आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 221

कर में व्यतिक्रम होने पर देय शास्ति

धारा

धारा संख्या

221

अध्याय शीर्षक

अध्याय XVII - कर संग्रह और वसूली

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2022

कर में व्यतिक्रम होने पर देय शास्ति

कर में व्यतिक्रम होने पर देय शास्ति

कर में व्यतिक्रम होने पर देय शास्ति

221. (1) जब कोर्इ निर्धारिती कर अदा करने में चूक करता है या चूक करने वाला समझा जाता है, तो वह बकाया रकम और धारा 220 की उपधारा (2) के अंतर्गत संदेय ब्याज की रकम के अतिरिक्त, ऐसी रकम शास्ति के रूप में भुगतान करने के दायित्वाधीन होगा जिसका निर्धारण अधिकारी निदेश दे और चालू रहने वाली चूक की दशा में, ऐसी अतिरिक्त रकम या रकमें देने के दायित्वाधीन होगा जिसका या जिनका निर्धारण अधिकारी समय-समय पर निदेश दे, किंतु इस प्रकार की शास्ति की कुल रकम बकाया कर की रकम से अधिक न होने पाए :

परन्तु ऐसी किसी शास्ति का उद्ग्रहण करने से पूर्व निर्धारिती को सुनवार्इ का उचित अवसर दिया जाएगा :

परन्तु यह और कि जहां निर्धारिती निर्धारण अधिकारी के समाधानप्रद रूप में यह साबित कर देता है कि चूक अच्छे और पर्याप्त कारणों से हुर्इ थी, वहां इस धारा के अंतर्गत कोर्इ शास्ति उद्गृहीत नहीं की जाएगी।

स्पष्टीकरण.–शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि किसी निर्धारिती का इस उपधारा के अंतर्गत किसी शास्ति के लिए दायित्वाधीन होना केवल इस तथ्य के कारण समाप्त नहीं हो जाएगा कि ऐसी शास्ति उद्गृहीत किए जाने के पहले उसने वह कर अदा कर दिया है।

(2) जहां कर की वह रकम, जिसके भुगतान में चूक होने के संबंध में शास्ति उद्गृहीत की गर्इ थी, किसी अंतिम आदेश के परिणामस्वरूप संपूर्ण रूप से घटा दी गर्इ है, वहां उद्गृहीत शास्ति रद्द कर दी जाएगी और भुगतान की गर्इ शास्ति की रकम का प्रतिदाय किया जाएगा।

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2022 द्वारा संशोधित रूप में]

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