आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 234ख

अग्रिम कर के भुगतान में व्यतिक्रम के लिए ब्याज

धारा

धारा संख्या

234ख

अध्याय शीर्षक

अध्याय XVII - कर संग्रह और वसूली

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2013

अग्रिम कर के भुगतान में व्यतिक्रम के लिए ब्याज

अग्रिम कर के भुगतान में व्यतिक्रम के लिए ब्याज

10[अग्रिम कर के भुगतान में व्यतिक्रम के लिए ब्याज

234ख. (1) इस धारा के अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए, जहां किसी वित्तीय वर्ष में कोर्इ ऐसा निर्धारिती जो धारा 208 के अंतर्गत अग्रिम कर का भुगतान करने का दायी है, ऐसे कर का भुगतान करने में असफल हो गया है या जहां धारा 210 के उपबंधों के अंतर्गत ऐसे निर्धारिती द्वारा संदत्त अग्रिम कर निर्धारित कर के नब्बे प्रतिशत से कम है, वहां निर्धारिती ऐसे वित्तीय वर्ष के ठीक बाद के अप्रैल के प्रथम दिन से 11[धारा 143 की उपधारा (1) के अंतर्गत कुल आय के अवधारण की तारीख तक 12[और जहां कोर्इ नियमित निर्धारण किया जाता है, वहां ऐसे नियमित निर्धारण की तारीख तक]] की अवधि में समाविष्ट प्रत्येक मास या मास के किसी भाग के लिए, यथास्थिति, निर्धारित कर के बराबर रकम पर या उतनी रकम पर जितनी से उक्त रूप में संदत्त अग्रिम कर निर्धारित कर से कम पड़ जाता है 13[एक] प्रतिशत की दर से साधारण ब्याज देने के लिए दायी होगा14

15[स्पष्टीकरण 1.–इस धारा में "निर्धारित कर" से अभिप्रेत है धारा 143 की उपधारा (1) के अंतर्गत अवधारित कुल आय पर कर और जहां कोर्इ नियमित निर्धारण किया जाता है वहां ऐसे नियमित निर्धारण के अंतर्गत अवधारित कुल आय पर कर, जोकि,–

(i) ऐसी किसी आय पर, जो ऐसी कटौती या संग्रहण के अधीन है और जिसे ऐसी कुल आय की संगणना करने में हिसाब में लिया गया है, अध्याय 17 के उपबंधों के अनुसार स्रोत पर काटे गए या संगृहीत किसी कर;

(ii) भारत के बाहर किसी देश में संदत्त कर के मद्दे पर धारा 90 के अधीन अनुज्ञात कर की किसी राहत;

(iii) धारा 90क में निर्दिष्ट भारत के बाहर किसी विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्र में संदत्त कर के मद्दे उस धारा के अधीन अनुज्ञात कर की किसी राहत;

(iv) भारत के बाहर किसी देश में संदत्त कर के मद्दे संदेय भारतीय आय-कर से धारा 91 के अधीन अनुज्ञात किसी कटौती; और

(v) धारा 115ञकक 15क[या धारा 115ञ] के उपबंधों के अनुसार मुजरा किए जाने के लिए अनुज्ञात किसी कर प्रत्यय,

की रकम को घटा कर आए।]

स्पष्टीकरण 2.–जहां किसी निर्धारण वर्ष के संबंध में धारा 147 16[या धारा 153क] के अंतर्गत कोर्इ निर्धारण पहली बार किया जाता है, वहां इस प्रकार किए गए निर्धारण को इस धारा के प्रयोजनों के लिए नियमित निर्धारण माना जाएगा।

17[स्पष्टीकरण 3.–स्पष्टीकरण 1 और उपधारा (3) में "धारा 143 की उपधारा (1) के अंतर्गत अवधारित कुल आय पर कर" के अंतर्गत धारा 143 के अंतर्गत देय अतिरिक्त आय-कर, यदि कोर्इ हो, नहीं होगा।]

(2) जहां 18[धारा 143 की उपधारा (1) के अंतर्गत कुल आय के अवधारण की या] नियमित निर्धारण के पूरा होने की तारीख के पूर्व, निर्धारिती द्वारा धारा 140क के अंतर्गत या अन्यथा कर का भुगतान कर दिया जाता है, वहां–

(i) ब्याज इस धारा के पूर्वगामी उपबंधों के अनुसार उस तारीख तक परिकलित किया जाएगा, जिसको कर का इस प्रकार भुगतान किया जाता है और उसमें से इस धारा के अंतर्गत प्रभार्य ब्याज के प्रति धारा 140क अंतर्गत संदत्त ब्याज को, यदि कोर्इ है, घटा दिया जाएगा;

(ii) इसके पश्चात् उस रकम पर जितनी से इस प्रकार संदत्त कर और साथ ही संदत्त अग्रिम कर निर्धारित कर से कम पड़ जाता है, पूर्वोक्त दर से परिकलित किया जाएगा।

(3) जहां धारा 147 19[या धारा 153क] के अधीन पुन:निर्धारण या पुन:संगणना के आदेश के परिणामस्वरूप, ऐसी रकम जिस पर उपधारा (1) के अंतर्गत ब्याज संदेय था, बढ़ार्इ जाती है वहां निर्धारिती 20[धारा 143 की उपधारा (1) के अधीन कुल आय के अवधारण की] 21[तारीख के ठीक पश्चात्वर्ती दिन को प्रारंभ होने वाली और जहां कोर्इ नियमित निर्धारण जैसा उपधारा (1) में निर्दिष्ट किया गया है, किया जाता है वहां ऐसे नियमित निर्धारण की तारीख के ठीक पश्चात्वर्ती दिन को] और धारा 147 19[या धारा 153क] के अंतर्गत पुन:निर्धारण या पुन:संगणना की तारीख को समाप्त होने वाली अवधि में समाविष्ट प्रत्येक मास या मास के किसी भाग के लिए उस रकम पर, जितनी से ऐसे पुन:निर्धारण या पुन:संगणना के आधार पर अवधारित कुल आय पर कर, 20[धारा 143 की उपधारा (1) के अंतर्गत या] पूर्वोक्त नियमित निर्धारण के आधार पर अवधारित कुल आय] पर कर से अधिक हो जाता है, 22[एक] प्रतिशत की दर से साधारण ब्याज का भुगतान करने का दायी होगा।

स्पष्टीकरण.–23[* * *]

(4) जहां धारा 154 या धारा 155 या धारा 250 या धारा 254 या धारा 260 या धारा 262 या धारा 263 या धारा 264 के अधीन किसी आदेश के अथवा धारा 245घ की उपधारा (4) के अधीन समझौता आयोग के किसी आदेश के परिणामस्वरूप, ऐसी रकम, जिस पर उपधारा (1) या उपधारा (3) के अंतर्गत ब्याज संदेय था, यथास्थिति, बढ़ार्इ गर्इ है, या घटार्इ गर्इ है वहां ब्याज तदनुसार बढ़ा या घटा दिया जाएगा और–

(i) किसी ऐसी दशा में, जहां ब्याज बढ़ाया जाता है वहां निर्धारण अधिकारी, संदेय राशि, उल्लिखित करते हुए, विहित प्ररूप में मांग की सूचना की तामील निर्धारिती पर करेगा और ऐसी मांग की सूचना को धारा 156 के अंतर्गत सूचना समझा जाएगा और इस अधिनियम के उपबंध तदनुसार लागू होंगे;

(ii) किसी ऐसी दशा में, जहां ब्याज घटाया जाता है वहां संदत्त अधिक ब्याज का, यदि कोर्इ हो, प्रतिदाय किया जाएगा।

(5) इस धारा के उपबंध 1 अप्रैल, 1989 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष और पश्चात्वर्ती निर्धारण वर्षों के लिए निर्धारणों के संबंध में लागू होंगे।]

 

10. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से अंत:स्थापित।

11. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से "नियमित निर्धारण की तारीख तक" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

12. वित्त अधिनियम, 1995 द्वारा 1.4.1989 से भूतलक्षी प्रभाव से "या नियमित निर्धारण की तारीख तक" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

13. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 2003 द्वारा 8.9.2003 से "सवा" के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व कोट किए शब्द का वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.6.1999 से तथा वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.6.2001 से संशोधित किया गया था।

14. "दायी होगा" पद के अर्थ के लिए सम्बंधित केस लाज़ देखिए।

15. वित्त अधिनियम, 2006 द्वारा 1.4.2007 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से और वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.1989 से भूतलक्षी प्रभाव से संशोधित स्पष्टीकरण 1 इस प्रकार था :

'स्पष्टीकरण 1.–इस धारा में, "निर्धारित कर" से अभिप्रेत है धारा 143 की उपधारा (1) के अंतर्गत अवधारित कुल आय पर या नियमित निर्धारण पर वह कर जो ऐसी किसी आय पर, जो ऐसी कटौती या संग्रहण के अधीन है और जिसे ऐसी कुल आय की संगणना करने में हिसाब में लिया गया है, अध्याय 17 के उपबंधों के अनुसार स्रोत पर काटे गए या संगृहीत कर की रकम को घटा कर आए।'

15क. वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.4.2013 से अंत:स्थापित।

16. वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.6.2003 से अंत:स्थापित।

17. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से प्रतिस्थापित।

18. यथोक्त द्वारा अंत:स्थापित।

19. वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.6.2003 से अंत:स्थापित।

20. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से "या नियमित निर्धारण की तारीख" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

21. वित्त अधिनियम, 1995 द्वारा 1.4.1989 से भूतलक्षी प्रभाव से "या नियमित निर्धारण की तारीख के ठीक पश्चात्वर्ती दिन को" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

22. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 2003 द्वारा 8.9.2003 से "सवा" के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व कोट किए शब्द का वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.6.1999 से तथा वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.6.2001 से संशोधित किया गया था।

23. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से लोप किया गया।

 

 

[वित्त अधिनियम, 2013 द्वारा संशोधित रूप में]

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