आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 260क

उच्च न्यायालय में अपील

धारा

धारा संख्या

260क

अध्याय शीर्षक

अध्याय XX - अपील और संशोधन

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2000

उच्च न्यायालय में अपील

उच्च न्यायालय में अपील

30[गग--उच्च न्यायालय में अपील

उच्च न्यायालय में अपील

260क. (1) यदि उच्च न्यायालय का समाधान हो जाता है कि मामले में विधि का सारवान् प्रश्न है तो अपील अधिकरण द्वारा पारित किए गए प्रत्येक आदेश के विरुद्ध उच्च न्यायालय में अपील की जा सकेगी।

(2) 31[मुख्य आयुक्त या आयुक्त या निर्धारिती, जो अपील अधिकरण द्वारा पारित आदेश से व्यथित है, उच्च न्यायालय में अपील फाइल कर सकेगा और इस उपधारा के अधीन ऐसी अपील–]

() उस तारीख से, जिसको अपीलाधीन आदेश 32[निर्धारिती या मुख्य आयुक्त या आयुक्त द्वारा प्राप्त किया जाए], 120 दिन के भीतर फाइल की जाएगी;

() 33[* * *]

() अपील ज्ञापन के रूप में फाइल की जाएगी जिसमें उस मामले के विधि के सारवान् प्रश्न का ठीक-ठीक उल्लेख होगा।

(3) जहां उच्च न्यायालय का समाधान हो जाए कि विधि का सारवान् प्रश्न किसी मामले में है तो वह उस प्रश्न को विरचित करेगा।

(4) अपील की सुनवार्इ केवल इस प्रकार विरचित प्रश्न पर की जाएगी और प्रत्यथ्र्ाी अपील की सुनवार्इ के समय, यह तर्क दे सकेंगे कि मामले में ऐसा कोर्इ प्रश्न नहीं है :

परन्तु इस उपधारा की कोर्इ बात न्यायालय द्वारा विरचित न किए गए विधि के किसी अन्य सारवान् प्रश्न पर अपील, लेखबद्ध कारणों से, सुनने की न्यायालय की शक्ति को छीनने वाली या कम करने वाली नहीं समझी जाएगी, यदि उसका समाधान हो जाता है कि मामले में ऐसा प्रश्न है।

(5) उच्च न्यायालय इस प्रकार विरचित प्रश्न का विनिश्चय करेगा और उस पर अपना निर्णय देगा जिसमें वे आधार दिए जाएंगे जिन पर ऐसा विनिश्चय किया गया है और ऐसे खर्च दिलवा सकेगा जो वह ठीक समझे।

(6) उच्च न्यायालय किसी ऐसे मुद्दे का विनिश्चय कर सकेगा जिसका विधि के ऐसे प्रश्न पर विनिश्चय के कारण जिसका उल्लेख उपधारा (1) में किया गया है–

() अपील अधिकरण द्वारा अवधारण नहीं किया गया है; या

() अपील अधिकरण द्वारा गलत अवधारण किया गया है।

34[(7) इस अधिनियम में जैसा अन्यथा उपबंधित है उसके सिवाय, उच्च न्यायालय में अपीलों से संबंधित सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के उपबंध, जहां तक हो सके, इस धारा के अधीन अपीलों के मामले में लागू होंगे।]

 

30. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.10.1998 से उप-शीर्ष "गग" और धारा 260क और 260ख अंत:स्थापित किए गए।

31. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.6.1999 से "इस उपधारा के अधीन अपील–" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

32. यथोक्त द्वारा "अपीलार्थी को सूचित किया जाए," के स्थान पर प्रतिस्थापित।

33. यथोक्त द्वारा लोप किया गया। इससे पूर्व खंड () इस प्रकार था :

"() जहां निर्धारिती द्वारा फाइल की जाए वहां उसके साथ दस हजार रुपए की फीस देनी होगी।"

34. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.6.1999 से अंत:स्थापित।

 

 

[वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा संशोधित रूप में]

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