आयुक्त (अपील) के समक्ष अपीलीय आदेश
37[आयुक्त (अपील) के समक्ष अपीलीय आदेश
246क. (1) निम्नलिखित आदेशों में से किसी से व्यथित कोर्इ निर्धारिती (चाहे नियत दिन से पूर्व या पश्चात्) आयुक्त (अपील) को अपील कर सकेगा--
(क) निर्धारिती के विरुद्ध आदेश, जहां निर्धारिती इस अधिनियम के अधीन कर निर्धारण के अपने दायित्व से इंकार करे अथवा धारा 143 की उपधारा (1) या उपधारा (1ख) के अधीन संसूचना, जहां निर्धारिती समायोजन करने पर अथवा धारा 143 की उपधारा (3) या धारा 144 के अधीन कोर्इ निर्धारण आदेश, जहां निर्धारित आय पर, या अवधारित कर राशि पर, या संगणित हानि की रकम पर, या इस प्रास्थिति पर जिसके अधीन उसका निर्धारण किया गया है, आपत्ति करे;
(ख) धारा 147 या धारा 150 के अधीन निर्धारण, पुन:निर्धारण या पुन:संगणना का आदेश;
(ग) धारा 154 या धारा 155 के अधीन किया गया आदेश जिसका निर्धारण बढ़ाने या रिफंड घटाने का प्रभाव है अथवा उक्त धाराओं में से किसी धारा के अधीन निर्धारिती द्वारा किए गए दावे को मानने से इंकार संबंधी आदेश;
(घ) निर्धारिती को अनिवासी का एजेन्ट मानते हुए धारा 163 के अधीन किया गया आदेश;
(ड़) धारा 170 की उपधारा (2) या उपधारा (3) के अधीन किया गया आदेश;
(च) धारा 171 के अधीन किया गया आदेश;
(छ) 1 अप्रैल, 1992 को या इससे पूर्व प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष के निर्धारण की बाबत धारा 185 की उपधारा (1) के खंड (ख) या उपधारा (2) या उपधारा (3) या उपधारा (5) के अधीन किया गया आदेश;
(ज) 1 अप्रैल, 1992 को या इससे पूर्व प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष या पहले के किसी निर्धारण वर्ष के किसी निर्धारण की बाबत धारा 186 की उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन फर्म का रजिस्ट्रेशन रद्द करने संबंधी आदेश;
38[(जक) धारा 201 के अधीन किया गया आदेश;]
(झ) धारा 237 के अधीन किया गया आदेश;
(ञ) निम्नलिखित धाराओं के अधीन शास्ति अधिरोपित करते हुए किया गया आदेश–
(अ) धारा 221; या
(आ) धारा 271, धारा 271क, धारा 271च, धारा 272कक या धारा 272खख;
(इ) धारा 272, धारा 272ख या धारा 273, जिस रूप में ये 1 अप्रैल, 1988 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष या पहले के किन्हीं निर्धारण वर्षों के निर्धारण के संबंध में 1 अप्रैल, 1989 से ठीक पूर्व विद्यमान थीं;
(ट) 1 जनवरी, 1997 को या उसके पश्चात् धारा 132 के अधीन आरंभ की गर्इ तलाशी या धारा 132क के अधीन अध्यपेक्षित लेखा बहियों, अन्य दस्तावेजों या किन्हीं आस्तियों की बाबत धारा 158खग के खंड (ग) के अधीन निर्धारण अधिकारी द्वारा किया गया निर्धारण आदेश;
(ठ) धारा 158खचक की उपधारा (2) के अधीन शास्ति अधिरोपित करने संबंधी आदेश;
(ड) धारा 271ख या धारा 271खख के अधीन शास्ति अधिरोपित करने संबंधी आदेश;
(ढ) धारा 271ग, धारा 271घ या धारा 271ड़ के अधीन शास्ति अधिरोपित करते हुए उपायुक्त द्वारा किया गया आदेश;
(ण) धारा 272क के अधीन शास्ति अधिरोपित करते हुए उपायुक्त या उपनिदेशक द्वारा किया गया आदेश;
(त) धारा 272कक के अधीन शास्ति अधिरोपित करते हुए उपायुक्त द्वारा किया गया आदेश;
(थ) अध्याय 21 के अधीन शास्ति अधिरोपित करने संबंधी आदेश;
(द) ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग के मामले में, जो बोर्ड मामले की प्रकृति, उसकी जटिलताओं और अन्य सुसंगत बातों को ध्यान में रखते हुए निदेश दे, इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन, उपायुक्त से भिन्न, निर्धारण अधिकारी द्वारा किया गया आदेश।
स्पष्टीकरण.–इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, जहां 1 अक्तूबर, 1998 को या उसके पश्चात् उपायुक्त का पदनाम बदलकर संयुक्त आयुक्त कर दिया गया है और उपनिदेशक का पद बदलकर संयुक्त निदेशक कर दिया गया है वहां इस उपधारा में "उपायुक्त" और "उपनिदेशक" के स्थान पर क्रमश: "संयुक्त आयुक्त" और "संयुक्त निदेशक" शब्द रखे जाएंगे।
38क[(1क) 1 अक्तूबर, 1998 को या उसके पश्चात् किन्तु 1 जून, 2000 से पूर्व धारा 201 के अधीन के आदेश के विरुद्ध व्यतिक्रमी निर्धारिती द्वारा फाइल की गर्इ प्रत्येक अपील इस धारा के अधीन फाइल की गर्इ समझी जाएगी।]
(2) धारा 246 की उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, इस अधिनियम के अधीन प्रत्येक अपील, जो नियत दिन से ठीक पूर्व उपायुक्त (अपील) के समक्ष लम्बित है और ऐसी अपीलों से उत्पन्न या उससे सम्बद्ध कोर्इ मामला, जो इस प्रकार लम्बित है, उस तारीख को आयुक्त (अपील) को अंतरित हो जाएंगे और आयुक्त (अपील) ऐसी अपील या मामले में इस प्रक्रम से आगे कार्यवाही कर सकेगा जिस प्रक्रम पर वह उस दिन था :
परन्तु अपीलाथ्र्ाी यह मांग कर सकेगा कि अपील या मामले में आगे कार्यवाही करने से पहले, पूर्व कार्यवाही या उसके किसी भाग पर पुन: विचार किया जाए या उसकी फिर से सुनवार्इ की जाए।
स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए "नियत दिन" से केन्द्रीय सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचना39 द्वारा नियत किया गया दिन अभिप्रेत है।]
37. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.10.1998 से अंत:स्थापित। मूल धारा 246क प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से अंत:स्थापित की गर्इ थी और बाद में प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से उसका लोप किया गया था।
38. वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा 1.6.2000 से अंत:स्थापित।
38क. वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा 1.6.2000 से अंत:स्थापित।
39. अधिसूचित "नियत दिन" 1.10.1998 है।
[वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा संशोधित रूप में]

