अग्रिम कर के आस्थगन के लिए ब्याज
24[अग्रिम कर के आस्थगन के लिए ब्याज
234ग. (1) 25[जहां किसी वित्तीय वर्ष में,–
(क) ऐसी कंपनी, जो धारा 208 के अंतर्गत अग्रिम कर का भुगतान करने के लिए दायी है, ऐसे कर का भुगतान करने में असफल रहती है या–
(i) कंपनी द्वारा अपनी चालू आय पर जून के पंद्रहवें दिन को या उसके पूर्व संदत्त अग्रिम कर, विवरणी में दी गर्इ आय पर देय कर के पंद्रह प्रतिशत से कम है या सितंबर के पंद्रहवें दिन को या उसके पूर्वसंदत्त ऐसे अग्रिम कर की रकम, विवरणी में दी गर्इ आय पर देय कर के पैेंतालीस प्रतिशत से कम है अथवा दिसंबर के पंद्रहवें दिन को या उसके पूर्व संदत्त ऐसे अग्रिम कर की रकम, विवरणी में दी गर्इ आय पर देय कर के पचहत्तर प्रतिशत से कम है, वहां कंपनी विवरणी में दी गर्इ आय पर देय कर के, यथास्थिति, पंद्रह प्रतिशत या पैंतालीस प्रतिशत या पचहत्तर प्रतिशत से कम पड़ने वाली रकम पर तीन मास की अवधि के लिए 26[एक] प्रतिशत प्रतिमास की दर से साधारण ब्याज का भुगतान करने की दायी होगी27;
(ii) कंपनी द्वारा अपनी चालू आय पर 15 मार्च को या उसके पूर्व संदत्त अग्रिम कर, विवरणी में दी गर्इ आय पर देय कर से कम है, वहां कंपनी विवरणी में दी गर्इ आय पर देय कर की कम पड़ने वाली रकम पर 28[एक] प्रतिशत की दर से साधारण ब्याज देने की दायी होगी :
परन्तु यदि कंपनी द्वारा अपनी चालू आय पर जून के पंद्रहवें दिन या सितंबर के पंद्रहवें दिन को या उसके पूर्व संदत्त अग्रिम कर विवरणी में दी गर्इ आय पर देय कर से, यथास्थिति, बारह प्रतिशत या छत्तीस प्रतिशत से कम नहीं है तो वह उन तारीखों को पड़ने वाली रकम पर ब्याज देने की दायी नहीं होगी :
(ख) कंपनी से भिन्न, ऐसा निर्धारिती जो धारा 208 के अंतर्गत अग्रिम कर का भुगतान करने का दायी है ऐसे कर का भुगतान करने में असफल रहता है या–
(i) निर्धारिती द्वारा अपनी चालू आय पर सितंबर के पंद्रहवें दिन को या उसके पूर्व संदत्त अग्रिम कर, विवरणी में दी गर्इ आय पर देय कर के तीस प्रतिशत से कम है अथवा दिसंबर के पंद्रहवें दिन को या उसके पूर्व संदत्त ऐसे अग्रिम कर की रकम विवरणी में दी गर्इ आय पर देय कर के साठ प्रतिशत से कम है, वहां निर्धारिती विवरणी में दी गर्इ आय पर देय कर के, यथास्थिति, तीस प्रतिशत या साठ प्रतिशत से कम पड़ने वाली रकम पर तीन मास की अवधि के लिए 26[एक] प्रतिशत प्रतिमास की दर से साधारण ब्याज देने का दायी होगा;
(ii) निर्धारिती द्वारा अपनी चालू आय पर मार्च के पंद्रहवें दिन को या उसके पूर्व संदत्त अग्रिम कर, विवरणी में दी गर्इ आय पर देय कर से कम है, वहां निर्धारिती विवरणी में दी गर्इ आय पर देय कर की कम पड़ने वाली रकम पर 28क[एक] प्रतिशत की दर से साधारण ब्याज का दायी होगा :]
29[परन्तु इस उपधारा की कोर्इ बात विवरणी में दी गर्इ आय पर देय कर के भुगतान में हुर्इ किसी कमी को वहां लागू नहीं होगी, जहां ऐसी कमी–
(क) पूंजी लाभ की रकम; या
(ख) धारा 2 के खंड (24) के उपखंड (ix) में निर्दिष्ट प्रकृति की आय,
के कम प्राक्कलन या प्राक्कलन न करने के कारण हुर्इ है और निर्धारिती ने, यथास्थिति, खंड (क) या खंड (ख) में निर्दिष्ट आय के यदि ऐसी आय कुल आय का भाग होती संबंध में संदेय कर की संपूर्ण रकम का 30[ऐसे अग्रिम कर की बकाया किस्तों के भाग के रूप में, जो देय हैं या जहां ऐसी कोर्इ किस्तें देय नहीं है] वहां वित्तीय वर्ष के मार्च के इकतीसवें दिन तक भुगतान कर दिया है :]
31[परन्तु यह और कि इस उपधारा की कोर्इ बात विवरणी में दी गर्इ आय पर देय कर के भुगतान में हुर्इ किसी कमी को वहां लागू नहीं होगी, जहां ऐसी कमी कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 2000 (2001 का 1) द्वारा यथासंशोधित वित्त अधिनियम, 2000 (2000 का 10) की धारा 2 के अधीन अधिभार की दर में वृद्धि के कारण हुर्इ है और निर्धारिती ने कम पड़ी रकम का 15 जून, 2000, 15 सितंबर, 2000 और 15 दिसंबर, 2000 को देय अग्रिम कर की किस्त के संबंध में 15 मार्च, 2001 को या उसके पूर्व भुगतान कर दिया है :]
32[परन्तु यह भी कि इस उपधारा की कोर्इ बात विवरणी में दी गर्इ आय पर देय कर के भुगतान में हुर्इ किसी कमी को वहां लागू नहीं होगी, जहां ऐसी कमी कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 2001 (2001 का 4) द्वारा यथासंशोधित वित्त अधिनियम, 2000 (2000 का 10) की धारा 2 के अधीन अधिभार की दर में वृद्धि के कारण हुर्इ है और निर्धारिती ने, कम पड़ी रकम का 15 जून, 2000, 15 सितंबर, 2000 और 15 दिसंबर, 2000 को देय अग्रिम कर की किस्त के संबंध में 15 मार्च, 2001 को या उसके पूर्व भुगतान कर दिया है।]
33[स्पष्टीकरण.–इस धारा में "विवरणी में दी गर्इ आय पर देय कर" से अभिप्रेत है उस वित्तीय वर्ष के, जिसमें अग्रिम कर का संदाय किया जाता है या संदेय है, ठीक पश्चात्वर्ती अपै्रल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष के लिए निर्धारिती द्वारा दी गर्इ आय की विवरणी में घोषित कुल आय पर प्रभार्य कर, जो कि,–
(i) ऐसी किसी आय पर, जो ऐसी कटौती या संग्रहण के अधीन है और जिसे ऐसी कुल आय की संगणना करने में हिसाब में लिया गया है, अध्याय 17 के उपबंधों के अनुसार स्रोत पर कटौती योग्य या संग्रहण योग्य किसी कर;
(ii) भारत के बाहर किसी देश में संदत्त कर के मद्दे पर धारा 90 के अधीन अनुज्ञात कर की किसी राहत;
(iii) धारा 90क में निर्दिष्ट भारत के बाहर किसी विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्र में संदत्त कर के मद्दे उस धारा के अधीन अनुज्ञात कर की किसी राहत;
(iv) भारत के बाहर किसी देश में संदत्त कर के मद्दे संदेय भारतीय आय-कर से धारा 91 के अधीन अनुज्ञात किसी कटौती; और
(v) धारा 115ञकक 33क[या धारा 115ञघ] के उपबंधों के अनुसार मुजरा किए जाने के लिए अनुज्ञात किसी कर प्रत्यय,
की रकम को घटा कर आए।]
(2) इस धारा के उपबंध 1 अप्रैल, 1989 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष और पश्चात्वर्ती निर्धारण वर्षों से संबंधित निर्धारणों के संबंध में लागू होंगे।]]
24. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से अंत:स्थापित।
25. वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.4.1995 से ‘‘जहां किसी वित्तीय वर्ष में’’ शब्दों से आरंभ होने वाले और "साधारण ब्याज देने की दायी होगी" से समाप्त होने वाले भाग के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व कोट किया गया भाग, जो वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.4.1989 से भूतलक्षी प्रभाव से और वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.6.1992 से संशोधित किया गया, निम्नानुसार था :
‘‘जहां किसी वित्तीय वर्ष में, ऐसा निर्धारिती जो धारा 208 के अंतर्गत अग्रिम कर का भुगतान करने का दायी है, ऐसे कर का भुगतान करने में असफल रहा है या जहां निर्धारिती द्वारा अपनी चालू आय पर सितंबर के पंद्रहवें दिन को या उसके पूर्व संदत्त अग्रिम कर विवरणी में दी गर्इ आय पर देय कर के तीस प्रतिशत से कम है या दिसंबर के पन्द्रवें दिन को या उसके पूर्व संदत्त ऐसे अग्रिम कर की रकम विवरणी में दी गर्इ आय पर देय कर के साठ प्रतिशत से कम है, वहां निर्धारिती विवरणी में दी गर्इ आय पर देय कर के, यथास्थिति, तीस प्रतिशत या साठ प्रतिशत से कम पड़ने वाली रकम पर तीन मास की अवधि के लिए डेढ़ प्रतिशत प्रतिमास की दर से साधारण ब्याज का भुगतान करने का दायी होगा।’’
26. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 2003 द्वारा 8.9.2003 से ‘‘सवा’’ के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.6.2001 से ‘‘डेढ़’’ के स्थान पर "सवा" प्रतिस्थापित किया गया था।
27. ‘‘दायी होगी’’ पद के अर्थ के लिए सम्बंधित केस लाज़ देखिए।
28. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 2003 द्वारा 8.9.2003 से ‘‘सवा’’ के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.6.2001 से ‘‘डेढ़’’ के स्थान पर "सवा" प्रतिस्थापित किया गया था।
28क. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 2003 द्वारा 8.9.2003 से ‘‘सवा’’ के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.6.2001 से ‘‘डेढ़’’ के स्थान पर "सवा" प्रतिस्थापित किया गया था।
29. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से अंत:स्थापित।
30. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1996 द्वारा 1.4.1997 से ‘‘अग्रिम कर की किस्त का, जो तुरंत देय है या जहां ऐसी कोर्इ किस्त ऐसे देय नहीं है’’ के स्थान पर प्रतिस्थापित।
31. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 2000 द्वारा 4.1.2001 से दूसरा परन्तुक अंत:स्थापित। इससे पूर्व, दूसरा परंतुक, जिसे कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1991 द्वारा 15.1.1991 से अंत:स्थापित किया गया था और बाद में वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1996 द्वारा 1.4.1997 से जिसका लोप किया गया था, निम्नानुसार था :
‘‘परन्तु यह और कि इस उपधारा की कोर्इ बात विवरणी में दी गर्इ आय पर देय कर के भुगतान में हुर्इ किसी कमी को वहां लागू नहीं होगी, जहां ऐसी कमी,–
(क) धारा 32 की उपधारा (1) के खंड (ii) के तीसरे परंतुक के अंतर्गत कटौती की रकम निर्बंधित कर देने के कारण हुर्इ है;
(ख) कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1991 द्वारा यथासंशोधित वित्त अधिनियम, 1990 (1990 का 12) की धारा 2 के अंतर्गत अधिभार की दर में वृद्धि के कारण हुर्इ है,
और निर्धारिती ने कम पड़ी रकम का,–
(i) जहां वह देशी कंपनी है, और–
(1) वह मामला खंड (क) के अंतर्गत आता है, अग्रिम कर की किस्त के रूप में, जो तुरंत देय है, भुगतान कर दिया है;
(2) वह मामला खंड (ख) के अंतर्गत आता है, 15 सितंबर, 1990 को देय अग्रिम कर की किस्त की दशा में, 15 नवंबर, 1990 को या उसके पूर्व भुगतान कर दिया है,
(ii) जहां वह देशी कंपनी नहीं है और–
(1) वह मामला खंड (क) के अंतर्गत आता है, अग्रिम कर की किस्त के रूप में, जो तुरंत देय है, भुगतान कर दिया है;
(2) वह मामला खंड (ख) के अंतर्गत आता है, 15 मार्च, 1991 को या उसके पूर्व देय अग्रिम कर की किस्त के रूप में भुगतान कर दिया है।’’
32. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 2001 द्वारा 3.2.2001 से तीसरा परन्तुक अंत:स्थापित।
33. वित्त अधिनियम, 2006 द्वारा 1.4.2007 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1991 द्वारा 15.1.1991 से तथा वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1989 से भूतलक्षी प्रभाव से संशोधित स्पष्टीकरण इस प्रकार था :
"स्पष्टीकरण.–इस धारा में ‘‘विवरणी में दी गर्इ आय पर देय कर’’ से अभिप्रेत है उस वित्तीय वर्ष के जिसमें अग्रिम कर का संदाय किया जाता है या संदेय है ठीक पश्चात्वर्ती अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष के लिए निर्धारिती द्वारा दी गर्इ आय की विवरणी में घोषित कुल आय पर प्रभार्य कर जो कि किसी ऐसी आय पर जो ऐसी कटौती या संग्रहण के अधीन है और जिसे ऐसी कुल आय की संगणना करने में हिसाब में लिया गया है, अध्याय 17 के उपबंधों के अनुसार स्रोत पर कटौती या संग्रहण योग्य कर की रकम को घटाकर आए।"
33क. वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.4.2013 से अंत:स्थापित।
[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2014 द्वारा संशोधित रूप में]

