिक है।

(2) इस अध्याय के अधीन किसी स्थावर सम्पत्ति की बाबत किसी कार्यवाही में,–

() जहां ऐसी सम्पत्ति का उचित बाजार मूल्य उसके प्रकट प्रतिफल और ऐसे प्रकट प्रतिफल के पच्चीस प्रतिशत से अधिक है, वहां वह इस बात का निश्चायक सबूत होगा कि पक्षकारों के बीच करार पाए गए ऐसे अन्तरण के लिए प्रतिफल का अन्तरण-लिखत में सत्य कथन नहीं किया गया है;

() जहां संपत्ति का ऐसा प्रकट प्रतिफल के लिए अन्तरण किया गया है, जो उसके उचित बाजार मूल्य से कम है वहां जब तक इसके प्रतिकूल साबित न हो जाए यह उपधारणा की जाएगी कि पक्षकारों के बीच करार पाए गए ऐसे अन्तरण के लिए प्रतिफल का अन्तरण-लिखत में सत्य कथन उस उद्देश्य से नहीं किया गया है जो उपधारा (1) के खंड () या खंड () में उल्लिखित है।

 

 

 

[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2019 द्वारा संशोधित रूप में]

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