वसूली के अन्य ढंग
वसूली के अन्य ढंग
226. (1) जहां धारा 222 के अंतर्गत कोर्इ प्रमाणपत्र तैयार नहीं किया गया है वहां निर्धारण अधिकारी इस धारा में उपबंधित ढंगों में से किसी एक या अधिक द्वारा कर की वसूली कर सकेगा।
(1क) जहां धारा 222 के अंतर्गत कोर्इ प्रमाणपत्र तैयार किया गया है, वहां कर वसूली अधिकारी, इस धारा में उल्लिखित वसूली के ढंगों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, इस धारा में उपबंधित ढंगों में से किसी एक या अधिक द्वारा कर की वसूली कर सकेगा।
(2) यदि कोर्इ निर्धारिती ''वेतन'' शीर्ष के अंतर्गत प्रभार्य कोर्इ आय प्राप्त करता है तो निर्धारण अधिकारी या कर वसूली अधिकारी उसका संदाय करने वाले किसी व्यक्ति से यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह ऐसी अध्यपेक्षा की तारीख के पश्चात्वर्ती किसी भुगतान से कर की ऐसे किसी बकाया की कटौती कर ले, जो ऐसे निर्धारिती द्वारा देय हो और ऐसा व्यक्ति ऐसी किसी अध्यपेक्षा का अनुपालन करेगा और इस प्रकार कटौती की गर्इ राशि केन्द्रीय सरकार के खाते में या जैसे बोर्ड निर्देश करे, संदत्त करेगा :
परन्तु वेतन का कोर्इ ऐसा भाग, जिसे सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) की धारा 60 के अंतर्गत सिविल न्यायालय की डिक्री के निष्पादन में कुर्की से छूट प्राप्त है, इस उपधारा के अंतर्गत की गर्इ किसी अध्यपेक्षा से छूट प्राप्त होगा।
(3)(i) निर्धारण अधिकारी या कर वसूली अधिकारी किसी समय या समय-समय पर लिखित सूचना द्वारा किसी ऐसे व्यक्ति से, जिनके द्वारा निर्धारिती को धन देय है या देय हो जाए या किसी ऐसे व्यक्ति से, जो निर्धारिती के लिए या उसके लेखे धन धारित करता है या धन तत्पश्चात् धारित करे यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह या तो धन के देय हो जाने पर या धारित होने पर तत्काल अथवा सूचना में उल्लिखित समय पर या उसके भीतर (जो धन के देय होने या धारित होने से पहले का नहीं है) उतना धन, जितना बकाया के संबंध में निर्धारिती द्वारा देय रकम भुगतान करने के लिए पर्याप्त है या उस रकम के बराबर या उससे कम होने की दशा में संपूर्ण धन निर्धारण अधिकारी या कर वसूली अधिकारी को भुगतान करे।
(ii) इस उपधारा के अंतर्गत सूचना किसी ऐसे व्यक्ति को दी जा सकेगी जो निर्धारिती के लिए या उसके लेखे किसी अन्य व्यक्ति के साथ संयुक्त रूप से कोर्इ धन धारित करता है या तत्पश्चात् धारित करे तथा इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए ऐसे लेखे में संयुक्त धारकों के शेयरों के बारे में, जब तक कि प्रतिकूल साबित न हो जाए, यह उपधारणा की जाएगी, कि वे बराबर हैं।
(iii) सूचना की एक प्रति निर्धारिती को उसके ऐसे अंतिम पते पर जो निर्धारण अधिकारी या कर वसूली अधिकारी को ज्ञात हो और संयुक्त लेखे की दशा में, सब संयुक्त धारकों को उनके ऐसे अंतिम पतों पर जो निर्धारण अधिकारी या कर वसूली अधिकारी को ज्ञात हो, भेजी जाएगी।
(iv) इस उपधारा में अन्यथा उपबंधित के सिवाय, ऐसा हर व्यक्ति, जिसे इस उपधारा के अंतर्गत सूचना दी जाती है, ऐसी सूचना का अनुपालन करने के लिए आबद्ध होगा तथा विशिष्टतया, जहां ऐसी कोर्इ सूचना किसी डाकखाने, बैंककारी कंपनी, या बीमाकर्ता को दी जाती है, वहां भुगतान करने से पूर्व किसी प्रविष्टि, पृष्ठांकन या वैसी ही किसी कार्यवाही के किए जाने के प्रयोजनों के लिए किसी पासबुक, निक्षेप रसीद, पालिसी या किसी अन्य दस्तावेज का पेश करना, किसी प्रतिकूल नियम, प्रथा या अपेक्षा के होते हुए भी, आवश्यक न होगा।
(v) जहां किसी ऐसी संपत्ति के संबंध में, जिसके संबंध में इस उपधारा के अंतर्गत कोर्इ सूचना दी गर्इ है, कोर्इ दावा सूचना की तारीख के बाद उत्पन्न होता है, वहां वह सूचना में की गर्इ किसी मांग के विरुद्ध शून्य होगा।
(vi) जहां ऐसा कोर्इ व्यक्ति, जिसको इस उपधारा के अंतर्गत सूचना भेजी गर्इ है, शपथ पर कथन द्वारा उसके बारे में, यह आक्षेप करता है कि मांगी गर्इ राशि या उसका कोर्इ भाग निर्धारिती को देय नहीं है या यह कि वह निर्धारिती के लिए या उसके लेखे कोर्इ धन धारित नहीं करता है, वहां इस उपधारा की किसी बात से यह नहीं समझा जाएगा कि ऐसे व्यक्ति से, यथास्थिति, ऐसी कोर्इ राशि या उसका कोर्इ भाग अदा करने की अपेक्षा है, किंतु यदि यह पता चलता है कि ऐसा कथन किसी तात्विक तथ्य में मिथ्या था तो ऐसा व्यक्ति उस परिमाण तक जिस तक सूचना की तारीख को उसका निर्धारिती के प्रति दायित्व था या उस परिमाण तक जिस तक इस अधिनियम के अंतर्गत देय किसी राशि के लिए निर्धारिती का दायित्व है, इनमें से जो भी कम हो, उस तक निर्धारण अधिकारी या कर वसूली अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से दायी होगा।
(vii) निर्धारण अधिकारी या कर वसूली अधिकारी किसी समय या समय-समय पर इस उपधारा के अंतर्गत की गर्इ किसी सूचना का संशोधन या प्रतिसंहरण कर सकेगा या ऐसी सूचना के अनुसरण में, कोर्इ भुगतान करने का समय बढ़ा सकेगा।
(viii) निर्धारण अधिकारी या कर वसूली अधिकारी इस उपधारा के अंतर्गत दी गर्इ सूचना के अनुपालन में संदत्त रकम के लिए रसीद देगा और वह व्यक्ति, जिसने ऐसा भुगतान किया है, उस संदत्त रकम के परिमाण तक निर्धारिती के प्रति, अपने दायित्व से पूर्णत: मुक्त हो जाएगा।
(ix) वह व्यक्ति, जो इस अध्याय के अंतर्गत सूचना की प्राप्ति के पश्चात् निर्धारिती के प्रति किसी दायित्व का उन्मोचन उसे ही कर देता है, निर्धारिती के प्रति स्वयं इस प्रकार उन्मोचित दायित्व के परिमाण तक या इस अधिनियम के अंतर्गत देय किसी राशि के लिए निर्धारिती के दायित्व के परिमाण तक, इनमें से जो भी कम हो, निर्धारण अधिकारी या कर वसूली अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से दायी होगा।
(x) यदि कोर्इ ऐसा व्यक्ति, जिसे इस उपधारा के अंतर्गत सूचना भेजी गर्इ है, उसके अनुसरण में, निर्धारण अधिकारी या कर वसूली अधिकारी को भुगतान करने में असफल रहता है, तो वह सूचना में उल्लिखित रकम के संबंध में व्यतिक्रम करने वाला निर्धारिती समझा जाएगा और उस रकम की वसूली के लिए उसके विरुद्ध आगे की कार्यवाहियां धारा 222 से 225 तक में उपबंधित रीति से इस प्रकार की जा सकेंगी मानो वह उसके द्वारा देय कर की बकाया हो और सूचना का वही प्रभाव होगा जो कर वसूली अधिकारी का धारा 222 के अंतर्गत अपनी शक्तियों के प्रयोग में ऋण की कुर्की का होता है।
(4) निर्धारण अधिकारी या कर वसूली अधिकारी उस न्यायालय से, जिसकी अभिरक्षा में निर्धारिती का धन है, यह आवेदन कर सकेगा कि उसको ऐसे धन की पूरी रकम का या यदि वह देय कर से अधिक है, तो उतनी रकम का, जितनी कर उन्मोचन के लिए पर्याप्त है, भुगतान किया जाए।
(5) निर्धारण अधिकारी या कर वसूली अधिकारी यदि प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान आयुक्त या आयुक्त के साधारण या विशेष आदेश द्वारा इस प्रकार प्राधिकृत किया जाए तो, निर्धारिती द्वारा देय कर के किसी बकाया की वसूली तीसरी अनुसूची में दी गर्इ रीति से उसकी चल संपत्ति के करस्थम और विक्रय द्वारा कर सकेगा।
[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2019 द्वारा संशोधित रूप में]

