आय से प्रस्तुत वापसी में चूक के लिए ब्याज
94[च–कुछ दशाओं में प्रभार्य ब्याज95
आय की विवरणी देने में व्यतिक्रम के लिए ब्याज
234क. (1) जहां धारा 139 की उपधारा (1) या उपधारा (4) के अंतर्गत या धारा 142 की उपधारा (1) के अंतर्गत सूचना के उत्तर में किसी निर्धारण वर्ष के लिए आय की विवरणी नियत तारीख के पश्चात् दी जाती है या नहीं दी जाती है, वहां निर्धारिती, नियत तारीख के ठीक पश्चात्वर्ती तारीख को प्रारंभ होने वाली और–
(क) जहां विवरणी नियत तारीख के पश्चात् दी जाती है वहां विवरणी देने की तारीख को समाप्त होने वाली; या
(ख) जहां कोर्इ विवरणी नहीं दी गर्इ है वहां, धारा 144 के अंतर्गत निर्धारण के पूरा होने की तारीख को समाप्त होने वाली,
अवधि में समाविष्ट प्रत्येक मास या किसी मास के भाग के लिए 96[धारा 143 की उपधारा (1) के अंतर्गत या नियमित निर्धारण पर अवधारित कुल आय पर कर की ऐसी रकम पर जो कि संदत्त अग्रिम कर, यदि कोर्इ हो, और स्रोत पर कटौती किए गए या संगृहीत किसी कर का घटा कर आए] 97-98[एक] प्रतिशत की दर से साधारण ब्याज का भुगतान करने का दायी होगा99]।
स्पष्टीकरण 1.–इस धारा में "नियत तारीख" से निर्धारिती की दशा में यथा लागू धारा 139 की उपधारा (1) में उल्लिखित तारीख अभिप्रेत है।
1[स्पष्टीकरण 2.–इस उपधारा में "धारा 143 की उपधारा (1) के अंतर्गत यथा अवधारित कुल आय पर कर" के अंतर्गत धारा 143 के अधीन देय अतिरिक्त आय-कर, यदि कोर्इ हो, नहीं होगा।]
स्पष्टीकरण 3.–जहां, किसी निर्धारण वर्ष के संबंध में, धारा 147 1क[या धारा 153क] के अंतर्गत कोर्इ निर्धारण पहली बार किया जाता है, वहां इस प्रकार किए गए निर्धारण को इस धारा के प्रयोजनों के लिए नियमित निर्धारण माना जाएगा।
स्पष्टीकरण 4.–2[* * *]
(2) उपधारा (1) के अंतर्गत संदेय ब्याज में से इस धारा के अंतर्गत प्रभार्य ब्याज के मद्दे धारा 140क के अंतर्गत संदत्त ब्याज को, यदि कोर्इ हो, घटा दिया जाएगा।
(3) जहां 3[धारा 143 की उपधारा (1) के अंतर्गत आय के अवधारण के पश्चात् या] धारा 143 की उपधारा (3) या धारा 144 या धारा 147 के अंतर्गत किसी निर्धारण के पूरा होने के पश्चात्, धारा 148 1क[या धारा 153क] के अधीन जारी की गर्इ किसी सूचना द्वारा अपेक्षित किसी निर्धारण वर्ष के लिए आय की विवरणी ऐसी सूचना के अंतर्गत अनुज्ञात समय की समाप्ति के पश्चात् प्रस्तुत की जाती है या प्रस्तुत नहीं की जाती, वहां निर्धारिती पूर्वोक्त अनुज्ञात समय की समाप्ति के ठीक पश्चात्वर्ती दिन को प्रारंभ होने वाली, और–
(क) जहां विवरणी पूर्वोक्त समय की समाप्ति होने के पश्चात् दी जाती है, विवरणी देने की तारीख को समाप्त होने वाली; या
(ख) जहां कोर्इ विवरणी नहीं दी गर्इ है वहां, धारा 147 3क[या धारा 153क के अंतर्गत पुन: निर्धारण] या पुन: संगणना के पूरा होने की तारीख को समाप्त होने वाली,
अवधि में समाविष्ट प्रत्येक मास या किसी मास के भाग के लिए उस रकम पर जितनी से ऐसे पुन: निर्धारण या पुन: संगणना के आधार पर अवधारित कुल आय पर कर 4[धारा 143 की उपधारा (1) के अंतर्गत या] पूर्वोक्त निर्धारण के आधार पर अवधारित कुल आय पर कर से अधिक हो जाता है, 5-6[एक] प्रतिशत की दर से साधारण ब्याज का भुगतान करने का दायी होगा।
स्पष्टीकरण.–7[* * *]
(4) जहां धारा 154 या धारा 155 या धारा 250 या धारा 254 या धारा 260 या धारा 262 या धारा 263 या धारा 264 के अंतर्गत किसी आदेश के या धारा 245घ की उपधारा (4) के अंतर्गत समझौता आयोग के किसी आदेश के परिणामस्वरूप ऐसे कर की रकम, जिस पर इस धारा की उपधारा (1) या उपधारा (3) के अंतर्गत ब्याज संदेय था, यथास्थिति, बढ़ार्इ गर्इ या घटार्इ गर्इ है, वहां ब्याज तदनुसार बढ़ा या घटा दिया जाएगा, और–
(i) किसी ऐसी दशा में, जहां ब्याज बढ़ाया जाता है वहां निर्धारण अधिकारी संदेय राशि का उल्लेख करते हुए विहित प्ररूप में मांग की सूचना की तामील निर्धारिती पर करेगा और ऐसी मांग की सूचना को धारा 156 के अंतर्गत सूचना समझा जाएगा और इस अधिनियम के उपबंध तदनुसार लागू होंगे;
(ii) किसी ऐसी दशा में, जहां ब्याज घटाया जाता है, वहां संदत्त अधिक ब्याज का, यदि कोर्इ हो, प्रतिदाय किया जाएगा।
(5) इस धारा के उपबंध 1 अप्रैल, 1989 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष और पश्चात्वर्ती निर्धारण वर्षों के लिए निर्धारणों के संबंध में लागू होंगे।]
94. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से अंत:स्थापित।
95. तारीख 23.5.1996 की अधिसूचना सं. फा. सं. 400/234/95-आर्इ.टी.(बी) भी देखिए। कुछ मामलों में शास्तिक ब्याज को अधित्यक्त करने के लिए मुख्य आयुक्त/महानिदेशक (अन्वेषण) को प्राधिकृत करने वाली प्रेस विज्ञप्ति और परिपत्र सं. 783, तारीख 18.11.1999 भी देखिये। ब्यौरे के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
96. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से "नियमित निर्धारण पर यथा अवधारित कुल आय पर कर की ऐसी रकम जो कि वह संदत्त अग्रिम कर, यदि कोर्इ हो, और स्रोत पर कटौती किए गए किसी कर को घटाकर आए" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
97-98. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 2003 द्वारा 8.9.2003 से "सेवा" के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व कोट किए शब्द का वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.6.1999 से तथा वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.6.2001 से संशोधित किया गया था।
99. "दायी होगा" पद के अर्थ के लिए देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल खंड 3.
1. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से प्रतिस्थापित।
1क. वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.6.2003 से अंत:स्थापित।
2. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.1989 से, भूतलक्षी प्रभाव से लोप किया गया। लोप किए जाने से पूर्व, प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से यथा अंत:स्थापित स्पष्टीकरण 4 निम्नानुसार था :
'स्पष्टीकरण 4.–इस उपधारा में, "धारा 143 की उपधारा (1) के अंतर्गत यथा अवधारित कुल आय पर या नियमित निर्धारण पर कर" धारा 140क के अंतर्गत देय ब्याज की संगणना करने के प्रयोजनों के लिए विवरणी में घोषित कुल आय पर कर समझा जाएगा।'
3. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से अंत:स्थापित।
3क. वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.6.2003 से अंत:स्थापित।
4. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से अंत:स्थापित।
5-6. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 2003 द्वारा 8.9.2003 से "सेवा" के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व कोट किए शब्द का वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.6.1999 से तथा वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.6.2001 से संशोधित किया गया था।
7. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से लोप किया गया।
[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2004 द्वारा संशोधित रूप में]

