कुछ लाभांश के संबंध में कुछ धर्मार्थ संस्थाओं या धन को राहत
41[कुछ लाभांशों की बाबत कुछ पूर्त संस्थाओं या निधियों को राहत
236क. (1) 42[जहां किसी कंपनी की शेयर पूंजी का पचहत्तर प्रतिशत पूरे पूर्ववर्ष पूर्त प्रयोजन के लिए भारत में स्थापित ऐसी संस्था या निधि द्वारा जिसके लाभांश की आय पर धारा 11 के अधीन छूट प्राप्त है फायदाप्रद रूप में धारित रहा है, वहां], उसके द्वारा संदेय कर के प्रति, यदि कोर्इ हो, उस संस्था या निधि को 43[ऐसी कंपनी द्वारा] 1 अप्रैल, 44[1966] को या उसके पश्चात् आरंभ होने वाले किसी निर्धारण वर्ष के सुसंगत पूर्ववर्ष के दौरान घोषित या वितरित लाभांशों से (जो अधिमान अंशों पर लाभांशों से भिन्न हैं) उसकी आय की बाबत उपधारा (3) के उपबंधों के संगणित परिकलित राशि क्रेडिट की जाएगी और जहां इस प्रकार संगणित, क्रेडिट की गर्इ रकम उक्त संस्था या निधि द्वारा संदेय कर से, यदि कोर्इ हो, अधिक है, वहां अधिक वाली राशि लौटा दी जाएगी।
45[(2) उपधारा (1) के अधीन क्रेडिट के रूप में दी जाने वाली रकम, वह राशि होगी जिसका वार्षिक वित्त अधिनियम के उपबंधों के अधीन कंपनी द्वारा संदेय कर की रकम के साथ अपने द्वारा लाभांशों के वितरण की सुसंगत रकम के प्रति निर्देश में वही अनुपात है, जो उस संस्था या निधि द्वारा कंपनी से प्राप्त लाभांशों (जो अधिमान अंशों पर लाभांश से भिन्न है) रकम का पूर्ववर्ष के दौरान कंपनी द्वारा घोषित या वितरित लाभांश का (जो अधिमान अंशों पर लाभांश से भिन्न हों) कुल रकम से है।
स्पष्टीकरण.–इस धारा की उपधारा (2) और धारा 280यख में "लाभांशों के वितरण की सुसंगत रकम" पद का वही अर्थ है, जो सुसंगत वर्ष के वित्त अधिनियम में उसका है।]]
41. प्रत्यक्ष कर (संशोधन) अधिनियम, 1964 द्वारा 1.4.1964 से अंत:स्थापित।
42. वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "धारा 104 की उपधारा (2) के खंड (iii) में निर्दिष्ट संस्था या निधि के मामले में" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
43. यथोक्त द्वारा "ऐसी कंपनी द्वारा, जो उक्त खंड में निर्दिष्ट है" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
44. वित्त अधिनियम, 1966 द्वारा 1.4.1966 से "1964" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
45. यथोक्त द्वारा प्रतिस्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2007 तथा कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 2006 द्वारा संशोधित रूप में]

