अन्य आदेशों का पुनरीक्षण
अन्य आदेशों का पुनरीक्षण
264. (1) प्रधान आयुक्त या आयुक्त के अधीनस्थ किसी प्राधिकारी द्वारा पारित किसी आदेश की दशा में, जो उस आदेश से भिन्न है, जिसे धारा 263 लागू होती है, प्रधान 1[मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान] आयुक्त या आयुक्त स्वप्रेरणा पर या पुनरीक्षण के लिए निर्धारिती द्वारा आवेदन पर इस अधिनियम के अधीन किसी ऐसी कार्यवाही का अभिलेख मंगा सकेगा जिसमें ऐसा कोर्इ आदेश पारित किया गया है, और ऐसी जांच कर सकेगा या ऐसी जांच करवा सकेगा और इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, उस पर ऐसा आदेश, जो निर्धारिती पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला न हो, पारित कर सकेगा जो वह ठीक समझे।
(2) प्रधान 1[मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान] आयुक्त या आयुक्त, स्वप्रेरणा पर इस धारा के अधीन किसी आदेश का पुनरीक्षण नहीं करेगा यदि वह आदेश एक वर्ष से अधिक पूर्व किया गया है।
(3) निर्धारिती द्वारा इस धारा के अधीन पुनरीक्षण आवेदन किए जाने की दशा में आवेदन, उस तारीख से, जिसको प्रश्नगत आदेश उसको संसूचित किया गया था, या उस तारीख से जिसको उसे अन्यथा उसका पता चला था, इनमें से जो भी पहले हो, एक वर्ष के भीतर करना होगा :
परन्तु यदि प्रधान 1[मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान] आयुक्त या आयुक्त का यह समाधान हो जाता है कि निर्धारिती उस अवधि के भीतर आवेदन करने से पर्याप्त कारण से निवारित हो गया था तो वह उस अवधि की समाप्ति के पश्चात् किया गया आवेदन ग्रहण कर सकेगा।
(4) प्रधान 1[मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान] आयुक्त या आयुक्त इस धारा के अधीन किसी आदेश का पुनरीक्षण निम्नलिखित दशाओं में नहीं करेगा,–
(क) जहां उस आदेश के विरुद्ध उपायुक्त (अपील) या आयुक्त (अपील) को या अपील अधिकरण में अपील की जा सकती है किंतु की नहीं गर्इ है और अपील का समय जिसके भीतर वह की जा सकती है समाप्त नहीं हुआ है, अथवा आयुक्त (अपील) को या] अपील अधिकरण में अपील करने पर निर्धारिती ने अपील के अपने अधिकार का अधित्यजन नहीं किया है; अथवा
(ख) जहां आदेश उपायुक्त (अपील) के समक्ष अपील में लंबित है; या
(ग) जहां आदेश आयुक्त (अपील) को या अपील अधिकरण को की गर्इ अपील का विषय बनाया गया है।
(5) इस धारा के अधीन पुनरीक्षण के लिए निर्धारिती द्वारा किए गए प्रत्येक आवेदन के साथ पांच सौ रुपए की फीस होगी।
(6) 1 अक्तूबर, 1998 को या के पश्चात् इस उपधारा के अधीन निर्धारिती के प्रत्येक पुनरीक्षण संबंधी आवेदन पर उस वित्तीय वर्ष के अंत से, जिसमें पुनरीक्षण का ऐसा आवेदन निर्धारिती द्वारा किया जाए, एक वर्ष के भीतर पारित किया जाएगा।
स्पष्टीकरण.–इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, परिसीमाकाल की संगणना करने में उस समय को, जो धारा 129 के परन्तुक के अधीन पुन: सुने जाने के लिए निर्धारिती को अवसर देने में लगा है और उस अवधि को, जिसके दौरान इस धारा के अधीन कोर्इ कार्यवाही किसी न्यायालय के आदेश या व्यादेश द्वारा रोकी गर्इ है निकाल दिया जाएगा।
(7) उपधारा (6) की किसी बात के होते हुए भी, उपधारा (6) के अधीन पुनरीक्षण आदेश अपील अधिकरण, राष्ट्रीय कर अधिकरण, उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय के आदेश में दिए गए किसी निष्कर्ष या निदेश के परिणामस्वरूप या उसे प्रभावी रूप देने के लिए किसी समय पारित किया जा सकेगा।
स्पष्टीकरण 1.–प्रधान 1[मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान] आयुक्त या आयुक्त का वह आदेश जिसमें हस्तक्षेप करने से इनकार किया गया है, इस धारा के प्रयोजनों के लिए ऐसा नहीं समझा जाएगा जो निर्धारिती पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।
स्पष्टीकरण 2.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए उपायुक्त (अपील) को प्रधान 1[मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान] आयुक्त या आयुक्त का अधीनस्थ प्राधिकारी समझा जाएगा।
1. कराधान और अन्य विधि (कतिपय उपबंधों का शिथिलीकरण और संशोधन) अधिनियम, 2020 द्वारा 1.11.2020 से अंत:स्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2021 द्वारा संशोधित रूप में]

