वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1993 से लोप किया गया।
भागीदार द्वारा अपील
247. 40[वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1993 से लोप किया गया।]
40. लोप से पूर्व, धारा 247, जो वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1977 द्वारा 10.7.1978 से, प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से संशोधित की गर्इ थी और प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से जिसका लोप किया गया था और बाद में प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से जिसे पुन:पुर:स्थापित किया गया था, इस प्रकार थी:
"247. भागीदार द्वारा अपील - जहां फर्म के भागीदार फर्म की कुल आय में उनके हिस्सों पर अलग-अलग निर्धारणीय हैं वहां ऐसा कोर्इ भागीदार फर्म की कुल आय या हानि की रकम या कर्इ भागीदारों में उसका प्रभाजन तय करने वाले निर्धारण अधिकारी के किसी आदेश के विरुद्ध यथास्थिति, उपायुक्त (अपील) या आयुक्त (अपील) को अपील कर सकेगा, किंतु वह ऐसे मामले को ऐसी किसी अपील में नहीं उठा सकता जो उसकी अपनी कुल आय या हानि तय करने वाले निर्धारण आदेश के विरूद्ध की गर्इ है।"
[वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा संशोधित रूप में]

