गृह सम्पत्ति से होने वाली आय में से कटौतियां
गृह सम्पत्ति से होने वाली आय में से कटौतियां
24. ''गृह संपत्ति से आय'' शीर्ष के अंतर्गत प्रभार्य आय निम्नलिखित कटौतियां करने के पश्चात् संगणित की जाएगी, अर्थात् :–
(क) ऐसी राशि, जो वार्षिक मूल्य के तीस प्रतिशत के बराबर हो;
(ख) जहां संपत्ति का अर्जन, निर्माण, मरम्मत, नवीकरण या पुन: सन्निर्माण उधार ली गर्इ पूंजी से किया गया है, वहां ऐसी पूंजी पर संदेय किसी ब्याज की रकम :
परन्तु धारा 23 की उपधारा (2) में निर्दिष्ट संपत्ति की बाबत 33ख[यथास्थिति, कटौती की रकम, या कटौती की रकमों का योग] तीस हजार रुपए से अधिक नहीं होगी :
परन्तु यह और कि जहां पहले परन्तुक में निर्दिष्ट संपत्ति का अर्जन या निर्माण 1 अप्रैल, 1999 को या उसके पश्चात् उधार ली गर्इ पूंजी से किया जाता है और ऐसा अर्जन या सन्निर्माण उस वित्तीय वर्ष की, जिसमें पूंजी उधार ली गर्इ थी, समाप्ति से पांच वर्ष के भीतर पूरा हो जाता है वहां इस खंड के अधीन 33ग[यथास्थिति, कटौती की रकम, या कटौती की रकमों का योग] दो लाख रुपए से अधिक नहीं होगी।
स्पष्टीकरण.–जहां संपत्ति का अर्जन या निर्माण उधार ली गर्इ पूंजी से किया गया है वहां उस पूर्ववर्ष के, जिसमें संपत्ति का अर्जन या निर्माण किया गया है, पहले की अवधि के लिए उधार ली गर्इ ऐसी पूंजी पर संदेय ब्याज की, यदि कोर्इ हो, जिसमें से वह भाग घटा दिया जाएगा जो इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध के अधीन कटौती के रूप में अनुज्ञात किया गया है इस खंड के अधीन उक्त पूर्ववर्ष के लिए और उसके ठीक बाद के चार पूर्ववर्षों में से प्रत्येक के लिए बराबर-बराबर किस्तों में कटौती की जाएगी :
परन्तु यह भी कि दूसरे परन्तुक के अधीन कोर्इ कटौती तब तक नहीं की जाएगी जब तक कि निर्धारिती उस व्यक्ति से, जिसको उधार ली गर्इ पूंजी पर कोर्इ ब्याज संदेय है, ऐसा कोर्इ प्रमाणपत्र नहीं दे देता जिसमें संपति के ऐसे अर्जन या निर्माण के प्रयोजन के लिए संदेय ब्याज की रकम को, या उधार ली गर्इ संपूर्ण पूंजी या उसके किसी भाग को विनिर्दिष्ट किया गया हो जो नए ऋण के रूप में प्रतिसंदाय किया जाना शेष रहता है।
स्पष्टीकरण–इस परन्तुक के प्रयोजनों के लिए "नए ऋण" पद से ऐसी पूंजी के प्रतिसंदाय के प्रयोजन के लिए निर्धारिती द्वारा उधार ली गर्इ पूंजी के पश्चात् लिया संपूर्ण ऋण या उसका कोर्इ भाग अभिप्रेत है।
33गक[परंतु यह भी कि पहले और दूसरे परंतुकों के अधीन, कटौती की रकमों का योग दो लाख रुपए से अधिक नहीं होगा।
33ख. वित्त अधिनियम, 2019 द्वारा 1.4.2020 से "कटौती की रकम" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
33ग. वित्त अधिनियम, 2019 द्वारा 1.4.2020 से "कटौती की रकम" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
33गक. वित्त अधिनियम, 2019 द्वारा 1.4.2020 से अंत:स्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2022 द्वारा संशोधित रूप में]

