वार्षिक मूल्य किस प्रकार अवधारित किया जाता है
वार्षिक मूल्य किस प्रकार अवधारित किया जाता है
23. (1) धारा 22 के प्रयोजनों के लिए, किसी संपत्ति का वार्षिक मूल्य निम्नलिखित समझा जाएगा, अर्थात् :—
(क) वह राशि जिस पर संपत्ति के वर्षानुवर्ष किराये पर दिए जाने की युक्तियुक्त रूप से प्रत्याशा की जा सकती हो; या
(ख) जहां संपत्ति या संपत्ति का कोर्इ भाग किराए पर दिया जाता है और उसकी बाबत स्वामी द्वारा प्राप्त या प्राप्य वास्तविक किराया खंड (क) में निर्दिष्ट राशि से अधिक है, वहां इस प्रकार प्राप्त या प्राप्य रकम; या
(ग) जहां संपत्ति या संपत्ति का कोर्इ भाग किराए पर दिया जाता है और वह संपूर्ण पूर्ववर्ष या उसके किसी भाग के दौरान खाली था और इस प्रकार खाली रहने के कारण इसकी बाबत स्वामी द्वारा प्राप्त या प्राप्य वास्तविक किराया खंड (क) में निर्दिष्ट राशि से कम है वहां इस प्रकार प्राप्त या प्राप्य रकम :
परंतु संपत्ति की बाबत किसी स्थानीय प्राधिकारी द्वारा उद्गृहीत कर की (ऐसे पूर्ववर्ष को दृष्टि में रखे बिना जिसमें ऐसे करों का संदाय करने का दायित्व ऐसे स्वामी द्वारा निरंतर अपनार्इ जाने वाली लेखा पद्धति के अनुसार उसके द्वारा उपगत किया गया था) उस पूर्ववर्ष की जिसमें ऐसे करों का उसके द्वारा वास्तव में संदाय किया जाता है, संपत्ति के वार्षिक मूल्य को अवधारित करने में कटौती की जाएगी।
स्पष्टीकरण.–इस उपधारा के खंड (ख) या खंड (ग) के प्रयोजनों के लिए स्वामी द्वारा प्राप्त या प्राप्य वास्तविक किराए की रकम के अंतर्गत ऐसे नियमों के अधीन जो इस निमित्त बनाए जाएं किराए की वह रकम नहीं होगी जिसे स्वामी वसूल नहीं कर सकता है।
(2) जहां संपत्ति में कोर्इ ऐसा मकान या मकान का भाग है जो—
(क) स्वामी के स्वयं उसके निवास के प्रयोजनों के लिए अधिभोग में है; या
(ख) स्वामी द्वारा इस कारण उसका वस्तुत: अधिभोग नहीं रखा जा सकता, कि उसके नियोजन, कारबार या वृत्ति का स्थान अन्य स्थान पर होने के कारण उसे अन्य स्थान में किसी ऐसे भवन में निवास करना पड़ रहा है जो उसका नहीं है,
वहां ऐसे मकान या मकान के भाग का वार्षिक मूल्य शून्य माना जाएगा।
(3) उपधारा (2) के उपबंध लागू नहीं होंगे, यदि—
(क) मकान या मकान का भाग संपूर्ण पूर्ववर्ष या उसके भाग के दौरान वास्तव में किराये पर दिया गया है; या
(ख) स्वामी द्वारा उससे कोर्इ अन्य फायदा उठाया गया है।
(4) जहां उपधारा (2) में निर्दिष्ट संपत्ति में 32क[दो से अधिक गृह] हैं, वहां—
(क) उस उपधारा के उपबंध ऐसे गृहों में से केवल 32ख[दो गृह] की बाबत लागू होंगे जो निर्धारिती अपने विकल्प पर इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे;
(ख) 32ग[उस गृह या उन गृहों से भिन्न], जिसकी बाबत निर्धारिती ने खंड (क) के अधीन विकल्प का प्रयोग किया है, गृह या गृहों का वार्षिक मूल्य, उपधारा (1) के अधीन ऐसे अवधारित किया जाएगा मानो ऐसा गृह या ऐसे गृह किराये पर दिया गया था/दिए गए थे।
33[(5) जहां किसी भवन या उससे संलग्न भूमि को समाविष्ट करने वाली कोर्इ संपत्ति या संपत्ति के भाग व्यापार स्टाक के रूप में धारित किए जाते हैं और संपत्ति या संपत्ति का कोर्इ भाग संपूर्ण पूर्ववर्ष या उसके किसी भाग के दौरान किराए पर नहीं दिया जाता है, वहां ऐसी संपत्ति या संपत्ति के भाग का वार्षिक मूल्य उस वित्तीय वर्ष के अंत से 33क[दो वर्ष] की अवधि तक के लिए जिसमें सक्षम प्राधिकारी से प्राप्त संपत्ति के सन्निर्माण का समापन प्रमाणपत्र प्राप्त होता है, शून्य के रूप में किया जाएगा।]
32क. वित्त अधिनियम, 2019 द्वारा 1.4.2020 से "एक से अधिक गृह" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
32ख. वित्त अधिनियम, 2019 द्वारा 1.4.2020 से "एक गृह" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
32ग. वित्त अधिनियम, 2019 द्वारा 1.4.2020 से "उस गृह से भिन्न" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
33. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2018 से अंत:स्थापित।
33क. वित्त अधिनियम, 2019 द्वारा 1.4.2020 से "एक वर्ष" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2024 द्वारा संशोधित रूप में]

