टैक्स वसूली अधिकारी किसके द्वारा वसूली प्रभावित हो रहा है
30[कर वसूली अधिकारी जिसके द्वारा वसूली की जानी है
223. (1) धारा 222 के अंतर्गत कार्रवार्इ करने के लिए सक्षम कर वसूली अधिकारी,–
(क) ऐसा कर वसूली अधिकारी होगा जिसकी अधिकारिता के भीतर निर्धारिती अपना कारबार या वृत्ति चलाता है या जिसकी अधिकारिता के भीतर उसके कारबार या वृत्ति का मुख्य स्थान स्थित है; या
(ख) ऐसा कर वसूली अधिकारी होगा जिसकी अधिकारिता के भीतर निर्धारिती निवास करता है अथवा निर्धारिती की कोर्इ चल या अचल संपत्ति स्थित है,
इस प्रयोजन के लिए ऐसी अधिकारिता वह अधिकारिता होगी जो बोर्ड द्वारा या ऐसे मुख्य आयुक्त या आयुक्त द्वारा, जो धारा 120 के अनुसरण में बोर्ड द्वारा इस संबंध में प्राधिकृत किया जाता है, जारी किए गए आदेशों या निर्देशों के अधीन कर वसूली अधिकारी को सौंपी जाए।
(2) जहां निर्धारिती की संपत्ति एक से अधिक कर वसूली अधिकारियों की अधिकारिता के भीतर है और वह कर वसूली अधिकारी, जिसके द्वारा प्रमाणपत्र तैयार किया जाता है–
(क) अपनी अधिकारिता के भीतर चल या अचल संपत्ति के विक्रय द्वारा संपूर्ण रकम वसूल करने में असमर्थ है, या
(ख) उसकी यह राय है कि इस अध्याय के अंतर्गत संपूर्ण रकम या उसके भाग की वसूली शीघ्रता पूर्वक करने या उसको सुनिश्चित करने के प्रयोजन के लिए ऐसा करना आवश्यक है,
वहां वह प्रमाणपत्र या जहां रकम का केवल कोर्इ भाग वसूल किया जाना है, वहां ऐसे प्रमाणपत्र की प्रति, जो विहित रीति31 से प्रमाणित है और जिसमें वसूल की जाने वाली रकम उल्लिखित है, उस कर वसूली अधिकारी को भेज सकेगा, जिसकी अधिकारिता के भीतर निर्धारिती रहता है या उसकी संपत्ति है और तब वह कर वसूली अधिकारी भी इस अध्याय के अंतर्गत रकम की वसूली करने के लिए इस प्रकार कार्यवाही करेगा मानो वह प्रमाणपत्र या उसकी प्रति उसके द्वारा तैयार की गर्इ हो।]
30. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से प्रतिस्थापित। इसके प्रतिस्थापन से पूर्व, प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1988 से भूतलक्षी प्रभाव से और कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.10.1975 से यथासंशोधित धारा 223 निम्नानुसार थी :
"223. कर वसूली अधिकारी जिसको प्रमाणपत्र जारी किया जाना है–(1) निर्धारण अधिकारी धारा 222 में निर्दिष्ट प्रमाणपत्र–
(क) उस कर वसूली अधिकारी को भेज सकेगा जिसकी अधिकारिता के भीतर निर्धारिती अपना कारबार या वृत्ति चलाता है या जिसकी अधिकारिता के भीतर उसके कारबार या वृत्ति का मुख्य स्थान स्थित है; या
(ख) उस कर वसूली अधिकारी को भेज सकेगा जिसकी अधिकारिता के भीतर निर्धारिती निवास करता है या निर्धारिती की कोर्इ अचल या चल संपत्ति स्थित है।
(2) जहां किसी निर्धारिती के पास एक से अधिक कर वसूली अधिकारी की अधिकारिता के भीतर संपत्ति है और वह कर वसूली अधिकारी, जिसे निर्धारण अधिकारी द्वारा प्रमाणपत्र भेजा गया है,–
(क) अपनी अधिकािरता के भीतर चल या अचल संपत्ति के विक्रय द्वारा संपूर्ण रकम वसूल करने में असमर्थ है, या
(ख) उसकी यह राय है कि इस अध्याय के अधीन संपूर्ण रकम या उसके किसी भाग की वसूली शीघ्र करने या उसको सुनिश्चित करने के प्रयोजन के लिए ऐसा करना आवश्यक है,
तो वह प्रमाणपत्र या, जहां रकम का केवल कोर्इ भाग वसूल किया जाना है, वहां ऐसे प्रमाणपत्र की प्रति, जो विहित रीति से प्रमाणित है और जिसमें वसूल की जाने वाली रकम उल्लिखित है, उस कर वसूली अधिकारी को भेज सकता है, जिसकी अधिकारिता के भीतर निर्धारिती निवास करता है या उसकी संपत्ति है और तब वह कर वसूली अधिकारी भी इस अध्याय के अंतर्गत रकम की वसूली के लिए इस प्रकार कार्यवाही करेगा मानो वह प्रमाणपत्र या उसकी प्रति निर्धारण अधिकारी द्वारा उसको भेजा गया प्रमाणपत्र है।"
31. नियम 117ख और फार्म सं. 57 देखिए।
[वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा संशोधित रूप में]

