आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 269क

परिभाषाएं

धारा

धारा संख्या

269क

अध्याय शीर्षक

अध्याय XXक - कर चोरी रोकने के लिए हस्तांतरण के कुछ मामलों में अचल संपत्तियों का अधिग्रहण

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2001

परिभाषाएं

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66[अध्याय 20क

कर अपवंचन रोकने के लिए अंतरण की कुछ दशाओं में स्थावर सम्पत्ति का अर्जन

परिभाषाएं

269क. इस अध्याय में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो–

() 67["प्रकट प्रतिफल" से–

(1) किसी अन्तरित स्थावर संपत्ति के संबंध में, जो खंड () के उपखंड (i) में निर्दिष्ट प्रकृति की स्थावर सम्पत्ति है, अभिप्रेत है,–]

(i) यदि अंतरण विक्रय के रूप में है तो अंतरण की लिखत में यथा विनिर्दिष्ट ऐसे अंतरण के लिए प्रतिफल;

(ii) यदि अन्तरण विनिमय के रूप में है तो–

() उस दशा में जहां अन्तरण का प्रतिफल एक वस्तु या एक से अधिक वस्तुएं हैं, वहां वह कीमत जो ऐसी वस्तु या वस्तुओं की अन्तरण की लिखत के निष्पादन की तारीख को खुले बाजार में विक्रय करने पर सामान्यतया प्राप्त होगी;

() उस दशा में जहां अन्तरण का प्रतिफल एक वस्तु या एक से अधिक वस्तुएं और धनराशि है वहां, उस कीमत का जो ऐसी वस्तु या वस्तुओं की अन्तरण की लिखत के निष्पादन की तारीख को खुले बाजार में विक्रय करने पर सामान्यतया प्राप्त होगी और ऐसी राशि का योग;

68[(iii) यदि अंतरण पट्टे के रूप में है, तो–

() उस दशा में जहां अन्तरण का प्रतिफल केवल प्रीमियम है वहां अन्तरण की लिखत में विनिर्दिष्ट की गर्इ प्रीमियम की रकम :

() उस दशा में जहां अन्तरण का प्रतिफल केवल किराया है, वहां किराया के रूप में संदेय धनराशियों का (यदि कोर्इ हो) और किराए की भागरूप या किराया गठित करने वाली सेवा या वस्तुओं के लिए रकमों का योग, जो अन्तरण की लिखत में विनिर्दिष्ट है;

() उस दशा में जहां अंतरण का प्रतिफल प्रीमियम और किराया है वहां प्रीमियम की रकम का किराए के रूप में संदेय धनराशि का (यदि कोर्इ हो) और किराए की भागरूप या किराया गठित करने वाली सेवा या वस्तुओं के लिए रकमों का योग जो अन्तरण की लिखत में विनिर्दिष्ट है,

और जहां ऐसे अन्तरण का सम्पूर्ण प्रतिफल या उसका कोर्इ भाग ऐसे अन्तरण की तारीख के पश्चात् पड़ने वाली किसी तारीख या किन्हीं तारीखों को संदेय है, वहां ऐसी तारीख के पश्चात संदेय प्रतिफल के मूल्य को, ऐसे प्रतिफल का, ऐसे अन्तरण की तारीख को, वह मितिकाटा-मूल्य समझा जाएगा जो आठ प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर लागू करके अवधारित किया जाए;

(2) किसी अन्तरित स्थावर सम्पत्ति के संबंध में, जो खंड () के उपखंड (ii) में निर्दिष्ट प्रकृति की स्थावर संपत्ति है, अभिप्रेत है–

(i) उस दशा में जहां अन्तरण का प्रतिफल केवल धनराशि है, वहां वह राशि;

(ii) उस दशा में जहां अन्तरण का प्रतिफल केवल वस्तु या वस्तुएं हैं वहां वह कीमत जो ऐसी वस्तु या वस्तुओं से अन्तरण की तारीख को खुले बाजार में उनका विक्रय करने पर सामान्यतया प्राप्त होगी;

(iii) उस दशा में जहां अन्तरण का प्रतिफल वस्तु या वस्तुएं और धनराशि है वहां उस कीमत का जो ऐसी वस्तु या वस्तुओं से अन्तरण की तारीख को खुले बाजार में उनका विक्रय करने पर सामान्यतया प्राप्त होगी और ऐसी राशि का योग,

और जहां ऐसे अन्तरण का सम्पूर्ण प्रतिफल या उसका कोर्इ भाग ऐसे अन्तरण की तारीख के पश्चात् पड़ने वाली किसी तारीख या किन्हीं तारीखों को संदेय है, वहां ऐसी तारीख के पश्चात् संदेय प्रतिफल के मूल्य को, ऐसे प्रतिफल का, ऐसे अंतरण की तारीख को, वह मितिकाटा-मूल्य समझा जाएगा जो आठ प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर लागू करके अवधारित की जाए;]

() "सक्षम प्राधिकारी" से धारा 269ख के अधीन इस अध्याय के अधीन सक्षम प्राधिकारी के कृत्यों का निर्वहन करने के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा प्राधिकृत 69[70[संयुक्त] आयुक्त] अभिप्रेत है;

() "न्यायालय" से आरम्भिक अधिकारिता वाला प्रधान सिविल न्यायालय अभिप्रेत है, जब तक कि केन्द्रीय सरकार ने किसी विशेष न्यायिक अधिकारी को किसी विनिर्दिष्ट स्थानीय सीमाओं के अन्दर इस अध्याय के अधीन न्यायालय के कृत्यों को करने के लिए नियुक्त न किया हो (जैसा वह इसके द्वारा करने के लिए प्राधिकृत है);

71[() "उचित बाजार मूल्य" से,–

(i) विक्रय या विनिमय के रूप में अन्तरित किसी स्थावर सम्पत्ति के संबंध में, जो खण्ड () के उपखंड (i) में निर्दिष्ट प्रकृति की स्थावर सम्पत्ति है, वह कीमत अभिप्रेत है जो ऐसी स्थावर सम्पत्ति का अन्तरण लिखत के निष्पादन की तारीख को खुले बाजार में विक्रय करने पर उस सम्पत्ति से सामान्यतया प्राप्त होगी;

(ii) पट्टे के रूप में अन्तरित किसी स्थावर सम्पत्ति के संबंध में, जो खंड () के उपखंड (i) में निर्दिष्ट प्रकृति की स्थावर संपत्ति है, वह प्रीमियम अभिप्रेत है, जो ऐसे संपत्ति का अन्तरण लिखत के निष्पादन की तारीख को खुले बाजार में उस अंतरण से सामान्यतया प्राप्त होगा, यदि ऐसे अन्तरण के लिए प्रतिफल केवल प्रीमियम के रूप में ही हो;

(iii) किसी अन्तरित स्थावर संपत्ति के संबंध में, जो खंड () के उपखंड (ii) में निर्दिष्ट प्रकृति की स्थावर संपत्ति है, धन के रूप में वह प्रतिफल अभिप्रेत है, जो ऐसे अन्तरण की तारीख को खुले बाजार में उस अंतरण से सामान्यतया प्राप्त होगा, यदि ऐसा अन्तरण धन के रूप में प्रतिफल के लिए ही किया गया हो;]

() 72["स्थावर संपत्ति" से अभिप्रेत है,–

(i) कोर्इ भूमि या कोर्इ भवन] या भवन का कोर्इ भाग और इसके अन्तर्गत, जहां कोर्इ भूमि या कोर्इ भवन या भवन का कोर्इ भाग किसी मशीनरी, संयंत्र, फर्नीचर, फिटिंग या अन्य वस्तुओं के साथ अन्तरित किया जाता है वहां ऐसी मशीनरी, संयंत्र, फर्नीचर, फिटिंग या अन्य वस्तुएं भी हैं;

स्पष्टीकरण.–इस 73[उपखंड] के प्रयोजनों के लिए भूमि, भवन, भवन का भाग, मशीनरी, संयंत्र, फर्नीचर, फिटिंग और अन्य वस्तुओं के अंतर्गत उनमें का कोर्इ अधिकार भी है;

74[(ii) धारा 269कख की उपधारा (1) के खंड () में निर्दिष्ट प्रकृति के कोर्इ अधिकार;]

75[() "अन्तरण लिखत" से, यथास्थिति, रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 (1908 का 16) के अधीन रजिस्ट्रीकृत अन्तरण लिखत या धारा 269कख के अधीन सक्षम प्राधिकारी के पास रजिस्ट्रीकृत कथन अभिप्रेत है;]

() "हितबद्ध व्यक्ति" के अंतर्गत, किसी स्थावर सम्पत्ति के संबंध में वे सभी व्यक्ति हैं, जो इस अध्याय के अधीन उस सम्पत्ति के अर्जन के कारण संदेय प्रतिकर में हित का दावा करते हैं या दावा करने के हकदार हैं;

76[() "अन्तरण" से--

(i) खंड () के उपखंड (i) में निर्दिष्ट किसी स्थावर सम्पत्ति के संबंध में ऐसी सम्पत्ति का विक्रय या विनिमय के रूप में या कम से कम बारह वर्ष की अवधि के पट्टे के रूप में अन्तरण अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 (1882 का 4) की धारा 53क77 में निर्दिष्ट प्रकृति की संविदा के भागिक पालन में ऐसी संपत्ति के कब्जे का लिया जाना या रखे रहना अनुज्ञात करना भी है।

स्पष्टीकरण.–इस उपखंड के प्रयोजनों के लिए, ऐसा पट्टा, जिसमें उसकी अवधि का किसी अतिरिक्त अवधि या अवधियों के लिए विस्तार किए जाने का उपबंध है, कम से कम बारह वर्ष की अवधि के लिए पट्टा समझा जाएगा, यदि उस अवधि का जिसके लिए ऐसा पट्टा अनुदत्त किया गया है, और उस अतिरिक्त अवधि या उन अतिरिक्त अवधियों का, जिसके या जिनके लिए उसका इस प्रकार विस्तार किया जा सकता है, योग कम से कम बारह वर्ष है;

(ii) खंड () के उपखंड (ii) में निर्दिष्ट प्रकृति की किसी स्थावर संपत्ति के संबंध में, ऐसी किसी बात का किया जाना (चाहे वह किसी सहकारी सोसाइटी में या कंपनी में शेयरों के अंतरण के रूप में हो अथवा किसी करार या ठहराव के रूप में हो अथवा किसी भी अन्य रीति से हो) अभिप्रेत है जिसका ऐसी संपत्ति का अन्तरण करने या उसके उपयोग करने में समर्थ बनाने का प्रभाव हो।]

 

66. अध्याय 20क, जिसमें धारा 269क से 269ध है; कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1972 द्वारा 15.11.1972 से अन्त:स्थापित किया गया था और 30.9.1986 के पश्चात् स्थावर संपत्ति के अंतरण की बाबत प्रवर्तन में नहीं रहा।

67. आय-कर (संशोधन) अधिनियम, 1981 द्वारा 1.7.1982 से 'किसी अंतरित स्थावर संपत्ति के संबंध में, "प्रकट प्रतिफल" से अभिप्रेत है–' के स्थान पर प्रतिस्थापित।

68. आय-कर (संशोधन) अधिनियम, 1981 द्वारा 1.7.1982 से अंत:स्थापित।

69. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1988 से भूतलक्षी प्रभाव से "आय-कर सहायक आयुक्त" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

70. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.10.1998 से "उप" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

71. आय-कर (संशोधन) अधिनियम, 1981 द्वारा 1.7.1982 से प्रतिस्थापित।

72. ' "स्थावर संपत्ति" से कोर्इ भूमि या कोर्इ भवन अभिप्रेत है' शब्दों के स्थान पर आय-कर (संशोधन) अधिनियम, 1981 द्वारा 1.7.1982 से प्रतिस्थापित।

73. यथोक्त द्वारा, "खंड" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

74. आय-कर (संशोधन) अधिनियम, 1981 द्वारा 1.7.1982 से अंत:स्थापित।

75. यथोक्त द्वारा, प्रतिस्थापित।

76. आय-कर (संशोधन) अधिनियम, 1981 द्वारा 1.7.1982 से प्रतिस्थापित।

77. संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 53क के पाठ के लिए देखिए परिशिष्ट एक।

 

 

[वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा संशोधित रूप में]

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