प्रमाण पत्र और संशोधन या उसके रद्द करने के अनुसरण में कार्यवाही रोकना
60[प्रमाणपत्र के अनुसरण में कार्यवाहियों का रोका जाना और उसका संशोधन या रद्द किया जाना
225. (1) किसी कर के भुगतान के लिए समय देना कर वसूली अधिकारी के लिए विधिपूर्ण होगा और जब वह ऐसा करता है तब वह इस प्रकार दिए गए समय की समाप्ति तक ऐसे कर की वसूली की कार्यवाहियों को रोके रखेगा।
(2) जहां कोर्इ आदेश, जिससे किसी ऐसे कर की मांग होती है, जिसके लिए प्रमाणपत्र तैयार किया गया है, इस अधिनियम के अंतर्गत अपील या अन्य कार्यवाही में उपांतरित किया गया है और उसके परिणामस्वरूप मांग घटा दी गर्इ है किंतु, वह आदेश इस अधिनियम के अंतर्गत आगे कार्यवाही का विषय है, वहां कर वसूली अधिकारी प्रमाणपत्र में उल्लिखित रकम के ऐसे भाग की, जो उक्त घटाए जाने के संबंध में है, वसूली उस अवधि तक रोके रखेगा जिस तक अपील या अन्य कार्यवाही लंबित रहती है।
(3) जहां कोर्इ प्रमाणपत्र तैयार किया गया है और तत्पश्चात् परादेय मांग की रकम इस अधिनियम के अंतर्गत अपील या अन्य कार्यवाही के परिणामस्वरूप घटा दी जाती है61, वहां कर वसूली अधिकारी, उस दशा में जिसमें वह आदेश, जो ऐसी अपील या अन्य कार्यवाही का विषय था, अंतिम और निश्चायक हो गया है, यथास्थिति, प्रमाणपत्र का संशोधन करेगा या उसको रद्द करेगा।]
60. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से प्रतिस्थापित। इससे पूर्व प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1988 से भूतलक्षी प्रभाव से यथासंशोधित की गयी थी।
61. "घटा दी जाती है" पद के अर्थ के लिए देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज़ मैनुअल, खंड 3.
[वित्त अधिनियम, 2008 द्वारा संशोधित रूप में]

