आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 234ग

अग्रिम कर के आस्थगन के लिए ब्याज

धारा

धारा संख्या

234ग

अध्याय शीर्षक

अध्याय XVII - कर संग्रह और वसूली

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2022

अग्रिम कर के आस्थगन के लिए ब्याज

अग्रिम कर के आस्थगन के लिए ब्याज

अग्रिम कर के आस्थगन के लिए ब्याज

234ग. (1) जहां किसी वित्तीय वर्ष में,—

() 17[खंड () में निर्दिष्ट निर्धारिती] से भिन्न कोई निर्धारिती जो धारा 208 के अधीन अग्रिम कर का संदाय करने का दायी है ऐसे कर का संदाय करने में असफल रहता है, या—

(i) निर्धारिती द्वारा अपनी चालू आय पर 15 जून को या उसके पूर्व संदत्त अग्रिम कर, विवरणी में दी गई आय पर देय कर के पन्द्रह प्रतिशत से कम है अथवा 15 सितंबर को या उसके पूर्व संदत्त ऐसे अग्रिम कर की रकम, विवरणी में दी गई आय पर देय कर के पैंतालीस प्रतिशत से कम है अथवा 15 दिसंबर को या उसके पूर्व संदत्त से अग्रिम कर की रकम विवरणी में दी गई आय पर देय कर के पचहत्तर प्रतिशत से कम है वहां कंपनी, विवरणी में दी गई आय पर देय कर के, यथास्थिति, पन्द्रह प्रतिशत या पैंतालीस प्रतिशत या पचहत्तर प्रतिशत से कम पड़ने वाली रकम पर तीन मास की अवधि के लिए एक प्रतिशत प्रतिमास की दर से साधारण ब्याज का संदाय करने की दायी होगी;

(ii) निर्धारिती द्वारा अपनी चालू आय पर 15 मार्च को या उसके पूर्व संदत्त अग्रिम कर, विवरणी में दी गई आय पर देय कर से कम है वहां निर्धारिती विवरणी में दी गई आय पर देय कर की कम पड़ने वाली रकम पर एक प्रतिशत की दर से साधारण ब्याज का संदाय करने का दायी होगा :

परंतु यदि निर्धारिती द्वारा अपनी चालू आय पर 15 जून या 15 सितंबर को या उसके पूर्व संदत्त अग्रिम कर विवरणी में दी गई आय पर देय कर से, यथास्थिति, बारह प्रतिशत या छत्तीस प्रतिशत से कम नहीं है तो वह उन तारीखों को कम पड़ने वाली रकम पर किसी ब्याज का संदाय करने का दायी नहीं होगा;

(ख) 18[ऐसा कोई निर्धारिती, जो, यथास्थिति, धारा 44कघ या धारा 44कघक की उपधारा (1) के उपबंधों के अनुसार लाभ और अभिलाभ घोषित करता है], जो धारा 208 के अधीन अग्रिम कर का संदाय करने का दायी है ऐसे कर का संदाय करने में असफल रहता है या निर्धारिती द्वारा अपनी चालू आय पर 15 मार्च को या उसके पूर्व संदत्त अग्रिम कर, विवरणी में दी गई आय पर देय कर से कम है वहां निर्धारिती विवरणी में दी गई आय पर देय कर की कम पड़ने वाली रकम पर एक प्रतिशत की दर से साधारण ब्याज का संदाय करने का दायी होगा :

परन्तु इस उपधारा की कोई बात विवरणी में दी गई आय पर देय कर के भुगतान में हुई किसी कमी को वहां लागू नहीं होगी, जहां ऐसी कमी—

() पूंजी लाभ की रकम; या

() धारा 2 के खंड (24) के उपखंड (ix) में निर्दिष्ट प्रकृति की आय; या

() "कारबार या वृत्ति से लाभ और अभिलाभ" शीर्ष के अधीन उन मामलों में आय जहां आय उक्त शीर्ष के अधीन पहली बार प्रोद्भूत या 19[उद्भूत होती है; या]

20[() लाभांश आय की रकम]

के कम प्राक्कलन या प्राक्कलन न करने के कारण हुई है और निर्धारिती ने, यथास्थिति, खंड () या खंड () या खंड () 20[या खंड ()] में निर्दिष्ट आय के यदि ऐसी आय कुल आय का भाग होती संबंध में संदेय कर की संपूर्ण रकम का ऐसे अग्रिम कर की बकाया किस्तों के भाग के रूप में, जो देय हैं या जहां ऐसी कोई किस्तें देय नहीं है वहां वित्तीय वर्ष के मार्च के इकतीसवें दिन तक भुगतान कर दिया है :

परन्तु यह और कि इस उपधारा की कोई बात विवरणी में दी गई आय पर देय कर के भुगतान में हुई किसी कमी को वहां लागू नहीं होगी, जहां ऐसी कमी कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 2000 (2001 का 1) द्वारा यथासंशोधित वित्त अधिनियम, 2000 (2000 का 10) की धारा 2 के अधीन अधिभार की दर में वृद्धि के कारण हुई है और निर्धारिती ने कम पड़ी रकम का 15 जून, 2000, 15 सितंबर, 2000 और 15 दिसंबर, 2000 को देय अग्रिम कर की किस्त के संबंध में 15 मार्च, 2001 को या उसके पूर्व भुगतान कर दिया है :

परन्तु यह भी कि इस उपधारा की कोई बात विवरणी में दी गई आय पर देय कर के भुगतान में हुई किसी कमी को वहां लागू नहीं होगी, जहां ऐसी कमी कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 2001 (2001 का 4) द्वारा यथासंशोधित वित्त अधिनियम, 2000 (2000 का 10) की धारा 2 के अधीन अधिभार की दर में वृद्धि के कारण हुई है और निर्धारिती ने, कम पड़ी रकम का 15 जून, 2000, 15 सितंबर, 2000 और 15 दिसंबर, 2000 को देय अग्रिम कर की किस्त के संबंध में 15 मार्च, 2001 को या उसके पूर्व भुगतान कर दिया है।

20कक[स्पष्टीकरण 1]इस धारा में "विवरणी में दी गई आय पर देय कर" से अभिप्रेत है उस वित्तीय वर्ष के, जिसमें अग्रिम कर का संदाय किया जाता है या संदेय है, ठीक पश्चात्वर्ती अपै्रल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष के लिए निर्धारिती द्वारा दी गई आय की विवरणी में घोषित कुल आय पर प्रभार्य कर, जो कि,—

(i) ऐसी किसी आय पर, जो ऐसी कटौती या संग्रहण के अधीन है और जिसे ऐसी कुल आय की संगणना करने में हिसाब में लिया गया है, अध्याय 17 के उपबंधों के अनुसार स्रोत पर कटौती योग्य या संग्रहण योग्य किसी कर;

20क[(iक) धारा 89 के अधीन अनुज्ञात कर की कोई राहत;]

(ii) भारत के बाहर किसी देश में संदत्त कर के मद्दे पर धारा 90 के अधीन अनुज्ञात कर की किसी राहत;

(iii) धारा 90क में निर्दिष्ट भारत के बाहर किसी विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्र में संदत्त कर के मद्दे उस धारा के अधीन अनुज्ञात कर की किसी राहत;

(iv) भारत के बाहर किसी देश में संदत्त कर के मद्दे संदेय भारतीय आय-कर से धारा 91 के अधीन अनुज्ञात किसी कटौती; और

(v) धारा 115ञकक या धारा 115ञघ के उपबंधों के अनुसार मुजरा किए जाने के लिए अनुज्ञात किसी कर प्रत्यय,

की रकम को घटा कर आए।

20कख[स्पष्टीकरण 2— इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, "लाभांश" पद का वही अर्थ होगा, जो उसका धारा 2 के खंड (22) में है, किन्तु इसके अंतर्गत उसका खंड (ङ) सम्मिलित नहीं होगा।]

(2) इस धारा के उपबंध 1 अप्रैल, 1989 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष और पश्चात्वर्ती निर्धारण वर्षों से संबंधित निर्धारणों के संबंध में लागू होंगे।

 

20कक. वित्त अधिनियम, 2021 द्वारा 1.4.2021 से स्पष्टीकरण को स्पष्टीकरण 1 के रूप में संख्यकित किया गया।

20कख. वित्त अधिनियम, 2021 द्वारा 1.4.2021 से अंत:स्थापित ।

17. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2017 से "धारा 44कघ में निर्दिष्ट पात्र कारबार के संबंध में किसी पात्र निर्धारिती" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

18. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2017 से "धारा 44कघ में निर्दिष्ट पात्र कारबार के संबंध में कोई पात्र निर्धारिती" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

19. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2017 से "उद्भूत होती है;" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

20. वित्त अधिनियम, 2021 द्वारा 1.4.2021 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व खंड (घ) निम्न प्रकार था

“(घ) धारा 115खखघक की उपधारा (1) में निर्दिष्ट प्रकृति की आय”

20क. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2019 द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से 1.4.2007 से अंत:स्थापित।

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2022 द्वारा संशोधित रूप में]

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