आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 230

कर-समाशोधन प्रमाणपत्र

धारा

धारा संख्या

230

अध्याय शीर्षक

अध्याय XVII - कर संग्रह और वसूली

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2018

कर-समाशोधन प्रमाणपत्र

कर-समाशोधन प्रमाणपत्र

कर-समाशोधन प्रमाणपत्र

230. (1) ऐसे अपवादों के अधीन रहते हुए, जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में, अधिसूचना द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, ऐसा कोर्इ व्यक्ति,–

() जो भारत में अधिवासी नहीं है ;

() जो अपने कारबार, वृत्ति या नियोजन के संबंध में भारत में आया है ; और

() जिसकी भारत में किसी स्रोत से व्युत्पन्न आय है,

भारत का राज्यक्षेत्र भू-मार्ग, जलमार्ग या वायुमार्ग से तब तक नहीं छोड़ेगा जब तक कि वह ऐसे प्राधिकारी को, जो विहित किया जाए,–

(i) अपने नियोजक से, या

(ii) ऐसे व्यक्ति से, जिसके माध्यम से ऐसा व्यक्ति आय प्राप्त करता है,

विहित प्ररूप में इस आशय का कोर्इ वचनबंध नहीं दे देता है कि ऐसे व्यक्ति द्वारा, जो भारत में अधिवासी नहीं है, संदेय कर का खंड (i) में निर्दिष्ट नियोजक द्वारा या खंड (ii) में निर्दिष्ट व्यक्ति द्वारा संदाय किया जाएगा और विहित प्राधिकारी वचनबंध की प्राप्ति पर ऐसे व्यक्ति को भारत छोड़ने के लिए तुरंत अनापत्ति प्रमाणपत्र देगा :

परंतु उपधारा (1) की कोर्इ भी बात ऐसे व्यक्ति को लागू नहीं होगी जो भारत में अधिवासी नहीं है बल्कि किसी विदेशी पर्यटक के रूप में या कारबार, वृत्ति या नियोजन से असंबद्ध किसी अन्य प्रयोजन के लिए भारत में आता है।

(1क) ऐसे अपवादों के अधीन रहते हुए, जो केंद्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, ऐसा प्रत्येक व्यक्ति, जो अपने प्रस्थान के समय भारत में अधिवासी है, आय-कर प्राधिकारी को या ऐसे अन्य प्राधिकारी को, जो विहित किया जाए, विहित प्ररूप में–

() धारा 139क के अधीन उसे आबंटित किये गये स्थायी खाता संख्यांक बताएगा :

परंतु यदि ऐसा स्थायी खाता संख्यांक उसे आबंटित नहीं किया गया है या उसकी कुल आय आय-कर से प्रभार्य नहीं है या उसके लिए इस अधिनियम के अधीन स्थायी खाता संख्यांक प्राप्त करना अपेक्षित नहीं है, तो ऐसा व्यक्ति विहित प्ररूप में एक प्रमाणपत्र प्रस्तुत करेगा ;

() भारत के बाहर से उसके जाने का प्रयोजन बताएगा ;

() भारत के बाहर उसके ठहरने की अनुमानित अवधि के बारे में बताएगा :

परंतु ऐसा कोर्इ व्यक्ति,–

(i) जो अपने प्रस्थान के समय भारत में अधिवासी है ; और

(ii) जिसके संबंध में ऐसी परिस्थितियां विद्यमान हैं जिनके कारण आय-कर प्राधिकारी की राय में इस धारा के अधीन प्रमाणपत्र प्राप्त करना उसके लिए आवश्यक हो जाता है,

भारत का राज्यक्षेत्र भू-मार्ग, जलमार्ग या वायुमार्ग से तब तक नहीं छोड़ेगा जब तक कि वह आय-कर प्राधिकारी से इस बात का कथन करने वाला एक प्रमाणपत्र प्राप्त नहीं कर लेता है कि उसका इस अधिनियम या धन-कर अधिनियम, 1957 (1957 का 27) या दान-कर अधिनियम, 1958 (1958 का 18) या व्यय-कर अधिनियम, 1987 (1987 का 35) के अधीन कोर्इ दायित्व नहीं है या यह कि ऐसे करों में से, जो उस व्यक्ति द्वारा संदेय हैं या संदेय हो सकते हैं, सब या किसी के भुगतान के लिए समाधानप्रद इंतजाम कर दिए गए हैं :

परंतु* कोर्इ भी आय-कर प्राधिकारी, ऐसे किसी व्यक्ति के लिए, जो भारत में अधिवासी है, इस धारा के अधीन प्रमाणपत्र प्राप्त करना तब तक अनिवार्य नहीं बनाएगा जब तक कि वह उसके लिए कारण अभिलिखित नहीं कर देता है और प्रधान मुख्य आय-कर आयुक्त या मुख्य आय-कर आयुक्त का पूर्व अनुमोदन प्राप्त नहीं कर लेता है।

(2) यदि किसी पोत या विमान का स्वामी या पोत भाड़े पर लेने वाला, जो व्यक्तियों को भारत के राज्यक्षेत्र के किसी स्थान से भारत के बाहर किसी स्थान को ले जाता है, किसी ऐसे व्यक्ति को, जिसे उपधारा (1) या उपधारा (1ग) का प्रथम परन्तुक लागू होती है, पहले अपना यह समाधान किए बिना कि उस उपधारा द्वारा अपेक्षित प्रमाणपत्र ऐसे व्यक्ति के कब्जे में है, ऐसे पोत या विमान से यात्रा करने देता है तो, वह ऐसे व्यक्ति द्वारा संदेय कर की संपूर्ण रकम के, यदि कोर्इ हो, या उसके उतने भाग के भुगतान के लिए व्यक्तिगत रूप से दायित्वाधीन होगा, जितना उस मामले की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, निर्धारण अधिकारी अवधारित करे।

(3) उपधारा (2) के अंतर्गत किसी पोत या विमान के स्वामी या पोत भाड़े पर लेने वाले द्वारा संदेय किसी राशि के संबंध में, यथास्थिति, स्वामी या पोत भाड़े पर लेने वाला ऐसी राशि के लिए चूक करने वाला निर्धारिती, समझा जाएगा और ऐसी राशि उससे इस अध्याय में उपबंधित रीति से इस प्रकार वसूलनीय होगा मानो वह कर की बकाया हो।

(4) बोर्ड ऐसे किसी मामले का विनियमन करने के लिए नियम बना सकेगा जो इस धारा के उपबंधों को कार्यान्वित करने के प्रयोजन के लिए आवश्यक या उसके आनुषंगिक हो।

स्पष्टीकरण–इस धारा के प्रयोजनों के लिए ''स्वामी'' और ''भाड़े पर लेने वाला'' पदों के अंतर्गत ऐसा प्रतिनिधि, अभिकर्ता या कर्मचारी भी है जो पोत या विमान द्वारा यात्रा करने के लिए व्यक्तियों को अनुज्ञात करने के लिए स्वामी या पोत भाड़े पर लेने वाले द्वारा सशक्त किया गया है।

 

*"परन्तु" के बाद "यह और कि" शब्द आने चाहिए।

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2018 द्वारा संशोधित रूप में]

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