कोई दावा नहीं की जरूरत है, जहां धन की वापसी पर ब्याज
जहां किसी दावे का किया जाना आवश्यक नहीं है, वहां प्रतिदाय पर ब्याज
26244. (1) जहां धारा 240 में निर्दिष्ट आदेश के अनुसरण में निर्धारिती को कोर्इ प्रतिदाय देय है, और 27[निर्धारण] अधिकारी 28[उस मास के अंत से, जिसमें ऐसा आदेश दिया जाता है, तीन मास] की अवधि के भीतर प्रतिदाय मंजूर नहीं करता है, वहां केन्द्रीय सरकार निर्धारिती को पूर्वोक्त 29[तीन] मास की अवधि की समाप्ति के ठीक बाद की तारीख से उस तारीख तक की अवधि के लिए जिसको प्रतिदाय दिया जाए, उस प्रतिदाय पर जो देय है, 30[पंद्रह] प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से साधारण ब्याज देगी।
31[(1क) जहां उपधारा (1) में निर्दिष्ट सम्पूर्ण प्रतिदाय या उसका कोर्इ भाग किसी निर्धारिती को, किसी 32निर्धारण आदेश या शास्ति के अनुसरण में 31 मार्च, 1975 के पश्चात् उसके द्वारा कोर्इ रकम33 संदत्त किए जाने के परिणामस्वरूप देय है और ऐसी रकम या उसका कोर्इ भाग इस अधिनियम के अधीन अपील या अन्य कार्यवाही में, उस रकम से अधिक पाया जाए, जिसका ऐसा निर्धारिती इस अधिनियम के अधीन, यथास्थिति, कर या शास्ति के रूप में देने का दायी है, वहां केन्द्रीय सरकार निर्धारिती को ऐसी अधिक रकम पर उस तारीख से जिसको ऐसी रकम दी गर्इ थी, उस तारीख तक जिसको ऐसा प्रतिदाय मंजूर किया जाता है, उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट दर से साधारण ब्याज देगी :
परन्तु यह कि जहां ऐसी रकम का जिसे इस प्रकार अधिक पाया गया था, संदाय किस्तों में किया गया था, वहां ऐसा ब्याज ऐसी प्रत्येक किस्त की या ऐसी किस्त के किसी भाग की ऐसी रकम पर, जो अधिक थी, उस तारीख से, जिसको ऐसी किस्त का संदाय किया गया था, उस तारीख तक देय होगा, जिसको प्रतिदाय किया गया था :
परन्तु यह और कि इस उपधारा के अधीन कोर्इ ब्याज अपील या अन्य कार्यवाही में आदेश पारित किए जाने की तारीख से एक मास की अवधि के लिए संदेय नहीं होगा :
परन्तु यह भी कि जहां इस उपधारा के अधीन किसी निर्धारिती को कोर्इ ब्याज संदेय है, वहां इस प्रकार अधिक पार्इ गर्इ रकम के संबंध में उपधारा (1) के अधीन उसे कोर्इ ब्याज संदेय नहीं होगा।]
(2) जहां धारा 241 के उपबंधों के अधीन प्रतिदाय रोक रखा गया है; वहां केन्द्रीय सरकार प्रतिदाय की उस रकम पर पूर्वोक्त दर पर ब्याज का संदाय करेगी जो अपील या आगे की कार्यवाही के परिणामस्वरूप 34[जिस मास में धारा 241 में निर्दिष्ट आदेश दिया जाता है, उसके अंत से तीन मास] के अवसान के पश्चात् प्रारंभ होकर उस तारीख तक की अवधि के लिए जिसको प्रतिदाय मंजूर किया गया है अन्तत: देय अवधारित की गर्इ है।
35[(3) इस धारा के उपबंध 1 अप्रैल, 1989 को प्रारम्भ होने वाले निर्धारण वर्ष या किन्हीं पश्चात्वर्ती निर्धारण वर्षों के लिए किसी निर्धारण की बाबत लागू नहीं होंगे।]
26. देखिए नियम 119क.
27. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आय-कर" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
28. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1971 से "ऐसे आदेश की तारीख से छह मास" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
29. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1971 से "छह" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
30. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1984 द्वारा 1.10.1984 से "बारह" के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पहले, वित्त अधिनियम, 1972 द्वारा 1.4.1972 से "नौ" के स्थान पर "बारह", कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1967 द्वारा 1.10.1967 से "छह" के स्थान पर "नौ" और वित्त अधिनियम, 1965 द्वारा 1.4.1965 से "चार" के स्थान पर "छह" प्रतिस्थापित किया गया था।
31. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.10.1975 से अंत:स्थापित।
32. "निर्धारण आदेश" पद के अर्थ के लिए देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.
33. "रकम" पद के अर्थ के लिए देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.
34. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1971 से "धारा 241 में निर्दिष्ट आदेश की तारीख से छह मास" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
35. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से अंत:स्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा संशोधित रूप में]

