अपीलीय न्यायाधिकरण के लिए अपील
79अपील अधिकरण को अपीलें
80253. (1) कोर्इ निर्धारिती, जो निम्नलिखित आदेशों में से किसी से व्यथित है, ऐसे आदेश के विरुद्ध अपील अधिकरण को अपील कर सकेगा–
(क) वह आदेश जो 81[1 अक्तूबर, 1998 से पूर्व] 82[* * *] 83[धारा 154] 84[* * *] धारा 250, 85[धारा 271, धारा 271क या धारा 272क] के अधीन 86[यथास्थिति, उपायुक्त (अपील)] 87[या आयुक्त (अपील)] द्वारा पारित किया गया है, अथवा
88[(ख) 30 जून, 1995 के पश्चात् किन्तु 1 जनवरी, 1997 से पूर्व, धारा 132 के अधीन आरम्भ की गर्इ तलाशी या धारा 132क के अधीन अध्यपेक्षित लेखा बहियों, अन्य दस्तावेजों या किन्हीं आस्तियों की बाबत धारा 158खग के खंड (ग) के अधीन निर्धारण अधिकारी द्वारा पारित आदेश;
(ग) वह आदेश जो 89[धारा 12कक के अधीन या] धारा 263 के अधीन 90[या धारा 272क के अधीन] 91[* * *] आयुक्त द्वारा पारित किया गया है, या वह आदेश जो उसके द्वारा धारा 263 के अधीन अपने आदेश का संशोधन करते हुए धारा 154 के अधीन पारित किया गया है 92[या वह आदेश जो धारा 272क के अधीन किसी मुख्य आयुक्त या महानिदेशक या निदेशक द्वारा पारित किया गया है।]
(2) आयुक्त, यदि वह 93[यथास्थिति] 93[उपायुक्त (अपील)] 94[या आयुक्त (अपील)] द्वारा 95[1 अक्तूबर, 1998 से पूर्व] 96[धारा 154 या] धारा 250 के अधीन पारित किसी आदेश के संबंध में आपत्ति करता है, तो 97[निर्धारण] अधिकारी को उस आदेश के विरुद्ध अपील अधिकरण को अपील करने का निदेश दे सकेगा।
(3) उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन प्रत्येक अपील उस तारीख से साठ दिन के भीतर फाइल की जाएगी जिसको वह आदेश, जिसके विरुद्ध अपील की जानी र्इप्सित है, यथास्थिति, निर्धारिती को या आयुक्त को, संसूचित किया जाता है :
98[परन्तु उपधारा (1) के खंड (ख) के अधीन किसी अपील की बाबत इस उपधारा का वही प्रभाव होगा मानो "साठ दिन" शब्दों के स्थान पर "तीस दिन" शब्द रखे गए हों।]
(4) यथास्थिति, 99[निर्धारण] अधिकारी या निर्धारिती, यह सूचना प्राप्त होने पर कि 1[यथास्थिति, उपायुक्त (अपील)] 2[या आयुक्त (अपील)] के आदेश के विरुद्ध उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन अपील दूसरे पक्षकार द्वारा की गर्इ है, इस बात के होते हुए भी कि उसने ऐसे आदेश या उसके किसी भाग के विरुद्ध अपील नहीं की है, सूचना की प्राप्ति के तीस दिन के भीतर 2[यथास्थिति], 3[उपायुक्त (अपील)] 3क[या आयुक्त (अपील)] के आदेश के किसी भाग4 के विरुद्ध विहित रीति से सत्यापित प्रत्याक्षेपों का ज्ञापन फाइल कर सकेगा और ऐसा ज्ञापन अपील अधिकरण द्वारा इस प्रकार निपटाया जाएगा मानो वह ऐसी अपील हो जो उपधारा (3) में वर्णित समय के भीतर पेश की गर्इ हो।
(5) अपील अधिकरण उपधारा (3) या उपधारा (4) में निर्दिष्ट सुसंगत अवधि की समाप्ति के पश्चात् किसी अपील को ग्रहण करेगा या प्रत्याक्षेपों का ज्ञापन फाइल करने की अनुज्ञा दे सकेगा, यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि उस अवधि के भीतर उसे पेश न करने के लिए पर्याप्त कारण था।
5[(6) अपील अधिकरण को अपील विहित प्ररूप6 में की जाएगी और उसका सत्यापन विहित रीति से किया जाएगा और उससे संबंधित निर्धारण कार्यवाहियों के प्रारम्भ की तारीख पर विचार किए बिना, 1 अक्तूबर, 1998 को या उसके पश्चात् की गर्इ अपील की दशा में, उसके साथ–
(क) जहां निर्धारण अधिकारी द्वारा संगणित निर्धारिती की कुल आय, ऐसे मामले में जिससे अपील संबंधित है, एक लाख रुपए या उससे कम है, वहां पांच सौ रुपए की फीस होगी;
(ख) जहां पूर्वोक्त रूप में संगणित निर्धारिती की कुल आय, ऐसे मामले में जिससे अपील संबंधित है, एक लाख रुपए से अधिक है किंतु दो लाख रुपए से अधिक नहीं है, वहां एक हजार पांच सौ रुपए की फीस होगी;
(ग) जहां उपरोक्त रूप में संगणित निर्धारिती की कुल आय, ऐसे मामले में जिससे अपील संबंधित है, दो लाख रुपए से अधिक है वहां निर्धारित आय की एक प्रतिशत फीस होगी, जो अधिक से अधिक दस हजार रुपए होगी;
7[(घ) जहां अपील की विषयवस्तु खंड (क), (ख) और (ग) में विनिर्दिष्ट मामलों से भिन्न किसी मामले के संबंध में है; वहां पांच सौ रुपए की फीस होगी :]
परन्तु उपधारा (2) में निर्दिष्ट किसी अपील की दशा में या उपधारा (4) में निर्दिष्ट प्रत्याक्षेपों के ज्ञापन की दशा में, ऐसी कोर्इ फीस संदेय नहीं होगी।
(7) मांग रोकने के आवेदन के साथ पांच सौ रुपए की फीस होगी।
79. अपील अधिकरण के अपील के प्ररूप और प्रत्याक्षेपों के प्ररूप के लिए देखिये नियम 47(1) और प्ररूप सं. 36 और 36क।
80. आय-कर अपील अधिकरण द्वारा जारी अनुदेश भी देखिये। ब्यौरे के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
81. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.10.1998 से अंत:स्थापित।
82. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से "धारा 131 की उपधारा (2)," शब्दों और अंकों का लोप किया गया।
83. प्रत्यक्ष कर (संशोधन) अधिनियम, 1964 द्वारा 6.10.1964 से अंत:स्थापित।
84. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से "धारा 246क" शब्दों और अंकों का लोप किया गया। इससे पूर्व ये प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा उसी तारीख से अंत:स्थापित किए गए थे।
85. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.4.1976 से "या धारा 271" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
86. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1977 द्वारा 10.7.1978 से अंत:स्थापित।
87. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "सहायक आयुक्त (अपील)" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
88. आय-कर (संशोधन) अधिनियम, 1997 द्वारा 1.1.1997 से प्रतिस्थापित। इससे पूर्व उपखंड (ख), जो वित्त अधिनियम, 1995 द्वारा 1.7.1995 से अंत:स्थापित किया गया था, इस प्रकार था :
"(ख) धारा 158खग के खंड (ग) के अधीन निर्धारण अधिकारी द्वारा पारित आदेश; या"
इससे पूर्व खंड (ख), प्रत्यक्ष कर (संशोधन) अधिनियम, 1964 द्वारा 6.10.1964 से, कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.4.1976 से, वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1977 द्वारा 10.7.1978 से संशोधित की गर्इ थी और बाद में कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1984 द्वारा 1.10.1984 से उसका लोप किया गया था।"
89. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.6.1999 से अंत:स्थापित।
90. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.4.1976 से अंत:स्थापित।
91. वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.4.1988 से "या धारा 285क के अधीन" का लोप किया गया। लोप किए गए शब्द पूर्व में प्रत्यक्ष कर (संशोधन) अधिनियम, 1964 द्वारा 6.10.1964 से अंत:स्थापित किए गए थे।
92. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से अंत:स्थापित।
93. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "सहायक आयुक्त (अपील)" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
94. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1977 द्वारा 10.7.1978 से अंत:स्थापित।
95. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.10.1998 से अंत:स्थापित।
96. प्रत्यक्ष कर (संशोधन) अधिनियम, 1964 द्वारा 6.10.1964 से अंत:स्थापित।
97. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आय-कर" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
98. वित्त अधिनियम, 1995 द्वारा 1.7.1995 से अंत:स्थापित।
99. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आय-कर" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
1. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "सहायक आयुक्त (अपील)" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
2. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1977 द्वारा 10.7.1978 से अंत:स्थापित।
3. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "सहायक आयुक्त (अपील)" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
3क. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1977 द्वारा 10.7.1978 से अंत:स्थापित।
4. "आदेश के किसी भाग" पद के अर्थ के लिए देखिए टैक्समैन्स डायरैक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.
5. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.10.1998 से उपधारा (6) के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व, उपधारा (6), जो कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1971 से, वित्त अधिनियम, 1981 द्वारा 1.6.1981 से और वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.6.1992 से संशोधित की गर्इ थी और बाद में वित्त अधिनियम, 1993 द्वारा 1.6.1992 से भूतलक्षी रूप से प्रतिस्थापित की गर्इ थी, इस प्रकार थी :
"(6) अपील अधिकरण को की जाने वाली अपील विहित प्ररूप में होगी तथा विहित रीति से सत्यापित की जाएगी और 1 जून, 1992 को या उसके बाद फाइल की गर्इ अपील के मामले में, चाहे उसके संबंध में निर्धारण कार्यवाही चलाने की तारीख कुछ भी हो, उसके साथ निम्नलिखित फीस देनी होगी–
(क) जहां उस मामले में जिसके संबंध में वह अपील है, निर्धारण अधिकारी द्वारा संगणित निर्धारिती की कुल आय एक लाख रुपए या कम है, वहां दो सौ पचास रुपए;
(ख) जहां उस मामले में जिसके संबंध में वह अपील है, उपरोक्त रूप में संगणित निर्धारिती की कुल आय एक लाख रुपये से अधिक है, एक हजार पांच सौ रुपए :
परन्तु उपधारा (2) में उल्लिखित अपील के मामले में और उपधारा (4) में उल्लिखित प्रत्याक्षेप ज्ञापन के मामले में ऐसी कोर्इ फीस संदेय नहीं होगी।"
6. नियम 47 और प्ररूप सं. 36 एवं 36क देखिए।
7. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.6.1999 से अंत:स्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा संशोधित रूप में]

