गृह सम्पत्ति से होने वाली आय में से कटौतियां
गृह संपत्ति से आय में से कटौतियां*
3024. (1) "गृह संपत्ति से आय" शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन निम्नलिखित कटौतियां करने के पश्चात् संगणित की जाएगी, अर्थात् :—
31[(i) संपत्ति की 32मरम्मत और उससे किराए के संग्रहण की बाबत, ऐसी राशि जो वार्षिक मूल्य के 33[एक-चौथार्इ] भाग के बराबर हो;]
(ii) नुकसान या विनाश की जोखिम के विरुद्ध सम्पत्ति का बीमा कराने के लिए संदत्त प्रीमियम की रकम;
(iii) 34[* * *]
(iv) जहां सम्पत्ति किसी 32वार्षिक प्रभार के अधीन है 35[(जो प्रभार निर्धारिती द्वारा स्वेच्छया32 नहीं किया गया है या पूंजी प्रभार32 नहीं है)], वहां ऐसे प्रभार32 की रकम;
(v) जहां सम्पत्ति की भूमि पर किराया देय है, वहां ऐसी भूमि पर किराए की रकम;
(vi) जहां सम्पत्ति का अर्जन, निर्माण, मरम्मत, नवीकरण या पुन: निर्माण उधार ली गर्इ पूंजी से किया गया है, वहां ऐसी पूंजी पर संदेय किसी ब्याज की रकम।
36[स्पष्टीकरण.–जहां संपत्ति का अर्जन या निर्माण उधार ली गर्इ पूंजी से किया गया है वहां उस पूर्ववर्ष के, जिसमें संपत्ति का अर्जन या निर्माण किया गया है, पहले की अवधि के लिए ऐसी पूंजी पर संदेय ब्याज में से, यदि कोर्इ हो, उसका वह भाग घटा दिया जाएगा जो इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध के अधीन कटौती के रूप में अनुज्ञात किया गया है और शेष इस खंड के अधीन पूर्व के लिए और उसके ठीक बाद के चार पूर्ववर्षों में से प्रत्येक के लिए बराबर किस्तों में काटा जाएगा;]
(vii) संपत्ति के संबंध में 37भू-राजस्व 38[या राज्य सरकार द्वारा उद्गृहीत किसी अन्य कर] की बाबत37 संदत्त की गर्इ कोर्इ धन राशियां;
(viii) 39[वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1993 से लोप किया गया।]
(ix) जहां संपत्ति किराए पर दी गर्इ हो और वह वर्ष के किसी भाग के दौरान खाली रही हो वहां वार्षिक मूल्य का वह भाग, जो उस कालावधि का आनुपातिक है जिसके दौरान संपत्ति संपूर्णत: बिना अधिभोग के रही है या जहां संपत्ति भागों में किराए पर दी गर्इ वहां किसी खाली भाग के लिए समुचित वार्षिक मूल्य का वह भाग, जो उस अवधि का आनुपातिक है जिसके दौरान ऐसा भाग संपूर्णत: बिना अधिभोग के रहा हो 40[* * *]।
41[स्पष्टीकरण.–इस खंड के अधीन कटौती इस बात का ध्यान किए बिना की जाएगी कि क्या वह अवधि जिसके दौरान, यथास्थिति, संपत्ति या संपत्ति का कोर्इ भाग खाली रहा है उस अवधि के जिसमें वह किराए पर दी गर्इ है पहले आती है या बाद में;]
(x) ऐसे नियमों42 के अधीन रहते हुए जैसे इस निमित्त बनाए जाएं किसी किराएदार को किराए पर दी गर्इ संपत्ति से किराए की ऐसी रकम, जिसे निर्धारिती वसूल नहीं कर सकता।
43[(2) धारा 23 की उपधारा (2) के खंड (क) के उपखंड (i) या उपधारा (3) में निर्दिष्ट प्रकृति की संपत्ति की बाबत उपधारा (1) के अधीन कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी :
परन्तु इस उपधारा की कोर्इ भी बात धारा 23 की उपधारा (2) के खंड (क) के उपखंड (i) 44[या धारा 23 की उपधारा (3)] में निर्दिष्ट प्रकृति की संपत्ति की बाबत 45[तीस] हजार रुपए से अनधिक की रकम की उपधारा (1) के खंड (vi) के अधीन कटौती अनुज्ञात किए जाने को लागू नहीं होगी :
46[परन्तु यह और कि जहां संपत्ति 1 अप्रैल, 1999 को या उसके पश्चात् उधार ली गर्इ पूंजी से अर्जित या निर्मित की जाए और ऐसा अर्जन या निर्माण 1 अप्रैल, 47[2003] से पूर्व पूरा हो जाए वहां प्रथम परन्तुक के उपबंधों का वही प्रभाव होगा मानो 'तीस हजार रुपए' शब्दों के स्थान पर 48[एक लाख रुपए] शब्द रखे गए हों।]
(3) धारा 23 की उपधारा (2) के खंड (क) के उपखंड (ii) में निर्दिष्ट प्रकृति की संपत्ति की बाबत उपधारा (1) के अधीन कटौती योग्य कुल रकम उस धारा के अधीन यथा अवधारित संपत्ति के वार्षिक मूल्य से अधिक नहीं होगी।]
वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2002 से वर्तमान धारा 24 के स्थान पर निम्नलिखित धारा 24 रखी जाएगी :
गृह सम्पत्ति से होने वाली आय में से कटौतियां
24. "गृह संपत्ति से आय" शीर्ष के अंतर्गत प्रभार्य आय निम्नलिखित कटौतियां करने के पश्चात् संगणित की जाएगी, अर्थात् :–
(क) ऐसी राशि, जो वार्षिक मूल्य के तीस प्रतिशत के बराबर हो;
(ख) जहां संपत्ति का अर्जन, निर्माण, मरम्मत, नवीकरण या पुन: सन्निर्माण उधार ली गर्इ पूंजी से किया गया है, वहां ऐसी पूंजी पर संदेय किसी ब्याज की रकम :
परन्तु धारा 23 की उपधारा (2) में निर्दिष्ट संपत्ति की बाबत कटौती की रकम तीस हजार रुपए से अधिक नहीं होगी :
परन्तु यह और कि जहां पहले परन्तुक में निर्दिष्ट संपत्ति का अर्जन या निर्माण 1 अप्रैल, 1999 को या उसके पश्चात् उधार ली गर्इ पूंजी से किया जाता है और ऐसा अर्जन या सन्निर्माण 1 अप्रैल, 2003 से पहले पूरा हो जाता है वहां इस खंड के अधीन कटौती की रकम एक लाख पचास हजार रुपए से अधिक नहीं होगी।
स्पष्टीकरण.–जहां संपत्ति का अर्जन या निर्माण उधार ली गर्इ पूंजी से किया गया है वहां उस पूर्ववर्ष के, जिसमें संपत्ति का अर्जन या निर्माण किया गया है, पहले की अवधि के लिए उधार ली गर्इ ऐसी पूंजी पर संदेय ब्याज की, यदि कोर्इ हो, जिसमें से वह भाग घटा दिया जाएगा जो इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध के अधीन कटौती के रूप में अनुज्ञात किया गया है इस खंड के अधीन उक्त पूर्ववर्ष के लिए और उसके ठीक बाद के चार पूर्ववर्षों में से प्रत्येक के लिए बराबर-बराबर किस्तों में कटौती की जाएगी।
30. परिपत्र सं. 363, तारीख 24.6.1983 और परिपत्र सं. 28, तारीख 20.8.1969 को भी देखिये। ब्यौरे के लिए देखिये टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
सुसंगत केस लाज़ के लिए देखिये टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
*नर्इ धारा 24 के लिए (1.4.2002), देखिए पृष्ठ 1.171.
31. वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1993 से प्रतिस्थापित। इससे पूर्व खंड (i) इस प्रकार था–
"(i) मरम्मत के संबंध में,—
(क) जहां सम्पत्ति स्वामी के अधिभोग में है, या जहां सम्पत्ति किराएदार को किराए पर दी गर्इ है और मकान मालिक ने मरम्मत की लागत वहन करने का वचन दिया है, वहां वार्षिक मूल्य के 1/6 के बराबर राशि;
(ख) जहां सम्पत्ति किराएदार के पास है और उसने मरम्मत की लागत वहन करने का वचन दिया है वहाँ—
(i) किराएदार द्वारा वर्ष के लिए संदेय किराए की राशि से वार्षिक मूल्य की अधिक राशि; या
(ii) वार्षिक मूल्य के 1/6 के बराबर राशि;
इनमें से जो भी कम हो;"
32. 'मरम्मत', 'वार्षिक', 'प्रभार', 'वार्षिक प्रभार', 'स्वेच्छया' और 'पूंजी प्रभार' शब्दों/पदों के अर्थ के लिए देखिये टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.
33. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.4.1999 से "पाचंवें" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
34. वित्त अधिनियम, 1968 द्वारा 1.4.1969 से लोप किया गया।
35. यथोक्त द्वारा "जो पूंजी प्रभार नहीं है," के स्थान पर प्रतिस्थापित।
36. वित्त अधिनियम, 1983 द्वारा 1.4.1984 से अंत:स्थापित।
37. 'के संबंध में संदत्त कोर्इ धनराशियां' पद के अर्थ के लिए देखिये टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज़ मैनुअल, खंड 3.
38. वित्त अधिनियम, 1968 द्वारा 1.4.1969 से अन्त:स्थापित।
39. खंड (viii) लोप से पहले निम्न प्रकार थी:
"(viii) संपत्ति का किराया लेने के लिए खर्च की गर्इ राशि जो सम्पत्ति के वार्षिक मूल्य के 6 प्रतिशत से अधिक न हो;"
40. "; और" शब्द का वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1977 द्वारा 1.4.1977 से लोप किया गया।
41. यथोक्त द्वारा अंत:स्थापित।
42. अवसूल किराये की कटौती के लिए नियम 4 में निम्नलिखित शर्तें विहित की गर्इ हैं : (1) किराएदारी सद्भाविक हो, (2) व्यतिक्रमी किराएदार ने मकान खाली कर दिया हो, अथवा निर्धारिती द्वारा उसे संपत्ति खाली करने के लिए विवश करने संबंधी कदम उठाए गए हों, (3) व्यतिक्रमी किराएदार के पास निर्धारिती की कोर्इ अन्य संपत्ति न हो, (4) निर्धारिती ने असंदत्त किराए की वसूली के लिए कानूनी कार्यवाही चलाने के लिए सभी उचित कदम उठाये हों अथवा निर्धारण अधिकारी का समाधान कर दिया हो कि कानूनी कार्यवाहियां व्यर्थ होंगी, (5) संपत्ति का वार्षिक मूल्य जिससे असंदत्त किराए का संबंध है उस पूर्ववर्ष की निर्धारिती की निर्धारित आय में जोड़ा गया हो जिस वर्ष के लिए वह किराया देय था, और ऐसी निर्धारित आय पर कर का सम्यक्त: संदाय अदा कर दिया गया हो, (6) अनुज्ञात कटौती किसी भी दशा में कुल आय में सम्मिलित 'गृह संपत्ति से आय' शीर्ष के अन्तर्गत आय से अधिक नहीं होनी चाहिए जो इस कटौती के बिना संगणित की गर्इ हो, (7) यदि, एक वर्ष में कटौती अनुज्ञात किए जाने के बाद, निर्धारिती पश्चात्वर्ती वर्ष में असंदत्त किराया वसूल करता है तो इस प्रकार वसूल रकम प्राप्ति के वर्ष में "गृह सम्पत्ति से आय" शीर्ष के अन्तर्गत कराधेय होगी भले ही निर्धारिती उस वर्ष इस संपत्ति का मालिक रहे अथवा नहीं।
43. वित्त अधिनियम, 1986 द्वारा 1.4.1987 से निम्नलिखित उपधारा (2) के स्थान पर प्रतिस्थापित :
"(2) धारा 23 की उपधारा (3) में निर्दिष्ट प्रकृति की संपत्ति की बाबत उपधारा (1) के अधीन कटौती योग्य कुल रकम धारा 23 के अधीन यथा अवधारित संपत्ति के वार्षिक मूल्य से अधिक नहीं होगी।"
44. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1996 द्वारा 1.4.1995 से अंत:स्थापित।
45. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.4.1999 से "पंद्रह" के स्थान पर प्रतिस्थापित। "पंद्रह" शब्द वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1996 द्वारा 1.4.1997 से "दस" के स्थान पर रखा गया था और "दस" शब्द वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.4.1995 से "पांच" के स्थान पर रखा गया था।
46. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.4.2000 से अंत:स्थापित।
47. वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा 1.4.2001 से "2001" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
48. यथोक्त द्वारा "पचहत्तर हजार रुपए" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा संशोधित रूप में]

