राजस्व के प्रतिकूल आदेश का अवतरण
ड़–आयुक्त द्वारा पुनरीक्षण
राजस्व पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले आदेशों का पुनरीक्षण
263. (1) आयुक्त इस अधिनियम के अधीन किसी कार्यवाही का अभिलेख18 मंगा सकेगा और उसकी जांच कर सकेगा और यदि वह यह समझता है कि 19[निर्धारण] अधिकारी द्वारा उसमें पारित कोर्इ आदेश गलत है, जहां तक18 कि वह राजस्व के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव18 डालने वाला है, तो वह निर्धारिती को सुनवार्इ का अवसर देने के पश्चात् और ऐसी जांच करने या करवाने के पश्चात् जैसी वह आवश्यक समझता है, उस पर ऐसा आदेश, जिसके अंतर्गत निर्धारण में वृद्धि या उपान्तरण करने या निर्धारण18 रद्द करने और नए सिरे से निर्धारण का निदेश देने का आदेश भी है, जो उस मामले की परिस्थितियों में न्यायोचित हो पारित कर सकेगा।
20[स्पष्टीकरण.–शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए–
(क) निर्धारण अधिकारी द्वारा 21[1 जून, 1988 को या उसके पूर्व या पश्चात्] पारित आदेश के अंतर्गत,–
(i) निर्धारण का वह आदेश भी है, जो धारा 144क के अधीन 22[संयुक्त] आयुक्त द्वारा जारी किए गए निदेशों के आधार पर सहायक आयुक्त 23[या उपायुक्त] या आय-कर अधिकारी द्वारा किया जाता है;
(ii) वह आदेश भी है, जो बोर्ड द्वारा अथवा मुख्य आयुक्त या महानिदेशक या आयुक्त द्वारा, जिसे धारा 120 के अधीन इस निमित्त बोर्ड द्वारा प्राधिकृत किया जाए, जारी किए गए आदेशों या निदेशों के अधीन उसे प्रदत् निर्धारण अधिकारी की शक्तियों के प्रयोग या सौंपे गए कृत्यों के निर्वहन में 22[संयुक्त] आयुक्त द्वारा किया जाता है;
(ख) ''अभिलेख'' के अंतर्गत इस अधिनियम के अधीन किसी कार्यवाही से संबंधित ऐसे सभी अभिलेख, जो आयुक्त द्वारा परीक्षा किए जाने के समय उपलब्ध हों 24[आएंगे और उनके बारे में यह समझा जाएगा कि वे सदैव से उसके अंतर्गत थे;]
(ग) जहां इस उपधारा में उल्लिखित और निर्धारण अधिकारी द्वारा पारित कोर्इ आदेश 25[1 जून, 1988 को या उसके पूर्व या पश्चात् फाइल की गर्इ] किसी अपील की विषय-वस्तु रहा है, वहां इस उपधारा के अधीन आयुक्त की शक्तियां ऐसे विषयों पर विस्तारित होंगी जिन पर ऐसी अपील में विचार और विनिश्चय नहीं किया गया है, 25[और उनके बारे में यह समझा जाएगा कि उक्त शक्तियां ऐसे विषयों पर सदैव से विस्तारित थीं]।]
26[(2) उपधारा (1) के अधीन कोर्इ आदेश ऐसे वित्तीय वर्ष के, जिसमें वह आदेश, जिसके विरुद्ध पुनरीक्षण चाहा गया है, पारित किया गया था, अंत से दो वर्ष की समाप्ति के पश्चात् नहीं किया जाएगा।]
(3) उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी किसी ऐसे आदेश की दशा में, जो अपील अधिकरण, 26क[राष्ट्रीय कर अधिकरण,] उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय के आदेश में अन्तर्विष्ट किसी निष्कर्ष या निदेश के परिणामस्वरूप या उसको प्रभावी करने के लिए पारित किया गया है, इस धारा के अधीन पुनरीक्षण में आदेश किसी भी समय पारित किया जा सकेगा।
स्पष्टीकरण.–उपधारा (2) के प्रयोजनों के लिए परिसीमाकाल की संगणना करने में उस समय को, जो धारा 129 के परन्तुक के अधीन निर्धारिती को पुन: सुनवार्इ का अवसर देने में लगा है और ऐसी किसी अवधि को, जिसके दौरान उस धारा के अधीन कोर्इ कार्यवाही किसी न्यायालय के आदेश या व्यादेश से रोक रखी गर्इ है, निकाल दिया जाएगा।
18. ''अभिलेख'', ''जहां तक'', ''राजस्व के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव'' और ''निर्धारण'' पदों के अर्थ के लिए देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.
19. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से ''आय-कर'' के स्थान पर प्रतिस्थापित।
20. वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.6.1988 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व स्पष्टीकरण कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1984 द्वारा 1.10.1984 से अंत:स्थापित किया गया था और प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से संशोधित किया गया था।
21. वित्त अधिनियम, 1989 द्वारा 1.6.1988 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।
22. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.10.1998 से ''उप'' के स्थान पर प्रतिस्थापित।
23. यथोक्त द्वारा अंत:स्थापित।
24. वित्त अधिनियम, 1989 द्वारा 1.6.1988 से भूतलक्षी प्रभाव से ''हैं'' शब्द तथा ''उपलब्ध हों'' शब्दों के स्थान पर क्रमश: प्रतिस्थापित।
25. यथोक्त द्वारा अंत:स्थापित।
26. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1984 द्वारा 1.10.1984 से प्रतिस्थापित।
26क. राष्ट्रीय कर अधिकरण अधिनियम, 2005 द्वारा, इसके अधिसूचित किए जाने की तारीख से, अंत:स्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2006 द्वारा संशोधित रूप में]

