अग्रिम कर के भुगतान में व्यतिक्रम के लिए ब्याज
अग्रिम कर के भुगतान में व्यतिक्रम के लिए ब्याज
234ख. (1) इस धारा के अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए, जहां किसी वित्तीय वर्ष में कोई ऐसा निर्धारिती जो धारा 208 के अंतर्गत अग्रिम कर का भुगतान करने का दायी है, ऐसे कर का भुगतान करने में असफल हो गया है या जहां धारा 210 के उपबंधों के अंतर्गत ऐसे निर्धारिती द्वारा संदत्त अग्रिम कर निर्धारित कर के नब्बे प्रतिशत से कम है, वहां निर्धारिती ऐसे वित्तीय वर्ष के ठीक बाद के अप्रैल के प्रथम दिन से धारा 143 की उपधारा (1) के अंतर्गत कुल आय के अवधारण की तारीख तक और जहां कोई नियमित निर्धारण किया जाता है, वहां ऐसे नियमित निर्धारण की तारीख तक की अवधि में समाविष्ट प्रत्येक मास या मास के किसी भाग के लिए, यथास्थिति, निर्धारित कर के बराबर रकम पर या उतनी रकम पर जितनी से उक्त रूप में संदत्त अग्रिम कर निर्धारित कर से कम पड़ जाता है एक प्रतिशत की दर से साधारण ब्याज देने के लिए दायी होगा।
स्पष्टीकरण 1.—इस धारा में "निर्धारित कर" से अभिप्रेत है धारा 143 की उपधारा (1) के अंतर्गत अवधारित कुल आय पर कर और जहां कोई नियमित निर्धारण किया जाता है वहां ऐसे नियमित निर्धारण के अंतर्गत अवधारित कुल आय पर कर, जोकि,—
(i) ऐसी किसी आय पर, जो ऐसी कटौती या संग्रहण के अधीन है और जिसे ऐसी कुल आय की संगणना करने में हिसाब में लिया गया है, अध्याय 17 के उपबंधों के अनुसार स्रोत पर काटे गए या संगृहीत किसी कर;
16ड़[(iक) धारा 89 के अधीन अनुज्ञात कर की कोई राहत;]
(ii) भारत के बाहर किसी देश में संदत्त कर के मद्दे पर धारा 90 के अधीन अनुज्ञात कर की किसी राहत;
(iii) धारा 90क में निर्दिष्ट भारत के बाहर किसी विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्र में संदत्त कर के मद्दे उस धारा के अधीन अनुज्ञात कर की किसी राहत;
(iv) भारत के बाहर किसी देश में संदत्त कर के मद्दे संदेय भारतीय आय-कर से धारा 91 के अधीन अनुज्ञात किसी कटौती; और
(v) धारा 115ञकक या धारा 115ञघ के उपबंधों के अनुसार मुजरा किए जाने के लिए अनुज्ञात किसी कर प्रत्यय,
की रकम को घटा कर आए।
स्पष्टीकरण 2.—जहां किसी निर्धारण वर्ष के संबंध में धारा 147 या धारा 153क के अंतर्गत कोई निर्धारण पहली बार किया जाता है, वहां इस प्रकार किए गए निर्धारण को इस धारा के प्रयोजनों के लिए नियमित निर्धारण माना जाएगा।
16ग[स्पष्टीकरण 3 - स्पष्टीकरण 1 और उपधारा (3) में,-
(i) “धारा 143 की उपधारा (1) के अधीन यथा अवधारित कुल आय पर कर” में धारा 140ख या धारा 143 के अधीन संदेय अतिरिक्त आय-कर, यदि कोई हो, सम्मिलित नहीं होगा ; और
(ii) “नियमित निर्धारण के अधीन यथा अवधारित कुल आय पर कर” में धारा 140ख के अधीन संदेय अतिरिक्त आय-कर सम्मिलित नहीं होगा।।]
(2) जहां धारा 143 की उपधारा (1) के अंतर्गत कुल आय के अवधारण की या नियमित निर्धारण के पूरा होने की तारीख के पूर्व, निर्धारिती द्वारा धारा 140क के अंतर्गत या अन्यथा कर का भुगतान कर दिया जाता है, वहां—
(i) ब्याज इस धारा के पूर्वगामी उपबंधों के अनुसार उस तारीख तक परिकलित किया जाएगा, जिसको कर का इस प्रकार भुगतान किया जाता है और उसमें से इस धारा के अंतर्गत प्रभार्य ब्याज के प्रति धारा 140क अंतर्गत संदत्त ब्याज को, यदि कोई है, घटा दिया जाएगा;
(ii) इसके पश्चात् उस रकम पर जितनी से इस प्रकार संदत्त कर और साथ ही संदत्त अग्रिम कर निर्धारित कर से कम पड़ जाता है, पूर्वोक्त दर से परिकलित किया जाएगा।
(2क)(क) जहां किसी निर्धारण वर्ष के लिए धारा 245ग की उपधारा (1) के अधीन आवेदन किया हो, वहां निर्धारिती उस उपधारा में निर्दिष्ट आय-कर की अतिरिक्त रकम पर ऐसे निर्धारण वर्ष के 1 अप्रैल से प्रारंभ होने वाली और ऐसा आवेदन करने की तारीख को समाप्त होने वाली अवधि में समाविष्ट प्रत्येक मास या किसी मास के भाग के लिए एक प्रतिशत की दर से साधारण ब्याज का संदाय करने के लिए दायी होगा;
(ख) जहां, किसी निर्धारण वर्ष के लिए धारा 245घ की उपधारा (4) के अधीन समझौता आयोग के किसी आदेश के परिणामस्वरूप, धारा 245ग की उपधारा (1) के अधीन आवेदन पत्र में प्रकट की गई कुल आय की रकम में वृद्धि हो जाती है, वहां निर्धारिती, ऐसे निर्धारण वर्ष के 1 अप्रैल से प्रारंभ होने वाली और ऐसे आदेश की तारीख को समाप्त होने वाली अवधि में समाविष्ट प्रत्येक मास या किसी मास के भाग के लिए उस रकम पर जितनी से ऐसे आदेश के आधार पर अवधारित कुल आय पर कर, धारा 245ग की उपधारा (1) के अधीन फाइल किए गए आवेदन पत्र में प्रकट किए गए कुल आय पर कर से अधिक हो जाता है, एक प्रतिशत की दर से साधारण ब्याज का संदाय करने का दायी होगा;
(ग) जहां धारा 245घ की उपधारा (6ख) के अधीन किसी आदेश के परिणामस्वरूप वह रकम, जिस पर खंड (ख) के अधीन ब्याज संदेय था, यथास्थिति, बढ़ाई गई है या घटाई गई है, वहां ब्याज तदनुसार बढ़ा दिया जाएगा या घटा दिया जाएगा।
(3) जहां धारा 147 या धारा 153क के अधीन पुन: निर्धारण या पुन:संगणना के आदेश के परिणामस्वरूप, ऐसी रकम जिस पर उपधारा (1) के अधीन किसी वित्तीय वर्ष के लिए अग्रिम कर के संदाय में कमी की बाबत ब्याज संदेय था, बढ़ाई जानी है, वहां निर्धारिती, ठीक अगले ऐसे वित्तीय वर्ष के 1 अप्रैल को प्रारंभ होने वाली और धारा 147 या धारा 153क के अधीन पुन:निर्धारण या पुन:संगणना की तारीख को समाप्त होने वाली अवधि में समाविष्ट उस रकम पर, जितनी से ऐसे पुन:निर्धारण या पुन:संगणना के आधार पर अवधारित कुल आय पर कर, यथास्थिति, धारा 143 की उपधारा (1) के अधीन या उपधारा (1) में यथा निर्दिष्ट नियमित निर्धारण के आधार पर, कर से अधिक हो जाता है, एक प्रतिशत की दर से साधारण ब्याज संदाय करने का दायी होगा।
(4) जहां धारा 154 या धारा 155 या धारा 250 या धारा 254 या धारा 260 या धारा 262 या धारा 263 या धारा 264 के अधीन किसी आदेश के परिणामस्वरूप, ऐसी रकम, जिस पर उपधारा (1) या उपधारा (3) के अंतर्गत ब्याज संदेय था, यथास्थिति, बढ़ाई गई है, या घटाई गई है वहां ब्याज तदनुसार बढ़ा या घटा दिया जाएगा और—
(i) किसी ऐसी दशा में, जहां ब्याज बढ़ाया जाता है वहां निर्धारण अधिकारी, संदेय राशि, उल्लिखित करते हुए, विहित प्ररूप में मांग की सूचना की तामील निर्धारिती पर करेगा और ऐसी मांग की सूचना को धारा 156 के अंतर्गत सूचना समझा जाएगा और इस अधिनियम के उपबंध तदनुसार लागू होंगे;
(ii) किसी ऐसी दशा में, जहां ब्याज घटाया जाता है वहां संदत्त अधिक ब्याज का, यदि कोई हो, प्रतिदाय किया जाएगा।
(5) इस धारा के उपबंध 1 अप्रैल, 1989 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष और पश्चात्वर्ती निर्धारण वर्षों के लिए निर्धारणों के संबंध में लागू होंगे।
[वित्त अधिनियम, 2023 द्वारा संशोधित रूप में]

